बलिया: किसान आंदोलन का हल नहीं निकला तो बढ़ेगी सरकार की मुश्किलें, भारतीय किसान संघ के साधा निशाना
भारतीय किसान संघ ने कृषि कानून को लेकर चल रहे किसान आंदोलन के मुद्दे पर कहा कि केंद्र सरकार इसपर जल्द हल निकाले। कहा, गणतंत्र दिवस पर हिंसा के बाद केंद्र के साथ किसानों की बातचीत बंद हो गई है।
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भारतीय किसान संघ ने कृषि कानून को लेकर चल रहे किसान आंदोलन के मुद्दे पर कहा कि केंद्र सरकार इसपर जल्द हल निकाले। भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष युगल किशोर मिश्र ने मंगलवार को यूपी के बलिया में कहा कि केंद्र सरकार किसान आंदोलन का शीघ्र कोई हल नहीं निकालती तो आने वाले समय में मुश्किलें और ज्यादा बढ़ सकती है। संगठन किसानों को उनकी उत्पादन लागत दिलाने और उपज का लाभदायक मूल्य दिलाने के लिए आठ सितंबर को देशव्यापी आंदोलन करेगा। युगल किशोर नगरा क्षेत्र स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बात कर रहे थे।
युगल किशोर मिश्र ने कहा कि केंद्र के नए कृषि कानूनों में सुधार की जरूरत है। कृषि कानून का किसान विरोध कर रहे हैं। केंद्र सरकार को प्रमुख कृषि उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के भुगतान का प्राविधान जोड़ने के लिए एक नया कानून लाना चाहिए।
किसानों के उत्पादन लागत को कवर करने के लिए उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए, जो उन्हें मौजूदा प्रणाली में नहीं मिल रहा है। पारिश्रमिक मूल्य उत्पादन लागत और लाभ संगठन की मांग हैं। लाभकारी मूल्य किसानों का अधिकार है, जिसकी सरकार द्वारा सुविधा प्रदान की जानी चाहिए। सरकार द्वारा आज घोषित एमएसपी लाभकारी मूल्य नहीं है। सरकार को अनुबंध खेती के संबंध में दिशानिर्देश बनाना चाहिए। इसमें फसलों को एमएसपी से कम नहीं खरीदा जाए। कम से कम 23 फसलों के लिए लागू किया जाना चाहिए।
विवादों के निपटारा के लिए कृषि न्यायालय हो
कृषि क्षेत्र में आने वाले (निजी) व्यापारियों को पंजीकृत होना चाहिए और उन्हें बैंक सुरक्षा देनी चाहिए। विवादों के निपटारा के लिए कृषि न्यायालय होना चाहिए। व्यापार को बढ़ावा देने के लिए बड़ी कंपनियों को बड़ी छूट दी है, जिससे वे कुछ वस्तुओं को जितना चाहें स्टाक कर सकते हैं और इसे ठीक करने की जरूरत है। कहा कि गणतंत्र दिवस पर हिंसा के बाद केंद्र के साथ किसानों की बातचीत बंद हो गई है। सरकार और किसान संघों ने अब तक 11 दौर की बातचीत की है।