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बारिश से भरभराकर गिरी घर की दीवार, सास और बहू की मौत
ब्यूरो,अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Sat, 02 Sep 2017 06:54 PM IST
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गाजीपुर के देवकठिया गांव का मामला
- फोटो : अमर उजाला
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गाजीपुर जिले के देवकठिया गांव के जमुनादेवा पुरवा में शनिवार की सुबह हल्की बारिश के दौरान कच्चे मकान की दीवार अचानक भरभराकर गिर पड़ी। मलबे में दबकर सास और बहू की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना पर पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
जमुनादेवा पुरवा निवासी हरिद्वार यादव और पत्नी बुधिया देवी (55) शुक्रवार की रात मड़हे में सोए थे। बुधिया कई दिनों से बीमार चल रही थी। शनिवार की सुबह हरिद्वार मवेशियों को चारा डालने बाहर चला गया। तभी बारिश होने लगी। इसी दौरान सास को दवा देने के लिए बहू कमली देवी झोपड़ी में पहुंची।
दवा खिलाने के बाद वह सास का सिर दबा रही थी। इसी बीच मिट्टी की दीवार गिर पड़ी। सास और बहू इसके मलबे में दब गईं। कुछ दूरी पर मौजूद हरिद्वार को जैसे ही घटना की जानकारी हुई, वह शोर मचाने लगा।
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उसकी आवाज सुनकर आस-पड़ोस के लोग घरों से निकलकर मौके की तरफ दौड़ पड़े। आवाज सुनकर लोग पहुंचे और मलबा हटाकर कमली और बुधिया को बाहर निकाला, लेकिन दोनों की मौत हो चुकी थी।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने पूछताछ करने के बाद शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। एक परिवार में दो लोगों की मौत से पूरा गांव शोक में डूब गया।
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जमुनादेवा पुरवा निवासी हरिद्वार यादव और पत्नी बुधिया देवी (55) शुक्रवार की रात मड़हे में सोए थे। बुधिया कई दिनों से बीमार चल रही थी। शनिवार की सुबह हरिद्वार मवेशियों को चारा डालने बाहर चला गया। तभी बारिश होने लगी। इसी दौरान सास को दवा देने के लिए बहू कमली देवी झोपड़ी में पहुंची।
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दवा खिलाने के बाद वह सास का सिर दबा रही थी। इसी बीच मिट्टी की दीवार गिर पड़ी। सास और बहू इसके मलबे में दब गईं। कुछ दूरी पर मौजूद हरिद्वार को जैसे ही घटना की जानकारी हुई, वह शोर मचाने लगा।
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उसकी आवाज सुनकर आस-पड़ोस के लोग घरों से निकलकर मौके की तरफ दौड़ पड़े। आवाज सुनकर लोग पहुंचे और मलबा हटाकर कमली और बुधिया को बाहर निकाला, लेकिन दोनों की मौत हो चुकी थी।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने पूछताछ करने के बाद शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। एक परिवार में दो लोगों की मौत से पूरा गांव शोक में डूब गया।
बहु को खींच ले गई मौत
गाजीपुर के देवकठिया गांव का मामला
- फोटो : अमर उजाला
कहा जाता है कि ऊपर वाले के मर्जी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता है। कुछ ऐसा ही हुआ बहू कमली के साथ। वह रोज सुबह सास को दवा देने के बाद वापस अपने घर में चली जाती थी, लेकिन शनिवार की सुबह काल ने उसे वहीं रोके रखा। वह दवा देने के बाद सास के पास ही काफी देर तक बैठी रही।
इसी बीच कच्ची दीवार ढह गई और सास के साथ ही बहू कमली देवी भी काल के गाल में समा गई। बेटा जयराम (15) और श्रीराम (12) मां और दादी के शव के पास बैठकर बिलखते रहे। उन्हें सांत्वना देने वालों की आंखें भी भर जा रही थीं।
उधर लोग चर्चा करते रहे कि बुधिया अगर मवेशियों को चारा-पानी नहीं देने निकला होता तो शायद हरिद्वार भी झोपड़ी के अंदर ही रहता और पत्नी के साथ वह भी दुर्घटना का शिकार हो सकता था।
इसी बीच कच्ची दीवार ढह गई और सास के साथ ही बहू कमली देवी भी काल के गाल में समा गई। बेटा जयराम (15) और श्रीराम (12) मां और दादी के शव के पास बैठकर बिलखते रहे। उन्हें सांत्वना देने वालों की आंखें भी भर जा रही थीं।
उधर लोग चर्चा करते रहे कि बुधिया अगर मवेशियों को चारा-पानी नहीं देने निकला होता तो शायद हरिद्वार भी झोपड़ी के अंदर ही रहता और पत्नी के साथ वह भी दुर्घटना का शिकार हो सकता था।