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हाईकोर्ट का आदेश, एआरटीओ आरएस यादव की संपत्तियों की हो जांच
ब्यूरो,अमर उजाला, इलाहाबाद/वाराणसी
Updated Tue, 05 Dec 2017 02:07 PM IST
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि चंदौली में तैनात रहे एआरटीओ आरएस यादव द्वारा कमाई गई अकूत अवैध संपत्ति की गहराई से जांच होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि इस बात का पता लगाया जाए कि महज 62 हजार रुपये वेतन वाले छोटे अधिकारी के पास पांच सौ करोड़ रुपये की संपत्ति कहां से आई।
आरएस यादव की जमानत अर्जी खारिज करते हुए न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने अपने विस्तृत आदेश में कहा है कि याची ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर विवेचना को प्रभावित किया है। जांच अधिकारी ने सिर्फ खानापूर्ति की है।
वह गवाहों को धमका रहा है और यदि उसे जमानत पर रिहा किया गया तो यह समाज के हित में नहीं होगा। कोर्ट ने इस आदेश की प्रति डीजीपी को भेजने का निर्देश देते हुए कहा है कि मामले की नए सिरे से जांच होनी चाहिए।
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कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने जो जांच की है वह अपराध की है। एआरटीओ की संपत्ति को जांच में शामिल नहीं किया गया था। यह कृत्य न्याय व्यवस्था को गंभीर क्षति पहुंचाने वाला है।
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आरएस यादव की जमानत अर्जी खारिज करते हुए न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने अपने विस्तृत आदेश में कहा है कि याची ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर विवेचना को प्रभावित किया है। जांच अधिकारी ने सिर्फ खानापूर्ति की है।
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वह गवाहों को धमका रहा है और यदि उसे जमानत पर रिहा किया गया तो यह समाज के हित में नहीं होगा। कोर्ट ने इस आदेश की प्रति डीजीपी को भेजने का निर्देश देते हुए कहा है कि मामले की नए सिरे से जांच होनी चाहिए।
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कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने जो जांच की है वह अपराध की है। एआरटीओ की संपत्ति को जांच में शामिल नहीं किया गया था। यह कृत्य न्याय व्यवस्था को गंभीर क्षति पहुंचाने वाला है।
नौकरों और रिश्तेदारों के नाम बनाईं कंपनियां
rs yadav
- फोटो : अमर उजाला
आरएस यादव को पुलिस ने एक ट्रक चालक को धमकाकर वसूली करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वह 12 जून 2017 से जेल में बंद है। पुलिस ने जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल कर दिया। याची मूल रूप से सिंचाई विभाग में अवर अभियंता के पद पर तैनात हुआ था।
प्रतिनियुक्ति पर ट्रांसपोर्ट विभाग में निरीक्षक के पद गया और बाद प्रभारी आरटीओ बन गया। कोर्ट ने कहा कि याची ने अपने नौकरों और रिश्तेदारों के नाम पर चार प्रेत (घोस्ट) कंपनियां स्थापित की हैं।
इनमें करोड़ों रुपये का निवेश है। उसका बेटा अपूर्व यादव, बेटी ऋचा यादव और पूनम यादव, पत्नी गंगोत्री देवी, सीए एसके द्विवेदी और ड्राइवर महेंद्र मौर्या इन कंपनियों के कर्ताधर्ता हैं।
70 करोड़ रुपये के थ्री स्टार होटल वेस्ट इन का कर्ताधर्ता आरएस यादव का ड्राइवर है। 15 वाल्वो बसें, शॉपिंग मॉल, गोरखपुर में 12 करोड़ रुपये का होटल, दर्जनों फ्लैट हैं। इसके अलावा भी तमाम संपत्तियां हैं जिनकी गहराई से जांच होनी चाहिए।
प्रतिनियुक्ति पर ट्रांसपोर्ट विभाग में निरीक्षक के पद गया और बाद प्रभारी आरटीओ बन गया। कोर्ट ने कहा कि याची ने अपने नौकरों और रिश्तेदारों के नाम पर चार प्रेत (घोस्ट) कंपनियां स्थापित की हैं।
इनमें करोड़ों रुपये का निवेश है। उसका बेटा अपूर्व यादव, बेटी ऋचा यादव और पूनम यादव, पत्नी गंगोत्री देवी, सीए एसके द्विवेदी और ड्राइवर महेंद्र मौर्या इन कंपनियों के कर्ताधर्ता हैं।
70 करोड़ रुपये के थ्री स्टार होटल वेस्ट इन का कर्ताधर्ता आरएस यादव का ड्राइवर है। 15 वाल्वो बसें, शॉपिंग मॉल, गोरखपुर में 12 करोड़ रुपये का होटल, दर्जनों फ्लैट हैं। इसके अलावा भी तमाम संपत्तियां हैं जिनकी गहराई से जांच होनी चाहिए।