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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   In auspicious coincidence, on the occasion of Mauni Amavasya, the flood of the Ganges ghats.

कष्टों के निवारण को मौनी अमावस्या पर गंगा तीरे पहुंचे आस्थावान, भोर से ही पूजा-पाठ शुरू

Fri, 24 Jan 2020 02:02 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Fri, 24 Jan 2020 02:02 PM IST
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In auspicious coincidence, on the occasion of Mauni Amavasya, the flood of the Ganges ghats.
डॉ राजेंद्र प्रसाद घाट पर गंगा स्नान करते लोग - फोटो : amar ujala

मौनी अमावस्या पर शुक्रवार की भोर से ही गंगा में स्नान के लिए श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। तिलदान से कष्टों का निवारण व पितृदोष से भी मुक्ति की लोगों ने कामना की। बसों और ट्रेनों से आए श्रद्धालुओं ने ठंड के कारण स्टेशनों पर ही विश्राम किया तो आधी रात के बाद गंगा के घाटों की ओर बढ़ चले। अमावस्या पर मौन रख कर स्नान के साथ ही दान के विधान पूरे करेंगे और देवालयों में भी शीश झुकाकर देवों का वंदन किया। काशी में प्रमुख स्नान गंगा घाटों पर हुआ तो दशाश्वमेध सहित प्रमुख घाटों पर आस्था का रेला तड़के से ही नजर आया।

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मौन के महत्व काे मानते हुए लाेगों ने मौन व्रत कर ईष्ट की आराधना की। स्नान दान के साथ गोदान कर सूर्य को अर्घ्य देकर वर्ष भर सुख और समृद्धि की कामना की। आस्थावानों का हुजूम गंगा नदी से जब मंदिरों की ओर बढ़ चला तो घंटा और घड़ियालों से काशी का गंगा तट गमक उठा। शिवालयों में लोगों ने गंगा जल चढ़ाकर शिवोपासना की तो अन्य प्रमुख मंदिरों में भी लोगों ने दर्शन-पूजन किया। बाबा दरबार में सुबह से ही आस्था का रेला उमड़ता रहा और हर-हर महादेव से काशी की गलियां गूंज उठीं।   
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ज्योतिषाचार्य विमल जैन के अनुसार शुक्रवार को पूरे दिन अमावस्या तिथि का मान रहेगा।  पितरों की शांति के लिए दिन भर श्राद्धकर्म किए जाएंगे। शुभ संयोग में गंगा स्नान का विशेष फल मिलता है। इस पर्व पर मौन रहकर स्नान करने की धार्मिक मान्यता है। मौन रहते हुए ही देव दर्शन, दानपुण्य करना कल्याणकारी माना गया है। अमावस्या पर पीपल के वृक्ष व भगवान श्री विष्णु की पूजा अर्चना के साथ परिक्रमा करने पर आरोग्य व सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

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In auspicious coincidence, on the occasion of Mauni Amavasya, the flood of the Ganges ghats.
डॉ राजेंद्र प्रसाद घाट पर गंगा स्नान करते लोग - फोटो : amar ujala

मौनी अमावस्या को लेकर यातायात पुलिस का डायवर्जन

मौनी अमावस्या पर उमड़ने वाली श्रद्धालुओंं की भीड़ को देखते हुए यातायात पुलिस ने डायवर्जन लागू कर दिया, जो गुरुवार रात 9 बजे से शुक्रवार रात 12 बजे तक जारी रहेगा। बाहरी वाहनों के लिए शहर भर में 15 जगहों पर पार्किंग बनाई गई है। यातायात पुलिस ने अपील है कि घर से डायवर्जन देखकर ही निकलें।


