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दस साल में 50 लाख का लगाया चूना
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 12 May 2016 02:02 AM IST
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नगर निगम के अधिकारियों और ठेकेदारों के सिंडीकेट ने टाउनहाल आवंटन में लाखों के राजस्व का नुकसान पहुंचाया है। पिछले दस सालों में तकरीबन 50 लाख रुपये से अधिक का घोटाला हुआ लेकिन दो साल पहले जांच में इसका खुलासा होने के बाद भी अब तक न रिकवरी हुई न कोई कार्रवाई। अलबत्ता, टाउनहाल आवंटन में नगर निगम के अफसरों, बाबुओं और ठेकेदारों का खेल बेखौफ चलता रहा और मिनी सदन के जनप्रतिनिधियों ने भी इस ओर गौर फरमाने की जरूरत नहीं समझी।
अब घोटाले की परत दर परत सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन कार्रवाई तो दूर मामले की जांच से भी बचने की कोशिश में है। नगर निगम के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि सिंडिकेट ने टाउन हाल आवंटन के लिए शासन स्तर से पैरवी कराई थी। नगर निगम सदन में जब भी मामले को उठाने का प्रयास हुआ तब शासन-सत्ता के दबाव से मामले को दबा दिया गया। इस खेल का खुलासा 2014 में तब हुआ जब आवेदकों ने सामान्य प्रक्रिया के तहत टाउनहाल का आवंटन कराकर उसका व्यावसायिक इस्तेमाल शुरू कर दिया।
प्रदर्शनी लगाकर व्यावसायिक वसूली शुरू कर दी गई। मामला उजागर होने के बाद तत्कालीन नगर आयुक्त और अपर नगर आयुक्त ने तब दस हजार रुपये प्रति दिन के हिसाब से व्यावसायिक आवंटन का शुल्क निर्धारित करने के बाद करीब चार लाख रुपये जमा कराकर सारा मामला एक तरह से रफादफा कर दिया और सिंडिकेट का खेल उसके बाद भी जारी रहा।
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जर्जर हो चुका भवन, टूट गई है बाउंड्री
वाराणसी। करीब डेढ़ सौ साल पुराने टाउनहाल और मैदान की बाउंड्री जर्जर हो चुकी है। रख-रखाव और मरम्मत के अभाव में टाउनहाल का गुंबद टूटकर गिर चुका है। दरवाजे जर्जर हो चुके हैं। बाउंड्री जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। नगर निगम की उदासीनता के चलते ठेकेदारों ने टाउनहाल का भरपूर उपयोग किया और मोटी कमाई की। व्यावसायिक इस्तेमाल से होने वाली आय से मरम्मत कराई गई होती तो टाउनहाल की आज यह हालत नहीं होती।
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अब घोटाले की परत दर परत सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन कार्रवाई तो दूर मामले की जांच से भी बचने की कोशिश में है। नगर निगम के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि सिंडिकेट ने टाउन हाल आवंटन के लिए शासन स्तर से पैरवी कराई थी। नगर निगम सदन में जब भी मामले को उठाने का प्रयास हुआ तब शासन-सत्ता के दबाव से मामले को दबा दिया गया। इस खेल का खुलासा 2014 में तब हुआ जब आवेदकों ने सामान्य प्रक्रिया के तहत टाउनहाल का आवंटन कराकर उसका व्यावसायिक इस्तेमाल शुरू कर दिया।
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प्रदर्शनी लगाकर व्यावसायिक वसूली शुरू कर दी गई। मामला उजागर होने के बाद तत्कालीन नगर आयुक्त और अपर नगर आयुक्त ने तब दस हजार रुपये प्रति दिन के हिसाब से व्यावसायिक आवंटन का शुल्क निर्धारित करने के बाद करीब चार लाख रुपये जमा कराकर सारा मामला एक तरह से रफादफा कर दिया और सिंडिकेट का खेल उसके बाद भी जारी रहा।
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जर्जर हो चुका भवन, टूट गई है बाउंड्री
वाराणसी। करीब डेढ़ सौ साल पुराने टाउनहाल और मैदान की बाउंड्री जर्जर हो चुकी है। रख-रखाव और मरम्मत के अभाव में टाउनहाल का गुंबद टूटकर गिर चुका है। दरवाजे जर्जर हो चुके हैं। बाउंड्री जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। नगर निगम की उदासीनता के चलते ठेकेदारों ने टाउनहाल का भरपूर उपयोग किया और मोटी कमाई की। व्यावसायिक इस्तेमाल से होने वाली आय से मरम्मत कराई गई होती तो टाउनहाल की आज यह हालत नहीं होती।