Varanasi: रणदीप सिंह सुरजेवाला मामले में कोर्ट ने 20 जुलाई की तारीख दी, क्या है 23 साल पुराना संवासिनी कांड?
कोर्ट में दिए गए आवेदन में कहा गया कि इस आदेश का आशय पूर्व में जारी गिरफ्तारी वारंट से है, जिसे स्थगित रखा जाए। ऐसे में पूर्व में जारी ऐसे किसी भी आदेश को स्थगित रखने के अनुरोध के साथ हाईकोर्ट के आदेश की फोटोकॉपी भी दाखिल की गई।
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विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए कोर्ट) की अदालत ने कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य रणदीप सिंह सुरजेवाला के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट सोमवार को स्थगित कर दी। साथ ही मामले की सुनवाई की अगली तिथि 20 जुलाई तय की है। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में सुरजेवाला को जिन-जिन दस्तावेजों की जरूरत है, उसकी सूची दी जाए। इससे दस्तावेज उपलब्ध कराए जा सकेंगे।
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रणदीप सुरजेवाला के अधिवक्ता संजीव वर्मा ने कहा था कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि पहले पारित आदेश का जब तक अनुपालन सुनिश्चित नहीं हो जाता, तब तक सुरजेवाला के खिलाफ कोई भी उत्पीड़नात्मक न की जाए। इस मामले में सुरजेवाला के आवेदन पर सुप्रीमकोर्ट और हाईकोर्ट ने आरोप पत्र केस डायरी और अन्य अभियोजन प्रपत्रों की पठनीय प्रति उपलब्ध कराने का आदेश लोवर कोर्ट को दिया था। सुरजेवाला के अधिवक्ता के अनुसार आदेश के बाद जो प्रति उपलब्ध कराई गई, वह भी पठनीय नहीं है। इस पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।
23 वर्ष पुराना है मामला
23 वर्ष पुराने संवासिनी प्रकरण में कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में तत्कालीन युवा कांग्रेस अध्यक्ष रणदीप सुरजेवाला के नेतृत्व में आयोजित धरना प्रदर्शन के दौरान मंडलायुक्त कार्यालय में तोड़फोड़ हुई थी। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला दर्ज हुआ था। इसी मामले में सुरजेवाला के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था।