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'बुद्धिजीवी आतंकवादी है कन्हैया कुमार'
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 25 Apr 2016 02:07 AM IST
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अपनी फिल्म के बारे में जानकारी देते निर्देशक विवेक।
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तमाम विरोधों के बाद 18 मई को जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के बाद रविवार को फिल्म ‘बुद्धा इन अ ट्रैफिक जाम’ की स्क्रीनिंग काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हुई। स्क्रीनिंग के लिए बीएचयू आए फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि आजकल शैक्षणिक संस्थानों में वामपंथी विचारधारा से जुड़े प्रोफेसर विद्यार्थियों को बुद्धिजीवी आतंकवादी बनाने का काम कर रहे हैं। कन्हैया कुमार भी बुद्धिजीवी आतंकवादी है। जिस तरह तालिबान में छात्रों को आतंकवादी और सुसाइड बॉम्बर बनाने का काम हो रहा है, वही काम हमारे देश में भी हो रहा है।
विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि फिल्म ‘बुद्धा इन अ ट्रैफिक जाम’ के जरिये शिक्षण संस्थान, बुद्धिजीवी वर्ग, एनजीओ और नक्सलियों के बीच के नेक्सस को तोड़ने की कोशिश की गई है। यही वजह है कि वामपंथी विचारधारा के लोग पिछले तीन साल से इसे रिलीज नहीं होने दे रहे। अब 13 मई को इस फिल्म को रिलीज करने की तैयारी है। कहा कि जो लोग आज अभिव्यक्ति की आजादी का मुद्दा उठा रहे हैं, दरअसल वही इसका गला घोंट रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस फिल्म को छात्र पसंद कर रहे हैं। 18 मई को जेएनयू में इसकी स्क्रीनिंग कराई थी, जिसमें साढ़े चार हजार विद्यार्थी शामिल हुए था। उस्मानिया विश्वविद्यालय, आईआईटी मुंबई, गांधीनगर, चेन्नई में भी यह फिल्म दिखाई जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में तमाम समस्याएं हैं और आज की युवा पीढ़ी उन समस्याओं का समाधान कर देश का निर्माण करना चाहती है लेकिन कई ताकतें ऐसी हैं, जो उन्हें ऐसा करने से रोक रही हैं। ट्रैफिक जाम की तरह तमाम समस्याओं से जूझ रहे सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए हमें लाखों गौतम बुद्ध की जरूरत है। इसीलिए इस फिल्म का नाम ‘बुद्धा इन अ ट्रैफिक जाम’ रखा गया। बताया कि इंदिरा गांधी के दौरान लगाए गए इमरजेंसी पर भी वह फिल्म बना रहे हैं। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से आयोजित स्क्रीनिंग में एक घंटे 48 मिनट की इस फिल्म को देखने के लिए स्वतंत्रता भवन का पूरा हॉल खचाखच भरा था। स्क्रीनिंग के बाद छात्र-छात्राओं ने फिल्म निर्देशक से सवाल जवाब भी किए। स्वागत संयोजक ज्ञान प्रकाश मिश्र ने किया। संचालन आशुतोष त्रिपाठी व धन्यवाद ज्ञापन स्वर्ण सुमन ने किया।
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बीएचयू के छात्रोें को ‘बुद्धा इन ए ट्रैफिक जाम’ से रूबरू कराने मुंबई से आए फिल्म के डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री ने रविवार को कहा कि शिक्षण संस्थानों के युवाओं में देशभक्ति के भावों को जगाने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से यह फिल्म युवाओं को दिखाई जा रही है।विवेक ने नदेसर स्थित एक होटल में बातचीत के दौरान कहा कि नक्सलियों, एनजीओ और विश्वविद्यालयों में किस तरीके से देश और समाज को बांटने की कोशिशें होती हैं, फिल्म में इसी पक्ष को दिखाया गया है। बताया कि यह फिल्म देश के 25 बड़े शैक्षणिक संस्थानों में दिखाई जा चुकी है। दूसरी फिल्म इमरजेंसी बनाने की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि महामना की तपोभूमि में आकर सुखद अनुभूति हुई। बनारस एक अलग मिजाज का शहर है। यहां की मस्ती, गलियां और गंगा घाट जीवन में अलग अहसास जगाते हैं।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है। शताब्दी वर्ष की शृंखला में कई कार्यक्रम भी हो रहे हैं लेकिन रविवार को बीएचयू में हुई फिल्म स्क्रीनिंग पर लोगाें ने सवाल खड़ा कर दिया। स्वतंत्रता भवन में फिल्म ‘बुद्धा इन अ ट्रैफिक जाम’ की स्क्रीनिंग हुई जिसमें कई बोल्ड सीन थे। इसे लेकर यही सवाल उठाया जा रहा था कि बीएचयू के शताब्दी वर्ष पर ये कैसा कार्यक्रम। कई छात्राएं तो बीच में ही फिल्म छोड़कर उठ गईं। वहीं प्रोफेसरों का कहना था कि अब तक बीएचयू में ऐसी तरह की फिल्म नहीं दिखाई गई। इस बाबत विवेक अग्निहोत्री ने भी माना था कि बैंडिट क्वीन के बाद इस फिल्म में सबसे ज्यादा बोल्ड सीन हैं। हालांकि सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म में कोई कैंची नहीं चलाई है।
