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वाराणसी: अंतरराष्ट्रीय काशी घाट वॉक विश्वविद्यालय का वार्षिक समारोह संपन्न, विद्वान बोले- गंगा घाट स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए जरूरी
Sun, 16 Jan 2022 08:47 PM IST
उत्पल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: उत्पल कांत
Updated Sun, 16 Jan 2022 08:47 PM IST
सार
अंतरराष्ट्रीय काशी घाट वॉक विश्वविद्यालय के वार्षिक समारोह को संबोधित करते हुए भोजपुरी अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि बनारस के घाट केवल ज्ञान के द्रष्टा ही नहीं हैं बल्कि सर्जक भी हैं।
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अंतरराष्ट्रीय काशी घाट वॉक विश्वविद्यालय का वार्षिक समारोह
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय काशी घाट वॉक विश्वविद्यालय का वार्षिक समारोह रविवार को मनाया गया। घाट वॉक रीवा घाट से चलकर मानसरोवर व मणिकर्णिका से होता हुआ गायघाट पर समाप्त हुआ। इसके बाद गंगा पार रेती पर कबीर वाणी की प्रस्तुति हुई। सामासिक संस्कृति के प्रमाण के रूप में काशी के घाटों की विस्तार से चर्चा हुई।
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रविवार को पंचगंगा घाट पर घाटवाक को संबोधित करते हुए संस्थापक न्यूरो चिकित्सक प्रो. विजय नाथ मिश्र ने कहा कि घाटवाक सृजन, स्वास्थ्य और शिक्षा तीनों ही दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। इससे जुड़ने मात्र से व्यक्ति गति में आ जाती है और तमाम तरह की संकीर्णताओं से मुक्त हो जाता है।
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भोजपुरी अध्ययन केंद्र के समन्वयक व घाट वॉक के मानद डीन प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि बनारस के घाट केवल ज्ञान के द्रष्टा ही नहीं हैं बल्कि सर्जक भी हैं। डॉ. दया शंकर मिश्र दयालु ने कहा कि काशी के घाट एक दूसरे को जोड़ते हैं।
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ताना बाना समूह की प्रस्तुति से मंत्रमुग्ध हुए लोग
ताना बाना समूह की प्रस्तुति
- फोटो : अमर उजाला
ताना बाना समूह के देवेंद्र दास, गौरव मिश्र, कृष्णा और भगीरथ ने गुरु की करनी गुरू भरेगा... के साथ झीनी झीनी बिनी चदरिया... नामक कबीर भजन की प्रस्तुति दी। इस दौरान ग्रीन पुरुष के नाम से ख्यात मदन मोहन यादव, डॉ. अनिल सूर्यधर, मनकामना शुक्ल पथिक, उमेश गोस्वामी, डॉ. अमरजीत राम, जंत्रलेश्वर यादव, अष्टभुजा मिश्र, सत्यम, जितेंद्र कुमार, संतोष सैनी आदि मौजूद रहे।
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