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अवैध कॉलोनियों के मकड़जाल में बनारस, नहीं चेत रहा जिम्मेदार विभाग, बस काट रहे मलाई

Fri, 08 Dec 2017 10:51 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Fri, 08 Dec 2017 10:51 AM IST
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illegal colonies create problem in varanasi
अवैध कॉलोनियों में समुचित संसाधन उपलब्ध नहीं - फोटो : अमर उजाला
बनारस में अवैध कॉलोनियां यू ही नहीं आबाद हुईं। वीडीए ने मनमानी रोकने से आंखे फेरकर तो बेड़ा गर्क किया ही, बिजली, नगर निगम, जलकल, पीडब्ल्यूडी जैसे विभागों ने भी नियम-कानूनों को दरकिनार कर खूब मलाई काटी।
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कॉलोनियों के अवैध होने के बावजूद बिजली, पानी और सीवेज के वैध कनेक्शन जारी कर दिए गए। सरकारी रकम से सड़कें बनवा दी गईं। अब बड़ा सवाल यह है कि जब वीडीए का दावा है कि ये कॉलोनियां अवैध हैं तो वहां बिजली-पानी के वैध कनेक्शन और नगर निगम की ओर से मकान नंबर जारी कैसे कर दिए गए। 
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तकरीबन पांच सौ से अधिक अवैध कॉलोनियों से शहर जकड़ चुका है। वहां बुनियादी सुविधाओं के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। शहर के बुनियादी संसाधनों का ढांचा चरमराने की बड़ी वजह ये अवैध कॉलोनियां हैं। वीडीए से बिना ले आउट और नक्शा पास कराए ही कॉलोनियां बनती चली गईं।
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जिला प्रशासन से शासन तक के आलाधिकारी हों या मुलाजिम किसी ने कोई रोकटोक की जरूरत नहीं समझी। 1990 के बाद से अब तक किसी भी कॉलोनी का भी लेआउट और नक्शा वीडीए से पास नहीं कराया गया।

इसका खुलासा खुद वीडीए उपाध्यक्ष पुलकित खरे कर चुके हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि अवैध कॉलोनियों में बिजली और जलकल विभाग ने बिजली, पानी और सीवेज के कनेक्शन किस आधार पर दिए। 

इन इलाकों में हालत बेहद बदतर

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चेतने के बजाए जिम्मेदार विभाग काट रहे मलाई - फोटो : अमर उजाला
सरकारी धन से सड़कें कैसे बनती चली गईं। कई जगह तो वैध कालोनियों की तुलना में बिना ले आउट वाली कॉलोनियों में बेहतर सुविधाएं हो गई। डेवलपर्स और अधिकारियों की मिलीभगत ने अनियंत्रित विकास को बढ़ावा देकर शहर के लिए चुनौतियों की बाढ़ ला दी।

शहरी सीमा से सटे बाहरी इलाकों लंका, सामनेघाट, पांडेयपुर-आजमगढ़ रोड, आशापुर, शिवपुर में तो हालात सबसे अधिक अनियंत्रित हैं। बढ़ती आबादी के दबाव के चलते सीवेज, पेयजल की समस्या बढ़ती जा रही है।

अब अवैध कॉलोनियों को नियमित करने का मामला शासन में विचाराधीन हैं और जानकार भी मानते हैं कि इसके सिवा कोई और विकल्प नहीं है। लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि नियमों को दरकिनार करने वाले संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

मामले में  वीडीए उपाध्यक्ष पुलकित खरे का कहना है कि नियमित निगरानी न होने और अफसरों की उदासीनता के चलते शहर में अवैध कालोनियां विकसित हो गई। पहले से बन चुकी कालोनियों को वैध घोषित करने का मामला शासन स्तर पर लंबित है। आगे अवैध ढंग से अनियोजित विकास न हो इस पर नजर रखने के साथ ही शिकायत मिलने पर कार्रवाई भी की जा रही है। 

