{"_id":"610d93598ebc3e726e16fd87","slug":"i-live-in-the-field-with-a-hockey-stick-even-in-dreams-lalit-upadhyay-varanasi-news-vns604667637","type":"story","status":"publish","title_hn":"ख्वाब में भी हॉकी स्टिक लेकर मैदान में रहता हूं : ललित उपाध्याय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ख्वाब में भी हॉकी स्टिक लेकर मैदान में रहता हूं : ललित उपाध्याय
विज्ञापन
टोक्यो में देश का मान बढ़ाने वाले कांस्य पदक विजेता हॉकी टीम के फारवर्डर और काशी के लाल ललित उपाध्याय ख्वाब में भी मैदान पर ही रहते हैं। जिस तरह वह मैदान पर हाथों में स्टिक लेकर पसीना बहाते हैं, ठीक उसी तरह नींद में भी उन्हें सिर्फ हॉकी ही दिखती है। शुक्रवार को टोक्यो से मोबाइल पर अमर उजाला से विशेष बातचीत में ओलंपियन ललित उपाध्याय ने कहा कि हर खिलाड़ी का सपना होता है कि वह ओलंपिक खेले और बेहतर प्रदर्शन करते हुए देश के लिए मेडल जीते। बचपन से देखा हुआ सपना अब साकार हुआ। बोले, नौ अगस्त को भारत आऊंगा और 11 अगस्त को काशी पहुंचने के बाद बाबा विश्वनाथ के दर पर शीश नवाऊंगा।
ललित ने बताया कि 2003 में यूपी कॉलेज के खेल मैदान से हॉकी का ककहरा सीखते वक्त यह पता नहीं था कि देश के लिए कभी ओलंपिक खेल पाऊंगा, लेकिन जेहन में कहीं न कहीं यह विश्वास था कि देश के लिए मेडल जरूर जीतूंगा। प्रारंभ हमेशा नन्हे कदमों से ही होता है, बस कदम रुकने नहीं चाहिए। पांच अगस्त को मेरे जीवन का सबसे खूबसूरत और ताउम्र नहीं भूलने वाला ऐतिहासिक लम्हा रहा। देश के लिए खेलते हुए 41 साल बाद हॉकी में पदक जीतने की खुशी में हम सभी साथी देर रात तक जागते रहे। हर किसी की आंखों से नींद गायब थी। पूरी रात लग रहा था कि हम मैदान पर ही हैं। मैदान पर पसीना बहाने वाले खिलाड़ियों के लिए ललित ने कहा कि मेहनत और जुनून में कभी अंतर न पैदा होने दें। इरादें हमेशा चट्टान जैसे होने चाहिए, खेल के प्रति दृढ़ संकल्प और माता-पिता, गुरुजनों के आशीर्वाद ने आज इस मुकाम पर खड़ा कर दिया है।
पिता बोले, हमारी तो होली-दिवाली सब मन गई
ललित उपाध्याय के पिता सतीश उपाध्याय ने शिवपुर में भगतपुर स्थित घर पर कहा कि एक पिता की चाहत और सबसे बड़ी खुशी उसके संतान की सफलता होती है। बेटे ने मेरा ही नहीं, बल्कि काशी सहित देश का सीना चौड़ा कर दिया। ओलंपिक में कांस्य पदक की जीत से ही हमारे घर परिवार में होली-दिवाली सब मन गई। बोले, बेटे ने गर्व से सीना चौड़ा कर दिया।
विज्ञापन
गांव में जश्न का माहौल
ओलंपियन ललित के घर ही नहीं, बल्कि गांव में भी जश्न का माहौल है। बृहस्पतिवार से ही लोग ललित के परिजनों को शुभकामनाएं देने पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को भी दिन भर परिचितों और राजनीतिक, खेल प्रेेेमियों के आने जाने का क्रम लगा रहा।
इनसेट
प्रधानमंत्री ने किया ट्वीट, ललित के खेल पर भारत को गर्व
वाराणसी। 41 साल बाद ओलंपिक में देश के लिए कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य और वाराणसी के शिवपुर निवासी ललित उपाध्याय का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हौसला बढ़ाया। प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया कि ललित उपाध्याय के खेल पर भारत को गर्व है। उन्होंने बहुत चुनौतियों को पार किया है और महान निपुणता का प्रदर्शन किया है। उन्हें शुभकामनाएं। ब्यूरो
ललित के स्वागत की तैयारी में जुटे स्कूल, कॉलेज और संगठन
