IIT BHU : दांतों को सड़ने, टूटने से बचा रहा 3डी नैनो फाइबर, भारत में पहली बार अपनाई ये टेक्नोलॉजी; जानें खास
Varanasi News : दांतों की समस्याएं अब आम हो गई हैं। ऐसे में ये टेक्नोलॉजी काफी कारगर साबित होगी। डॉक्टरों के अनुसार, इस फाइबर को दांतों के नीचे लगाया जाता है। आइए जानते हैं 3डी नैनो फाइबर के बारे में...
विस्तार
आईआईटी-बीएचयू के एक रिसर्चर ने दांतों को सड़ने या टूटने से बचाने के लिये 3डी नैनो फाइबर बनाया है। इसे बीएचयू के डेंटल अस्पताल में आये 36 मरीजों के मसूड़ों में लगाया गया है। 6-12 महीने तक स्टडी चली। रिजल्ट में पता चला कि जो दांत जो कुछ महीनों में ही टूट या सड़ सकते थे, वे सभी फिर से मजबूत हो गये हैं।
आईआईटी-बीएचयू से इसी साल पीएचडी पूरी कर चुके मटेरियल साइंस के डॉ. अखिलेश कुमार यादव के इस रिसर्च को संस्थान के टेक्नोलॉजी एग्जीबिशन मंच ''टेक्नेक्स-24'' में पहला स्थान मिला था। फिलहाल, उन्होंने इस रिसर्च का पेटेंट फाइल नहीं किया है। जल्द ही करने जा रहे हैं। लेकिन, अखिलेश के मुताबिक ये भारत में पहली बार है कि नैनो बायो एक्टिव ग्लास के बने नैनो फाइबर से दांतों को जीवनदान दिया जा रहा है।
खराब हो रहे दांतों के नीचे लगाते हैं फाइबर
बतौर डॉ. अखिलेश, इस 3डी नैनो फाइबर को खराब हो रहे दांतों के नीचे मसूड़ों में फिट किया जाता है। वैज्ञानिक भाषा में इस नैनो फाइबर को एंडोडॉन्टिक टिशू रिजनरेशन टूल के नाम से समझा जा सकता है। इसे लगाने से दांतों के बीच रुट कैनाल की साइज बढ़ी हुई दिखाई दी। दांतों के उतकों का विकास हुआ है। इसके बढ़ने से दांत ठीक से काम करने लगे। जल्दी गिरने वाले दांत मजबूत हो गये। जो दांत मरने की कगार पर था, वो काम करने लगे।
150-200 नैनो मीटर का है फाइबर
नैनो फाइबर की साइज 150-200 नैनो मीटर के बीच में ही हो सकती है। वहीं, इसे जिस 3डी प्रिंटर से प्रिंट करते हैं, वो 15 सेमी लंबा और 30 सेमी चौड़ा होता है।
डेली रुटीन चेकअप से मिलेगी छुट्टी
नैनो फाइबर लगाने के बाद मरीजों को रोजाना या साप्ताहिक रुटीन चेकअप नहीं कराना पड़ता। एक बार लगा लिया तो फिर छह महीने और एक साल बाद ही रुटीन चेकअप कराया जा सकता है। दांतों को ढंग से क्लीन करके ही नैनो फाइबर लगाया जाता है।