World Homeopathy Day: असाध्य रोगों में कारगर है होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति, कोरोना काल में भी रहा इसका प्रभाव
आज विश्व होम्योपैथी दिवस है। इस दिवस को इसलिए मनाया जाता है, ताकि लोग होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के बारे में जानें, उसके फायदे क्या हैं, उससे अवगत हों, लोगों में इसके प्रति जागरूकता आए।
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असाध्य रोगों मेें होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति काफी कारगर है। एलोपैथी चिकित्सा में दवाओं के प्रयोग से होने वालेे साइड इफेक्ट से बचने के लिए भी लोग अब होम्योपैथी को ज्यादा तरजीह देने लगे हैं। होम्योपैथी चिकित्सा केवल सर्दी एवं जुकाम को ठीक करने की पैथी नहीं रही, बल्कि इसमें विज्ञान एवं अनुसंधान से विभिन्न प्रकार के खोज से असाध्य रोगों को भी जड़ से ठीक करने की क्षमता है।
कोरोना काल में होम्योपैथी में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के वाली दवाओं प्रयोग किया गया। होम्यो चिकित्सकों का कहना है कि कोरोना काल में लोगों को जब एलोपैथी दवाओं से ज्यादा साइड इफेक्ट दिखने लगे तो वे लोग होम्योपैथी दवाओं खाना शुरू किया।
होम्योपैथी चिकित्सा से इन असाध्य रोगों का इलाज संभव
चर्मरोग, कैंसर , डायबिटीज, स्त्री रोग, माइग्रेन, मानसिक रोग, एड्स, पथरी, गठिया, हड्डी में सूजन, आंतों में संक्रमण, लीवर में सूजन, पीलिया, पित्त में सूजन, अनिद्रा, रक्त संबंधी रोग एवं बच्चों को एलर्जी, पेट में कीड़े, कमजोरी, पतलापन जैसे रोग का इलाज इस पद्धति से संभव है।
क्यों मनाया जाता है होम्योपैथी दिवस
10 अप्रैल 1755 को जर्मन चिकित्सक डॉ. सैमुअल हैनिमैन का जन्म हुआ था। जिन्होंने होम्योपैथी नामक चिकित्सा पद्धति की खोज की। विश्व को चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई पहचान देने के लिए हैनिमैन के जन्म दिवस के दिन ही विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया जाता है।
राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय के होम्योपैथी प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. पंकज शुक्ला (एमडी) ने कहा कि लोगों में होम्योपैथी से संबंधित फैली भ्रांतियां बिल्कुल भी गलत है। होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति में रोगों का इलाज लक्षणों के आधार पर किया जाता है। असाध्य रोगों में यह पद्धति काफी कारगर है। इस इलाज का कोई दुष्प्रभाव नहीं है।
राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय के चिकित्साधिकारी डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि अगर कोई मरीज शुरूआत से ही रोगों का इलाज कराता है तो बड़ी से बड़ी बीमारी भी होम्योपैथिक दवाओं से ठीक हो सकती है। मरीज यदि नियमों का पालन करे तो उसे कहीं और जाने की जरूरत भी नहीं है और जल्दी से ठीक भी हो जाएगा।
होम्योपैथी चिकित्सा से ठीक हुए लोग
1. भदोही के सुनील बिंद (28 वर्ष) के दोनों गुर्दे में पथरी थी। उसने कई जगहों पर इलाज कराया लेकिन ठीक नहीं हुआ तो उसने ऑपरेशन भी कराया, इसके बाद भी ठीक नहीं हुए। होम्योपैथी इजाज से अब वे ठीक हैं।
2. सुंदरपुर की नीलम ( 38 वर्ष) को गर्र्भाशय में गांठ था। उसने कई महिला डाक्टरों से इलाज कराया, लेकिन ठीक नहीं हो पाई। जब उसने होम्योपैथी में इलाज कराया तो बिना ऑपरेशन के समस्या ठीक हो गई।
3. गौरीगंज निवासी दीपमाला को यूरिन इंफेक्शन की बीमारी थी। उसने कई एलोपैथी के डॉक्टरों से इलाज कराया। लेकिन आराम नहीं मिला। उसने होम्योपैथी में इलाज कराना शुरू किया तो बीमारी ठीक हो गई।
4. चौक के महेश तिवारी को प्रोस्टेट कैंसर की शिकायत थी। मरीज को इससे कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था। डाक्टर ने आपरेशन की सलाह दी। बाद में उन्होंने होम्योपैथी दवा से बीमारी ठीक की।