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Varanasi News: आईआईटी बीएचयू और पुनर्वास विवि तैयार करेंगे शिक्षा सामग्री
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दिव्यांग विद्यार्थियों की पढ़ाई में सहयोग के लिए साथ आए दोनों संस्थान
संवाद न्यूज एजेंसी
लखनऊ। आईआईटी बीएचयू के छात्र और शिक्षक मिलकर डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विवि के दिव्यांगजन विद्यार्थियों के जीवन में शिक्षा का उजाला करेंगे। दोनों शिक्षण संस्थान अकादमिक सहयोग के लिए साथ आए हैं। दिव्यांगजनों की सीखने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सहायक उपकरण और सहायक प्रौद्योगिकी विकसित करने पर दोनों संस्थान मिलकर काम करेंगे।
कुलपति प्रो. संजय सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को आईआईटी के निदेशक प्रो. अमित पात्रा के बीच संवाद सत्र हुआ। विद्यार्थियों के लिए अकादमिक सहयोग, शोध सहयोग, सॉफ्टवेयर विकास, कौशल संवर्द्धन कार्यक्रम, डाटा विश्लेषण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग एवं ऑनलाइन कक्षाओं के संचालन के लिए सहमति बनी। प्रवक्ता प्रो. यशवंत वीरोदय ने बताया कि संस्थान दिव्यांगजनों को शिक्षा प्राप्त करने में सहायक अध्ययन उपकरणों का विकास करने, अनुसंधान सहयोग सहायक प्रौद्योगिकी (एचआई, वीआई, ओडी के लिए) और जैविक प्रौद्योगिकी (आणविक और जीन स्तर) पर अनुसंधान और विकास परियोजनाएं शारीरिक विकलांगता वाले व्यक्तियों के लिए कृत्रिम, ऑर्थोटिक, सहायक और पुनर्वास उपकरणों का विकास उनकी सामाजिक और शारीरिक पहुंच को बढ़ाने के लिए के लिए अपना सहयोग देगा।
कम सुनने वाले छात्रों को अनुवाद की सुविधा
प्रो. वीरोदय ने बताया कि अकादमिक सहयोग के क्रम में दोनों संस्थानों के मध्य सॉफ्टवेयर विकास को लेकर सहमति बनी। जो कम सुनने वाले छात्रों के लिए कक्षा व्याख्यान को तत्काल पाठ रूप में अनुवादित कर सकेगा। जबकि दृष्टिबाधित छात्रों की गतिशीलता में सुधार के लिए त्रि-आयामी विश्वविद्यालय मानचित्र का विकास होगा। यह मोबाइल एप के रूप में वॉयस कमांड के साथ काम करेगा। वहीं एक ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित करने पर जोर दिया जाएगा जो संकेत को पाठ और ऑडियो रूप में अनुवादित कर सकेगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
लखनऊ। आईआईटी बीएचयू के छात्र और शिक्षक मिलकर डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विवि के दिव्यांगजन विद्यार्थियों के जीवन में शिक्षा का उजाला करेंगे। दोनों शिक्षण संस्थान अकादमिक सहयोग के लिए साथ आए हैं। दिव्यांगजनों की सीखने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सहायक उपकरण और सहायक प्रौद्योगिकी विकसित करने पर दोनों संस्थान मिलकर काम करेंगे।
कुलपति प्रो. संजय सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को आईआईटी के निदेशक प्रो. अमित पात्रा के बीच संवाद सत्र हुआ। विद्यार्थियों के लिए अकादमिक सहयोग, शोध सहयोग, सॉफ्टवेयर विकास, कौशल संवर्द्धन कार्यक्रम, डाटा विश्लेषण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग एवं ऑनलाइन कक्षाओं के संचालन के लिए सहमति बनी। प्रवक्ता प्रो. यशवंत वीरोदय ने बताया कि संस्थान दिव्यांगजनों को शिक्षा प्राप्त करने में सहायक अध्ययन उपकरणों का विकास करने, अनुसंधान सहयोग सहायक प्रौद्योगिकी (एचआई, वीआई, ओडी के लिए) और जैविक प्रौद्योगिकी (आणविक और जीन स्तर) पर अनुसंधान और विकास परियोजनाएं शारीरिक विकलांगता वाले व्यक्तियों के लिए कृत्रिम, ऑर्थोटिक, सहायक और पुनर्वास उपकरणों का विकास उनकी सामाजिक और शारीरिक पहुंच को बढ़ाने के लिए के लिए अपना सहयोग देगा।
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कम सुनने वाले छात्रों को अनुवाद की सुविधा
प्रो. वीरोदय ने बताया कि अकादमिक सहयोग के क्रम में दोनों संस्थानों के मध्य सॉफ्टवेयर विकास को लेकर सहमति बनी। जो कम सुनने वाले छात्रों के लिए कक्षा व्याख्यान को तत्काल पाठ रूप में अनुवादित कर सकेगा। जबकि दृष्टिबाधित छात्रों की गतिशीलता में सुधार के लिए त्रि-आयामी विश्वविद्यालय मानचित्र का विकास होगा। यह मोबाइल एप के रूप में वॉयस कमांड के साथ काम करेगा। वहीं एक ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित करने पर जोर दिया जाएगा जो संकेत को पाठ और ऑडियो रूप में अनुवादित कर सकेगा।
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