वाराणसी। ओलंपियन ललित उपाध्याय के बनारस आने को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। उनके स्वागत और सम्मान के लिए स्कूल, कॉलेज और कई संगठन ललित के परिजनों और कोच से परैवी भी करने लगे हैं। पिता सतीश उपाध्याय ने बताया कि शुक्रवार को कई बैंकों और संगठन के पदाधिकारी आए और ललित के आगमन के बाद उनके स्वागत में लालपुर में कार्यक्रम आयोजित करने के बारे में बताया। कोच पमानंद मिश्र ने बताया कि बाबतपुर हवाई अड्डे से शिवपुर तक स्वागत की तैयारी है। कई स्कूल के प्रधानाचार्यों ने भी ललित को अपने विद्यालय पर बुलाने की बात कही है। परमानंद ने बताया कि ललित ने खेल करियर में जूनियर खिलाड़ियों को सैकड़ों हॉकी स्टिक बांटकर प्रोत्साहित किया है। इस बार भी ललित के आने पर हॉकी स्टिक देकर खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करेंगे। संवाद
विज्ञापन
ललित ने बताया कि 2003 में यूपी कॉलेज के खेल मैदान से हॉकी का ककहरा सीखते वक्त यह पता नहीं था कि देश के लिए कभी ओलंपिक खेल पाऊंगा, लेकिन जेहन में कहीं न कहीं यह विश्वास था कि देश के लिए मेडल जरूर जीतूंगा। प्रारंभ हमेशा नन्हे कदमों से ही होता है, बस कदम रुकने नहीं चाहिए। पांच अगस्त को मेरे जीवन का सबसे खूबसूरत और ताउम्र नहीं भूलने वाला ऐतिहासिक लम्हा रहा। देश के लिए खेलते हुए 41 साल बाद हॉकी में पदक जीतने की खुशी में हम सभी साथी देर रात तक जागते रहे। हर किसी की आंखों से नींद गायब थी। पूरी रात लग रहा था कि हम मैदान पर ही हैं। मैदान पर पसीना बहाने वाले खिलाड़ियों के लिए ललित ने कहा कि मेहनत और जुनून में कभी अंतर न पैदा होने दें। इरादें हमेशा चट्टान जैसे होने चाहिए, खेल के प्रति दृढ़ संकल्प और माता-पिता, गुरुजनों के आशीर्वाद ने आज इस मुकाम पर खड़ा कर दिया है।
विज्ञापन
पिता बोले, हमारी तो होली-दिवाली सब मन गई
ललित उपाध्याय के पिता सतीश उपाध्याय ने शिवपुर में भगतपुर स्थित घर पर कहा कि एक पिता की चाहत और सबसे बड़ी खुशी उसके संतान की सफलता होती है। बेटे ने मेरा ही नहीं, बल्कि काशी सहित देश का सीना चौड़ा कर दिया। ओलंपिक में कांस्य पदक की जीत से ही हमारे घर परिवार में होली-दिवाली सब मन गई। बोले, बेटे ने गर्व से सीना चौड़ा कर दिया।
विज्ञापन
गांव में जश्न का माहौल
ओलंपियन ललित के घर ही नहीं, बल्कि गांव में भी जश्न का माहौल है। बृहस्पतिवार से ही लोग ललित के परिजनों को शुभकामनाएं देने पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को भी दिन भर परिचितों और राजनीतिक, खेल प्रेेेमियों के आने जाने का क्रम लगा रहा।
इनसेट
प्रधानमंत्री ने किया ट्वीट, ललित के खेल पर भारत को गर्व
वाराणसी। 41 साल बाद ओलंपिक में देश के लिए कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य और वाराणसी के शिवपुर निवासी ललित उपाध्याय का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हौसला बढ़ाया। प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया कि ललित उपाध्याय के खेल पर भारत को गर्व है। उन्होंने बहुत चुनौतियों को पार किया है और महान निपुणता का प्रदर्शन किया है। उन्हें शुभकामनाएं। ब्यूरो
ललित के स्वागत की तैयारी में जुटे स्कूल, कॉलेज और संगठन
वाराणसी। ओलंपियन ललित उपाध्याय के बनारस आने को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। उनके स्वागत और सम्मान के लिए स्कूल, कॉलेज और कई संगठन ललित के परिजनों और कोच से परैवी भी करने लगे हैं। पिता सतीश उपाध्याय ने बताया कि शुक्रवार को कई बैंकों और संगठन के पदाधिकारी आए और ललित के आगमन के बाद उनके स्वागत में लालपुर में कार्यक्रम आयोजित करने के बारे में बताया। कोच पमानंद मिश्र ने बताया कि बाबतपुर हवाई अड्डे से शिवपुर तक स्वागत की तैयारी है। कई स्कूल के प्रधानाचार्यों ने भी ललित को अपने विद्यालय पर बुलाने की बात कही है। परमानंद ने बताया कि ललित ने खेल करियर में जूनियर खिलाड़ियों को सैकड़ों हॉकी स्टिक बांटकर प्रोत्साहित किया है। इस बार भी ललित के आने पर हॉकी स्टिक देकर खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करेंगे। संवाद