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भारत बन चुका है विश्व की महाशक्ति : कोविंद
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संशोधित-
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि भारत विश्व की महाशक्ति बन चुका है। अगले तीन वर्षों में दुनिया तीसरी आर्थिक शक्ति बन जाएगा। दुनिया में साख भी बढ़ी है। विश्व शक्ति व विश्व गुरु की कल्पना इस आधार पर करना कि कोई वर्ल्ड गवर्नमेंट बनेगी। इसकी राजधानी भारत में होगी। राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री दुनिया के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बन जाएंगे, यह बेमानी है। जो होने वाला है उसे ही वर्ल्ड पावर मानना पड़ेगा।
पूर्व राष्ट्रपति ने शुक्रवार को सुंदरबगिया स्थित अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र में दो दिवसीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया। उच्च शिक्षा में उभरती चुनौतियां विषयक संगोष्ठी में संगोष्ठी में पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि चाहे आप विश्व गुरु कहें या विश्व महाशक्ति। पूरा विश्व भारत की इस आभा को पहचान रहा है। विदेशों में हर किसी को इसका आभास भी है। पता है कि आने वाला समय भारत का है। अगर भारत विश्व महाशक्ति न बना होता तो रूस और यूक्रेन युद्ध में कोई एक दूसरे की बात सुनने के लिए तैयार नहीं है। दोनों देशों ने सिर्फ भारत की बात सुनी है, जो बड़ी बात है। मुझे नहीं लगता कि इतिहास में ऐसा कहीं हुआ होगा। दो देश युद्ध कर रहे हों और उनसे कहा जाए कि 24 घंटे के लिए सीजफायर कर दें। हमारे देश के 23 हजार बच्चे यूक्रेन में फंसे थे। सभी सकुशल 24 घंटे के अंदर वापस आ गए। भारत सरकार ने विशेष विमान भी भेजे। भारत ने अपने बच्चों से कहा कि वह अपने आसपास के देशों की सीमा के पास पहुंचें। वहां पर दूतावास के लोग मिलेंगे। तिरंगा हमारा चिह्न था। अमेरिका और चीन के साथ ऐसा नहीं हुआ, जिनको कि विश्व का महाशक्ति कहा जाता है। उन्होंने अपने छात्रों से कह दिया कि आप जैसे गए हो अध्ययन के लिए उसी तरह वापस आ सकते हैं। हम मदद नहीं कर सकते हैं।
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उच्च शिक्षण संस्थानों की विश्वसनीयता बढ़ाने की जरूरत
आईयूसीटीई गवर्निंग बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. जगमोहन सिंह राजपूत ने कहा कि शिक्षाविदों काे उच्च शिक्षण संस्थानों की विश्वसनीयता बढ़ाने का काम करना चाहिए। इस माैके पर केंद्र के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह, डॉ. रचना विश्वकर्मा, हरिश्चंद्र, डॉ. दीप्ति गुप्ता व डॉ. कुशाग्री सिंह मौजूद रहीं।
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अब राष्ट्रपति को रिसीव करते हैं यूरोपीय देश
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि जी-20 सम्मेलन की अध्यक्षता मिली है। यह विश्व महाशक्ति बनने के लक्षण हैं। इंग्लैंड, फ्रांस समेत कई देशों को पीछे छोड़ दिया है। राजनीति तो चलती रहेगी। हर कोई राजनीतिक शक्ति प्राप्त करना चाहता है। आज देश प्रगति पर है। अगर भारत के विकास को देखना है तो विदेश जाकर अनुभव किया जा सकता है। यूरोपियन देशों के लोग राष्ट्रपति को रिसीव करने नहीं आते थे। अब वह भी प्रोटोकॉल के साथ एयरपोर्ट पर रिसीव करते हैं। वह रामनाथ कोविंद के लिए आते थे, ऐसा नहीं है। वह हिंदुस्तान की आभा को पहचानने लगे हैं। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति में होड़ लगती थी कि मेरे साथ कौन बैठेगा। यह बहुत बड़ी बात थी। प्रोटोकॉल की तरफ से रिक्वेस्ट आती थी। भारतीय राष्ट्रपति के साथ यात्रा करने को वह आदर मानते थे।
युवाशक्ति के निर्माता हैं शिक्षक
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षक ही काबिल युवाओं को तैयार करते हैं। हर शिक्षक को शिक्षा व्यवस्था के मूलभूत सुधारों पर ध्यान देना चाहिए। सीखने-सिखाने के साथ ही वर्तमान में जीना होगा। चिंतन, मनन करना ही शिक्षक का काम है। सीखने के लिए हर इंसान को अहंकार से दूर होना होगा। काम करने के लिए तत्पर रहना चाहिए। उन्होंने मातृभाषा में शिक्षा और उसके प्रयोग को तेजी से आत्मसात करने की बात कही। यह भी कहा कि सभी स्तरों पर शिक्षकों को हमारे समाज के सबसे सम्मानित और जरूरी सदस्यों के रूप में फिर से स्थापित किया जाना चाहिए। वे लोग ही हमारी अगली पीढ़ी को आकार देते हैं।
स्थानीय भाषा में मिलने लगी फैसले की प्रति
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि ज्यादातर अधिवक्ता अंग्रेजी में बहस करते हैं। जो मुवक्किल स्थानीय भाषा जानता है, उसे पता ही नहीं चल पाता कि उसके अधिवक्ता उसके पक्ष में बात कर रहे हैं या विरोध में। फैसला अंग्रेजी में आता है तो उसे समझने के लिए अतिरिक्त फीस देनी पड़ती है। मैंने, मुख्य न्यायाधीश से बात की और कहा कि ऐसे मुकदमों में मुवक्किल की भाषा में ही फैसले की कॉपी जानी चाहिए उन्होंने कुछ तकनीकी समस्याएं बताईं, लेकिन कहा कि एक रास्ता निकल सकता है। उन्होंने एक सॉफ्टवेयर तैयार कराया और अब मुवक्किल को उसकी भाषा में ही फैसले की कॉपी मिलने लगी है।