बीएचयू अस्पताल का हाल: जब तक आरसीटी का नंबर आएगा तब तक कीड़े खा जाएंगे दांत, पांच महीने आगे का मिल रहा समय
Varanasi News: बीएचयू अस्पताल के डेंटल फैकल्टी में मरीजों को आरसीटी के लिए जनवरी तक का नंबर मिल रहा है। ऐसे में बीमारी और बढ़ने का खतरा है। जब तक नंबर आएगा, तब तक दांतों को कीड़े खा जाएंगे।
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अगर आपके दांतों में सड़न, मसूड़ों में सूजन है और बीएचयू में डॉक्टर ने रूट कैनाल ट्रीटमेंट (आरसीटी ) का सुझाव दिया है तो लंबा इंतजार करना पड़ेगा। इससे आपकी बीमारी कम होने की जगह बढ़ जाएगी। आईएमएस बीएचयू के डेंटल फैकल्टी में आरसीटी के लिए पांच महीने आगे का समय मिल रहा है। जब तक नंबर आएगा, तब तक कीड़े दांतों को खा जाएंगे और वह आरसीटी लायक भी नहीं रह जाएंगे।
बीएचयू की डेंटल फैकल्टी ट्रॉमा सेंटर में है। दांतों से जुड़ी समस्या वाले 400 मरीज रोज वाराणसी, आसपास के जिलों के साथ बिहार से आते हैं। चार मंजिला भवन के भूतल पर पर्चा काउंटर, दवा काउंटर है जबकि ऊपर बने कमरों में ओपीडी, एक्सरे, ओटी सहित अन्य सेवाएं हैं।
इन दिनों जो मरीज आ रहे हैं, उन्हें सेवा का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। सबसे अधिक समस्या आरसीटी वालों को हो रही है। तीसरे तल पर आरसीटी होती है। डॉक्टर शुरू में तो किसी तरह जांच करवाने के साथ दवा तो लिख रहे हैं, लेकिन आरसीटी करवाना हो रहा है तो पांच महीने का समय दे रहे है। इससे लोग निराश होकर लौट जा रहे हैं।
प्रोफेसर 19, एसोसिएट प्रोफेसर-6, असिस्टेंट प्रोफेसर-2, (इसके अलावा 20 से ज्यादा रेजिडेंट भी हैं) बीडीएस में सीट -63, एमडीएस में सीट-24, डिप्लामा इन डेंटल मैकेनिकल, डिप्लोमा इन डेंटल हाइजिनिष्ट
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क्या बोले चिकित्सक
वाराणसी सहित आसपास के जिलों में किसी भी अस्पताल में आरसीटी नहीं होती है। इस वजह से मरीजों की भीड़ रहती है। संकाय में पीजी के छात्रों को आरसीटी की जिम्मेदारी दी गई है। पीजी में सीट की संख्या कम होने से छह महीने की बेटिंग है। सीट बढ़ाने की दिशा में प्रयास चल रहा है। -प्रो. एचसी बरनवाल, संकाय प्रमुख, दंत चिकित्सा संकाय
देश के सर्वश्रेष्ठ 15 संस्थानों में
आईएमएस बीएचयू के दंत चिकित्सा विज्ञान संकाय का नाम देश के सर्वश्रेष्ठ 15 संस्थानों में है। हाल ही में शिक्षा मंत्रालय ने जी एनआईआरएफ रैंकिंग जारी की थी, उसमें इस फैकल्टी को चिकित्सा शिक्षा, मरीजों की सेवा के मामले में टॉप 20 संस्थानों में 15 नंबर पर जगह मिली थी।
आरसीटी में देरी से ये परेशानी
- दांत के अंदर संक्रमण के साथ ही पस भर जाएगा। जबड़े की हड्डी और गाल तक फैल सकता है।
- दांत में इंफेक्शन के कारण गाल, जबड़ा और गर्दन तक सूजन आ सकती है।
- दांत कमजोर होकर होकर गिर जाएंगे।
- दांतों में सड़न से बैक्टीरिया खून में मिलकर शरीर के दूसरे अंगों दिल, फेफड़े, मस्तिष्क तक पहुंच सकते हैं।
चांदपुर निवासी एमके सिंह के दांतों में तेज दर्द था। 18 जून को पहली बार डेंटल फैकल्टी गए। डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने कई जांच लिखी। इसके बाद 14 अगस्त को बुलाया। डॉक्टर ने आरसीटी करवाने को कहा। जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में बुलाया गया है। बीमारी बढ़ने को लेकर परेशान हैं।
केस दो
चंदौली के ताराजीवनपुर निवासी अजीत यादव को दांतों में सड़न हो गई थी। पहले तो उन्होंने चंदौली में डॉक्टर को दिखाया। इसके बाद डॉक्टर ने आरसीटी करवाने को कहा। डॉक्टर ने बीएचयू जाने की सलाह दी। वहां फरवरी की डेट मिली है। दूसरे जगह इलाज करवाने का फैसला लिया।