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ओपीडी में दिखाना है तो पानी घर से लाइए, शौचालय भूल जाइए
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बीएचयू अस्पताल में ओपीडी की फीस 20 से बढ़ाकर 30 रुपये कर दी गई है, लेकिन संसाधनों की कमी से मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। ओपीडी हाल में पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। शौचालय से दुर्गंध आती है। पानी के लिए दूरदराज से आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भटकना पड़ रहा है। कुछ लोग बाहर से पानी खरीदकर पीने को मजबूर हैं। यहां हर दिन वाराणसी, आसपास के जिलों के साथ ही बिहार, झारखंड से दो से तीन हजार मरीज आते हैं। ओपीडी में पंजीकरण के बाद मरीज संबंधित विभाग की ओपीडी में पर्चा जमाकर बारी का इंतजार करते हैं। पूरे ओपीडी हाल में पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। चेस्ट डिपार्टमेंट की ओपीडी के पास में जो वाटर कूलर लगा है। वह भी लंबे समय से खराब है। इसके अलावा नीचे कहीं और पानी की व्यवस्था नही है। बुधवार दोपहर बहुत से मरीज बॉटल लेकर पानी भरने गए लेकिन वाटर कूलर खराब होने पर उन्हें निराश लौटना पड़ा। यहां जो टायलेट बना है, उसमें दरवाजे भी टूटते जा रहे हैं। दुर्गंध की वजह से पास से गुजरना भी मुश्किल है।
बोले मरीज
ओपीडी की फीस बढ़ाने का फैसला तो ले लिया गया है, लेकिन सुविधा नहीं मिल रही है। इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है। सबसे अधिक परेशानी पानी को लेकर है। इसकी कोई व्यवस्था नहीं है।
- हरिबंश पांडेय, बिहार
जब अस्पताल सरकारी है तो फीस क्यों बढ़ाई जा रही है, यह समझ से परे है। अगर फीस बढ़ा भी दी गई तो मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराना भी जरूरी है। पीने का पानी तो नहीं है, टायलेट में इतनी दुर्गंध कि खड़े होना मुश्किल है।
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-मुलायम सिंह, गाजीपुर
नहीं बन सकी लिफ्ट, दुश्वारियां बरकरार
अस्पताल की लिफ्ट भी लंबे समय से खराब है। ऐसे में ओपीडी में दिखाने के बाद अगर चिकित्सक किसी मरीज को वार्ड में भर्ती करने की सलाह दे रहे हैं तो उन्हें ऊपरी मंजिल तक जाने के लिए लिफ्ट की सुविधा नहीं मिल पा रही है। अस्पताल में कंट्रोल रूम के पास लगी तीनों लिफ्ट खराब है। ब्लड बैंक के आगे वाली लिफ्ट भी खराब है। लिहाजा रैंप के सहारे ही मरीज और उनके परिजन वार्ड में जा रहे हैं। इस तरह की स्थिति लंबे समय से बनी है। यहां लिफ्ट खराब होने की सूचना भी चस्पा है।
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बोले मरीज
ओपीडी की फीस बढ़ाने का फैसला तो ले लिया गया है, लेकिन सुविधा नहीं मिल रही है। इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है। सबसे अधिक परेशानी पानी को लेकर है। इसकी कोई व्यवस्था नहीं है।
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- हरिबंश पांडेय, बिहार
जब अस्पताल सरकारी है तो फीस क्यों बढ़ाई जा रही है, यह समझ से परे है। अगर फीस बढ़ा भी दी गई तो मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराना भी जरूरी है। पीने का पानी तो नहीं है, टायलेट में इतनी दुर्गंध कि खड़े होना मुश्किल है।
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-मुलायम सिंह, गाजीपुर
नहीं बन सकी लिफ्ट, दुश्वारियां बरकरार
अस्पताल की लिफ्ट भी लंबे समय से खराब है। ऐसे में ओपीडी में दिखाने के बाद अगर चिकित्सक किसी मरीज को वार्ड में भर्ती करने की सलाह दे रहे हैं तो उन्हें ऊपरी मंजिल तक जाने के लिए लिफ्ट की सुविधा नहीं मिल पा रही है। अस्पताल में कंट्रोल रूम के पास लगी तीनों लिफ्ट खराब है। ब्लड बैंक के आगे वाली लिफ्ट भी खराब है। लिहाजा रैंप के सहारे ही मरीज और उनके परिजन वार्ड में जा रहे हैं। इस तरह की स्थिति लंबे समय से बनी है। यहां लिफ्ट खराब होने की सूचना भी चस्पा है।