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Varanasi News: बीएचयू में नई प्रागैतिहासिक वीथिका और भारत कला भवन-2 का लोकार्पण
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बीएचयू के भारत कला भवन में शुक्रवार को प्रागैतिहासिक वीथिका का उद्घाटन हुआ। साथ ही 21वें राय कृष्णदास स्मृति व्याख्यान की भी शुरुआत हुई। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि भवन में संरक्षित विरासत को समझना, उसका संरक्षण करना और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना बड़ा दायित्व है। भवन से संबंधित कार्यों में जरूरी सुधार और विकास के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि आगामी प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजन में भारत कला भवन की बड़ी भूमिका होगी। इससे काशी की सांस्कृतिक विरासत को बड़े स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा। इस बीच समाजसेवी डॉ. लेनिन रघुवंशी ने उन्हें मानवाधिकार के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए मिले तीन अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार को कुलपति को सौंपा। इन्हें भारत कला भवन में रखा जाएगा। निदेशक प्रो. श्रीरूप रायचौधरी ने कुलपति को प्रदर्शित कलाकृतियों के बारे में जानकारियां दी। कुलपति ने डॉ. रेशमा खातून ने लिखित पुस्तक भारत कला भवन, वॉल्यूम-2 और कला भवन की ब्रॉशर का लोकार्पण किया।
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शिव परिवार और असुरों पर दीं जानकारियां
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्राचीन इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व के विभागाध्यक्ष प्रो. महेश प्रसाद अहिरवार ने कलचुरी कालीन शैव मूर्ति शिल्प: रूप, शिल्प एवं कलात्मक उत्कर्ष विषय पर बात की। शैव मूर्तिकला में शिव के कई रूपों, संहार मूर्तियों, कंडकासुर, गंडासुर और बाकी असुरों से संबंधित शिल्पांकनों की जानकारी दी। गंडासुर की मूर्ति के माध्यम से उन्होंने एक ही आख्यान को कई शिल्प रूपों में प्रस्तुत किया। उन्होंने भैरव, नटराज, उमामहेश्वर और शिव-पार्वती से संबंधित प्रतिमाओं के उदाहरण भी प्रस्तुत किए। प्रो. अहिरवार ने कहा कि सतना, दमोह, तेवर सहित कई क्षेत्रों से प्राप्त प्रतिमाओं से कई रहस्य सामने आए। भारत कला भवन की सहायक क्यूरेटर डॉ. प्रियंका चंद्रा ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस मौके पर प्रो. बिंदा दत्तात्रेय परांजपे ने कहा कि कोर्स को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखते हुए छात्रों की व्यावहारिक समझ और कौशल विकास से जोड़ा जाए।
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उन्होंने कहा कि आगामी प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजन में भारत कला भवन की बड़ी भूमिका होगी। इससे काशी की सांस्कृतिक विरासत को बड़े स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा। इस बीच समाजसेवी डॉ. लेनिन रघुवंशी ने उन्हें मानवाधिकार के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए मिले तीन अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार को कुलपति को सौंपा। इन्हें भारत कला भवन में रखा जाएगा। निदेशक प्रो. श्रीरूप रायचौधरी ने कुलपति को प्रदर्शित कलाकृतियों के बारे में जानकारियां दी। कुलपति ने डॉ. रेशमा खातून ने लिखित पुस्तक भारत कला भवन, वॉल्यूम-2 और कला भवन की ब्रॉशर का लोकार्पण किया।
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शिव परिवार और असुरों पर दीं जानकारियां
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्राचीन इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व के विभागाध्यक्ष प्रो. महेश प्रसाद अहिरवार ने कलचुरी कालीन शैव मूर्ति शिल्प: रूप, शिल्प एवं कलात्मक उत्कर्ष विषय पर बात की। शैव मूर्तिकला में शिव के कई रूपों, संहार मूर्तियों, कंडकासुर, गंडासुर और बाकी असुरों से संबंधित शिल्पांकनों की जानकारी दी। गंडासुर की मूर्ति के माध्यम से उन्होंने एक ही आख्यान को कई शिल्प रूपों में प्रस्तुत किया। उन्होंने भैरव, नटराज, उमामहेश्वर और शिव-पार्वती से संबंधित प्रतिमाओं के उदाहरण भी प्रस्तुत किए। प्रो. अहिरवार ने कहा कि सतना, दमोह, तेवर सहित कई क्षेत्रों से प्राप्त प्रतिमाओं से कई रहस्य सामने आए। भारत कला भवन की सहायक क्यूरेटर डॉ. प्रियंका चंद्रा ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस मौके पर प्रो. बिंदा दत्तात्रेय परांजपे ने कहा कि कोर्स को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखते हुए छात्रों की व्यावहारिक समझ और कौशल विकास से जोड़ा जाए।
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