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नदियों का प्रदूषित जल शुद्ध करने की आईआईटी बीएचयू ने निकाली राह
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Mon, 01 May 2017 05:35 PM IST
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आईआईटी बीएचयू
- फोटो : demo pic
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नदियों और नालों का दूषित जल साफ और निर्मल बनाने की तकनीक आईआईटी बीएचयू के पुरातन छात्र डॉ. आरएस दुबे ने ईजाद की है।
केमिकल इंजीनियरिंग के छात्र रहे डॉ. दुबे ने 15 साल के प्रयास के बाद ‘सिक्वेंसिंग इलेक्ट्रो मैग्नेटिक रिएक्टर’ तकनीक तैयार की है जिससे दूषित जल साफ किया जा सकता है। रविवार को कुलपति आवास पर उन्होंने इसका प्रदर्शन भी वीसी प्रो. जीसी त्रिपाठी के समक्ष किया।
डॉ. दुबे ने सुंदरपुर और नगवां से असि नदी के जल के दो नमूने लिए। ‘सिक्वेंसिंग इलेक्ट्रो मैग्नेटिक रिएक्टर’ तकनीक से उन्होंने पांच मिनट में दूषित जल को शुद्ध करके दिखा दिया।
उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में अवजल शोधन की तकनीक विदेशी है और महंगी भी जबकि ये तकनीक वैदिक सिद्धांतों पर आधारित है और सस्ती व स्वदेशी भी। इस प्रौद्योगिकी की इकाई लगाने के लिए अतिरिक्त जगह की जरूरत भी नहीं होगी।
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इसमें सीवेज लाइन बिछाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। उनका दावा है कि इस तकनीक के जरिये नदियों को स्वच्छ किया जा सकता है। उन्होंने इसका पेटेंट भी करा लिया है।
इस मौके पर महामना सेंटर फॉर रीवर डेवलपमेंट एंड वाटर रिसोर्स मैनेजमेंट के समन्वयक प्रो. बीडी त्रिपाठी, प्रो. एसके सिंह, प्रो. रोएना सिंह, प्रो. ओएन सिंह मौजूद रहे।
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केमिकल इंजीनियरिंग के छात्र रहे डॉ. दुबे ने 15 साल के प्रयास के बाद ‘सिक्वेंसिंग इलेक्ट्रो मैग्नेटिक रिएक्टर’ तकनीक तैयार की है जिससे दूषित जल साफ किया जा सकता है। रविवार को कुलपति आवास पर उन्होंने इसका प्रदर्शन भी वीसी प्रो. जीसी त्रिपाठी के समक्ष किया।
डॉ. दुबे ने सुंदरपुर और नगवां से असि नदी के जल के दो नमूने लिए। ‘सिक्वेंसिंग इलेक्ट्रो मैग्नेटिक रिएक्टर’ तकनीक से उन्होंने पांच मिनट में दूषित जल को शुद्ध करके दिखा दिया।
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उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में अवजल शोधन की तकनीक विदेशी है और महंगी भी जबकि ये तकनीक वैदिक सिद्धांतों पर आधारित है और सस्ती व स्वदेशी भी। इस प्रौद्योगिकी की इकाई लगाने के लिए अतिरिक्त जगह की जरूरत भी नहीं होगी।
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इसमें सीवेज लाइन बिछाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। उनका दावा है कि इस तकनीक के जरिये नदियों को स्वच्छ किया जा सकता है। उन्होंने इसका पेटेंट भी करा लिया है।
इस मौके पर महामना सेंटर फॉर रीवर डेवलपमेंट एंड वाटर रिसोर्स मैनेजमेंट के समन्वयक प्रो. बीडी त्रिपाठी, प्रो. एसके सिंह, प्रो. रोएना सिंह, प्रो. ओएन सिंह मौजूद रहे।