सबसे बड़े कालीन आयातक देश अमेरिका में भारत पहली बार लगाएगा कार्पेट एक्सपो
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विश्व में कुल निर्यात होने वाले कालीन का 35 प्रतिशत हिस्सा भारत से जाता है। निर्यात होने वाले भारतीय कॉलीन में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी उत्तर प्रदेश की है जिसमें भदोही व आस-पास का क्षेत्र प्रमुख स्थान रखता है।
सबसे बड़े कालीन आयातक देश अमेरिका के अटलांटा में पहली बार भारत कालीन प्रदर्शनी का आयोजन करने जा रहा है। 28 फरवरी से दो मार्च तक होने वाले इस आयोजन में भारत के सभी बड़े कालीन निर्यातक शामिल होंगे। इसका सीधा लाभ कालीन उद्योग के साथ बुनकरों, हस्त शिल्पियों को मिलेगा। यह बातें वस्त्र राज्यमंत्री अजय टमटा ने मंगलवार को बड़ालालपुर स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल में चल रहे इंडिया एक्सपो में पत्रकारों से कही।
बताया कि कालीन की पहचान मजबूत बनाने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। चीन के शंघाई और नार्वे में भी कालीन प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। कहा कि एक लाख 25 हजार करोड़ का कपड़ा निर्यात किया गया। इसी प्रकार 35 हजार करोड़ रुपये के हस्त निर्मित उत्पाद विदेशी खरीदार को भेजे गए। बताया कि भारत से निर्यात होने वाले संपूर्ण कालीन का 60 प्रतिशत हिस्सेदारी उत्तर प्रदेश की है।
तीन दिन में अब तक 348 विदेशी आयातक और 225 प्रतिनिधि एक्सपो में शामिल हो चुके हैं। कुल 270 स्टालों को मिलाकर अब 300 करोड़ के कारोबार की उम्मीद है। 2016 में विशेष शिल्पियों के लिए 32 करोड़ से मेगा क्लस्टर बनाने की वस्त्र मंत्रालय की घोषणा के बाद से अभी तक कुछ नहीं होने के सवाल पर चुप्पी साध गए।
इससे पूर्व उन्होंने कालीन प्रदर्शनी को देखा और निर्यातक व खरीदारों से बातचीत भी की। विदेशी आयातकों से बताया कि वाराणसी-भदोही-मिर्जापुर क्षेत्र के लगभग 20 लाख बुनकर इस विधा से जुड़े हैं। कहा कि देश के हिसाब से कालीन को लेकर लोगों की पसंद भी बदल जाती है। यही कारण है कि वस्त्र मंत्रालय डिजाइन व रंग आदि के चुनाव के लिए डिजाइनरों की मदद ले रहा है।
भिंडी के तने से भी तैयार कर रहे कालीन
एक्सपो में कालीन निर्माण के ढेरों विकल्प मौजूद हैं। यहां पापकार्न, जूट, केला, भिंडी का तना, बंबू सिल्क से तैयार छोटे कालीन का प्रदर्शन किया गया है। इसके अलावा इन कच्चे माल से डोर मैट, टेबल मैट, विंडो स्क्रीन मैट आदि भी बनाया जा सकता है। जॉली इंटरप्राइजेज के स्टॉल पर इनसे तैयार उत्पादों का प्रदर्शन किया गया है। कंपनी के प्रतिनिधि अमल कुमार ने बताया कि यह सेहत और वातावरण दोनों को नुकसान नहीं पहुंचाते।
वहीं इस बार माइक्रो धागा और एकरैलिक धागे की खूब मांग है। यह हल्के कालीन निर्माण के साथ ही शोवर भी होते हैं। पानीपत के स्टॉल पर निर्यातकों के लिए यह आकर्षण का केंद्र रहा। 21 अक्तूबर से चल रही चार दिवसीय कालीन प्रदर्शनी अंतिम दिन, बुधवार को आम लोगों के लिए खुली रहेगी। शाम को समापन समारोह होगा।
मोदी कालीन विदेशी ट्रेडर्स को काफी पसंद आ रहा है
प्रदर्शनी में वाराणसी हस्तशिल्प के स्टाल पर ऊन पर सिल्क की तीन लेयर से तैयार खास कालीन को मोदी कालीन नाम दिया गया है। यह कालीन विदेशी ट्रेडर्स को काफी पसंद आ रहा है। कंपनी निदेशक दिलीप टंडन ने बताया कि प्रधानमंत्री के ‘मेक इन इंडिया’ के नारे के बाद उन्होंने कई नए प्रयोग किए। एक कालीन में वह 12 से 15 कलर का प्रयोग करते हैं। इनके अंतर को पता करना बहुत ही मुश्किल होता है। साठ से ज्यादा देशों को कालीन का निर्यात कर रहे हैं। वर्जीनिया के जेरी कंबूरियन ने उनके कालीन की तारीफ की।