अवैध कालोनियां
गायत्री नगर, काशीपुरम, हनुमाननगर, तारानगर, रुद्र नगर, परमहंस नगर, मणिनगर, मीरानगर, अरविंद नगर, हेडगेनगर, आनंद नगर, गौतम नगर, साईनगर, मित्रधाम नगर, सारनाथ इंक्लेव, बुद्धा कालोनी सहित सैकड़ों कालोनिया बिन लेआउट और नक्शे के खड़ी हो गई है। 
 

अवैध प्लाटिंग में नौ अफसरों पर लटकी तलवार

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बनारस-जौनपुर, गोरखपुर-आजमगढ़ हाईवे पर दर्जनों कॉलोनियां आबाद - फोटो : अमर उजाला
एनएच-56 पर (जौनपुर-वाराणसी हाईवे) पर बाबतपुर-हरहुआ के समीप वीडीए के अप्रूवल के बिना मनमाने तरीके से की गई अवैध प्लाटिंग में विभाग के नौ अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। इन्हें चिह्नित कर लिया गया है। वीडीए उपाध्यक्ष पुलकित खरे ने सभी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेज दी है। इनमें तीन-तीन अवर अभियंता, जोनल अधिकारी और इतने ही सहायक अभियंता शामिल हैं। 

डेवलपर्स वीडीए से बिना नक्शा और लेआउट पास कराए कॉलोनियां बसाने के लिए प्लाटिंग करते रहे और निगरानी की जिम्मेदारी जिन पर थी, वे आंखें मूंदे बैठे रहे। नतीजा यह हुआ कि पांच डेवलपर्स ने करीब 108 एकड़ जमीन की प्लाटिंग कर ली। इनमें आधे से अधिक प्लाट बिक भी गए।

वीडीए उपाध्यक्ष पुलकित खरे तक इसकी शिकायत पहुंची तो पिछले शनिवार को वह टीम के साथ मौके पर पहुंचे। जेसीबी से डेवलपर्स के कार्यालय और प्लाटिंग के लिए खड़ी की गईं दीवारें ढहवाईं।

साथ ही, प्लाटिंग करने वाले पांचों डेवलपर्स के खिलाफ बड़ागांव थाने में मुकदमा दर्ज कराया। उसके बाद से मामले में विभागीय अधिकारियों और अभियंताओं की भूमिका की भी जांच की जा रही थी।

वीडीए उपाध्यक्ष ने बताया कि अवैध कॉलोनियां बसाने और मनमानी प्लाटिंग कराए जाने के मामले में संबंधित अधिकारियों और अभियंताओं को चिह्नित कर लिया गया है। इनके विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति करते हुए जल्द ही सूची शासन को भेजी जाएगी। 
 

ऑनलाइन नक्शा पास करने की प्रक्रिया

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वीडीए में अब ऑनलाइन नक्शा पास होगा। महकमे ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। भवन निर्माण कराने वाले घर बैठे ही शुल्क जमा कर अपना नक्शा ऑनलाइन पास करा सकेंगे। www.upobps.in इस वेबसाइट पर अब नक्शा के लिए आवेदन करना होगा।

बुधवार को यूपीडेस्को के सहयोग से ज्ञानेंद्र शुक्ला ने वीडीए कर्मियाें को ऑनलाइन नक्शा पास करने की पूरी प्रक्रिया समझाई गई और उन्हें प्रशिक्षित किया गया। जो आर्किटेक्ट नक्शा पास कराते हैं, उन्हें भी इस व्यवस्था से जोड़ा जाएगा और लाइसेंस नंबर दर्ज किया जाएगा।

नक्शा बनाकर भेजने पर उनके लाइसेंस नंबर से मिलान कराया जाएगा। वीडीए उपाध्यक्ष के मुताबिक जल्द ही ऑनलाइन प्रक्रिया सार्वजनिक की जाएगी। उपाध्यक्ष पुलकित खरे ने बताया कि ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान एप्रुवल सिस्टम की इस सुविधा का उद्घाटन शनिवार को मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी मंडलायुक्त कार्यालय में करेंगे।
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