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हकीकत में अधूरे, कागज पर पूरे
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 11 May 2017 02:02 AM IST
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अधूरा निर्माण
ओडीएफ के लिए चयनित गांव बाबतपुर में शौचालयों के निर्माण में जमकर धांधली की गई है। जिम्मेदार लोगों ने 206 टॉयलेट के निर्माण्ा का दावा पेश कर दिया। अधिकारियों की टीम ने भी अपनी जांच रिपोर्ट में सब कुछ ओके बता दिया। इसके बाद जिला प्रशासन ने गांव को खुले में शौचमुक्त घोषित कर दिया लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। गांव में अभी दो दर्जन से ज्यादा शौचालयों का निर्माण अधूरा है। ग्राम पंचायत की ओर से लाभार्थियों को इतनी कम सामग्री दी गई कि निर्माण पूरा होने के पहले ही खत्म हो गई। पिछले हफ्ते बीडीओ चिरईगांव के निरीक्षण में यह हकीकत सामने आई थी।
गोमती तट पर स्थित चोलापुर के बाबतपुर गांव को ओडीएफ के रूप में चयनित किया गया था। इसके बाद गांव में कुल 206 शौचालयों का निर्माण कराने के लिए धनराशि जारी की गई। ग्राम पंचायत ने कुछ शौचालयों का निर्माण स्वयं कराया तो कुछ के निर्माण के लिए लाभार्थियों को सामग्री दे दी। लाभार्थी इनरा देवी और सरस्वती देवी ने बताया कि उन्हें 850 ईंटें, 10 बोरी बालू, पांच बोरी सीमेंट और चार अदद छड़ दी गई थीं। बताया कि इतनी कम सामग्री में निर्माण पूरा नहीं हो पाया। अब हमारे पास पैसे नहीं हैं कि शौचालय का निर्माण करा करा सकें। इस गांव में दो महीने पहले जिला प्रशासन खुले में शौचमुक्त गांव घोषित कर चुका है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य और गांव के पूर्व प्रधान दिलीप चौबे ने जिलाधिकारी और सीडीओ से शिकायत कर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। वहीं, ग्राम प्रधान तीर्थराज चौबे का कहना है कि 206 शौचालयों के निर्माण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत को मिली थी। कुछ निर्माण अधूरे रह गए थे, जिन्हें पूरा कराने का काम चल रहा है।
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गोमती तट पर स्थित चोलापुर के बाबतपुर गांव को ओडीएफ के रूप में चयनित किया गया था। इसके बाद गांव में कुल 206 शौचालयों का निर्माण कराने के लिए धनराशि जारी की गई। ग्राम पंचायत ने कुछ शौचालयों का निर्माण स्वयं कराया तो कुछ के निर्माण के लिए लाभार्थियों को सामग्री दे दी। लाभार्थी इनरा देवी और सरस्वती देवी ने बताया कि उन्हें 850 ईंटें, 10 बोरी बालू, पांच बोरी सीमेंट और चार अदद छड़ दी गई थीं। बताया कि इतनी कम सामग्री में निर्माण पूरा नहीं हो पाया। अब हमारे पास पैसे नहीं हैं कि शौचालय का निर्माण करा करा सकें। इस गांव में दो महीने पहले जिला प्रशासन खुले में शौचमुक्त गांव घोषित कर चुका है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य और गांव के पूर्व प्रधान दिलीप चौबे ने जिलाधिकारी और सीडीओ से शिकायत कर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। वहीं, ग्राम प्रधान तीर्थराज चौबे का कहना है कि 206 शौचालयों के निर्माण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत को मिली थी। कुछ निर्माण अधूरे रह गए थे, जिन्हें पूरा कराने का काम चल रहा है।
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