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IMS BHU: पित्ताशय कैंसर के मरीजों को सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट से सर्जरी कराना बेहतर, विशेषज्ञों ने दिया सुझाव
Tue, 19 May 2026 03:00 PM IST
Pragati Chand
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Tue, 19 May 2026 03:00 PM IST
सार
Varanasi News: आईएमएस बीएचयू में सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग में विशेषज्ञों ने पित्ताशय कैंसर पर अध्ययन किया। उन्होंने सुझाव दिया कि पित्ताशय कैंसर के मरीजों को सामान्य सर्जन से इलाज कराने की जगह सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट से सर्जरी करानी चाहिए।
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IMS BHU
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आईएमएस बीएचयू के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने विभिन्न जगहों पर हुए शोध कार्यों का अध्ययन (हेल्थ टेक्नोलॉजी असेसमेंट इन इंडिया) किया है। अध्ययन के बाद विशेषज्ञों ने यह सुझाव दिया है कि पित्ताशय कैंसर के मरीजों को सामान्य सर्जन से इलाज कराने की जगह सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट से सर्जरी करानी चाहिए। इससे बीमारी के आगे बढ़ने की संभावना खत्म हो जाती है।
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सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रो. मनोज पांडेय के निर्देशन में हुए अध्ययन के बाद इसका प्रकाशन यूरोपियन जर्नल में हुआ है। प्रो. मनोज पांडेय का कहना है कि इस विश्लेषण में 1999 और 2025 के बीच प्रकाशित वैश्विक स्तर पर शोध के डेटा को शामिल करते हुए चरणबद्ध तरीके से रिव्यू किया गया और मेटा-विश्लेषण विधियों का पालन किया गया।
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56000 से ज्यादा रोगियों से जुड़े 27 अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के व्यापक विश्लेषण पर आधारित यह अध्ययन बताता है कि पित्ताशय कैंसर को बढ़ावा देने वाले कम से कम छह लिम्फ नोड्स (लसीका ग्रंथियों) को निकालना महत्वपूर्ण सर्जिकल गुणवत्ता मानक (बेंचमार्क) है, जो पित्ताशय के कैंसर में जीवनरक्षा (सर्वाइवल) दर में सुधार से गहराई से जुड़ा है।
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कहा कि लिम्फ नोड निकालना न केवल कैंसर के चरण (स्टेजिंग) की सटीकता में सुधार करता है बल्कि कैंसर के दोबारा होने (रिकरेंस) की संभावना को भी कम करता है और बीमारी-मुक्त जीवन (डिजीज-फ्री सर्वाइवल) को बढ़ाता है।