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विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि फिल्म ‘बुद्धा इन अ ट्रैफिक जाम’ के जरिये शिक्षण संस्थान, बुद्धिजीवी वर्ग, एनजीओ और नक्सलियों के बीच के नेक्सस को तोड़ने की कोशिश की गई है। यही वजह है कि वामपंथी विचारधारा के लोग पिछले तीन साल से इसे रिलीज नहीं होने दे रहे। अब 13 मई को इस फिल्म को रिलीज करने की तैयारी है। कहा कि जो लोग आज अभिव्यक्ति की आजादी का मुद्दा उठा रहे हैं, दरअसल वही इसका गला घोंट रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस फिल्म को छात्र पसंद कर रहे हैं। 18 मई को जेएनयू में इसकी स्क्रीनिंग कराई थी, जिसमें साढ़े चार हजार विद्यार्थी शामिल हुए था। उस्मानिया विश्वविद्यालय, आईआईटी मुंबई, गांधीनगर, चेन्नई में भी यह फिल्म दिखाई जा चुकी है।
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उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में तमाम समस्याएं हैं और आज की युवा पीढ़ी उन समस्याओं का समाधान कर देश का निर्माण करना चाहती है लेकिन कई ताकतें ऐसी हैं, जो उन्हें ऐसा करने से रोक रही हैं। ट्रैफिक जाम की तरह तमाम समस्याओं से जूझ रहे सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए हमें लाखों गौतम बुद्ध की जरूरत है। इसीलिए इस फिल्म का नाम ‘बुद्धा इन अ ट्रैफिक जाम’ रखा गया। बताया कि इंदिरा गांधी के दौरान लगाए गए इमरजेंसी पर भी वह फिल्म बना रहे हैं। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से आयोजित स्क्रीनिंग में एक घंटे 48 मिनट की इस फिल्म को देखने के लिए स्वतंत्रता भवन का पूरा हॉल खचाखच भरा था। स्क्रीनिंग के बाद छात्र-छात्राओं ने फिल्म निर्देशक से सवाल जवाब भी किए। स्वागत संयोजक ज्ञान प्रकाश मिश्र ने किया। संचालन आशुतोष त्रिपाठी व धन्यवाद ज्ञापन स्वर्ण सुमन ने किया।
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बीएचयू के छात्रोें को ‘बुद्धा इन ए ट्रैफिक जाम’ से रूबरू कराने मुंबई से आए फिल्म के डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री ने रविवार को कहा कि शिक्षण संस्थानों के युवाओं में देशभक्ति के भावों को जगाने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से यह फिल्म युवाओं को दिखाई जा रही है।विवेक ने नदेसर स्थित एक होटल में बातचीत के दौरान कहा कि नक्सलियों, एनजीओ और विश्वविद्यालयों में किस तरीके से देश और समाज को बांटने की कोशिशें होती हैं, फिल्म में इसी पक्ष को दिखाया गया है। बताया कि यह फिल्म देश के 25 बड़े शैक्षणिक संस्थानों में दिखाई जा चुकी है। दूसरी फिल्म इमरजेंसी बनाने की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि महामना की तपोभूमि में आकर सुखद अनुभूति हुई। बनारस एक अलग मिजाज का शहर है। यहां की मस्ती, गलियां और गंगा घाट जीवन में अलग अहसास जगाते हैं।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है। शताब्दी वर्ष की शृंखला में कई कार्यक्रम भी हो रहे हैं लेकिन रविवार को बीएचयू में हुई फिल्म स्क्रीनिंग पर लोगाें ने सवाल खड़ा कर दिया। स्वतंत्रता भवन में फिल्म ‘बुद्धा इन अ ट्रैफिक जाम’ की स्क्रीनिंग हुई जिसमें कई बोल्ड सीन थे। इसे लेकर यही सवाल उठाया जा रहा था कि बीएचयू के शताब्दी वर्ष पर ये कैसा कार्यक्रम। कई छात्राएं तो बीच में ही फिल्म छोड़कर उठ गईं। वहीं प्रोफेसरों का कहना था कि अब तक बीएचयू में ऐसी तरह की फिल्म नहीं दिखाई गई। इस बाबत विवेक अग्निहोत्री ने भी माना था कि बैंडिट क्वीन के बाद इस फिल्म में सबसे ज्यादा बोल्ड सीन हैं। हालांकि सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म में कोई कैंची नहीं चलाई है।