मैदागिन से चौक होते हुए गोदौलिया की ओर जाने वाले सभी वाहन हरिश्चंद्र डिग्री कॉलेज व कबीरचौरा और लहुराबीर मार्ग से निकाले जा रहे हैं। लक्सा की तरफ से रामापुरा, गोदौलिया जाने वाले वाहनों को लक्सा थाने से आगे नहीं जाने दिया जा रहा है। इन वाहनों को बेनियाबाग, गुरुबाग और कमच्छा मार्ग पर मोड़ दिया जा रहा है। लहुराबीर से गोदौलिया की तरफ जाने वाले सभी वाहनों को बेनिया तिराहे से आगे नहीं जाने दिया जा रहा। इन वाहनों को पियरी मार्ग कबीर चौरा अथवा लहुराबीर वापस मोड़ दिया गया।
 

अस्सी, सोनारपुरा से होकर गोदौलिया जाने वाले वाहनों को सोनारपुरा से आगे नहीं जाने दिया जा रहा था। इन्हें भेलूपुर थाना मार्ग पर मोड़ दिया गया। भेलूपुर थाना से रेवड़ी तालाब होकर रामापुरा जाने वाली सभी वाहन तिलभांडेश्वर से आगे नहीं जाने दिए गए। बेनियाबाग से आगे भीड़ होने पर वाहनों को लहुराबीर चौराहे पर रोक दिया जा रहा था और इन वाहनों को क्वींस इंटर कॉलेज व संपूर्णानंद विश्वविद्यालय में खड़ा कराया जा रहा था। लहुरावीर से मैदागिन के तरफ जाने वाले अधिकारियों के वाहन मैदागिन स्थित कंपनी बाग/टाउन हाल में खड़े कराए जा रहे थे।

In auspicious coincidence, on the occasion of Mauni Amavasya, the flood of the Ganges ghats.
डॉ राजेंद्र प्रसाद घाट पर गंगा स्नान करते लोग - फोटो : amar ujala

भदऊचुंगी से भैंसासुर घाट व राजघाट की तरफ वाहनों को नहीं जाने दिया गया। गोलगड्डा तिराहे से कोई भी वाहन विशेश्वरगंज तिराहा होते हुए भैंसासुर घाट की तरफ नहीं गया। सिगरा चैराहा से रथयात्रा होकर गुरुबाग की तरफ जाने वाले वाहनों को सिगरा चौराहा से दाहिने मोड़कर आकाशवाणी, महमूरगंज, ककरमत्ता होते हुए बीएचयू की तरफ भेजा जा रहा था। बीएचयू से शहर की तरफ आने वाले वाहन इसी मार्ग से वापस जा रहे थे। शव वाहन, बीमार एवं दिव्यांग प्रतिबंध से मुक्त रखे गए।

In auspicious coincidence, on the occasion of Mauni Amavasya, the flood of the Ganges ghats.
Mouni Amavasya in varanasi - फोटो : अमर उजाला

इन कार्यों को भूल कर भी न करें

पंडित लक्ष्मी शंकर दूबे के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन मांस-मछली या मदिरा पान का बिल्कुल सेवन नहीं करना चाहिए। इन चीजों के सेवन से बचें।  इस दिन पलंग आदि पर सोने से भी बचना चाहिए।  कोशिश करें कि जमीन पर चटाई बिछाकर सोया जाए और शरीर पर तेल लगाने से भी बचना चाहिए।  

मौनी अमावस्या के व्रत में किसी भी तरह का श्रृंगार करना वर्जित माना जाता है। स्नान करने के बाद सादे वस्त्र पहनें और यदि आप मौनी अमावस्या पर कुछ दान करना चाहते हैं तो इस दान के बारे में किसी को कुछ न बताएं। साथ ही यह दान बिना बोले दें। मौनी अमावस्या पर पीपल के पेड़ की पूजा करना शुभ माना जाता है। इस दिन पीपल की पूजा करते वक्त उसे स्पर्श नहीं करना चाहिए। यदि मौनी अमावस्या शनिवार के दिन पड़ रही है तब आप पीपल का स्पर्श कर सकते हैं। इस दिन पीपल की 108 बार परिक्रमा करने से शुभ फल प्राप्त होता है।

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