Gyanvapi Case: ज्ञानवापी मस्जिद मामले में निगरानी याचिका पर तीन नवंबर को होगी सुनवाई
ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में पुरातात्विक सर्वेक्षण की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर आज सुनवाई नहीं हो सकी। जिला जज अवकाश पर थे जिस वजह से अगली तारीख 3 नवंबर की मिली है।
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जिला जज की अदालत में बुधवार को ज्ञानवापी परिसर में पुरातात्विक सर्वेक्षण के आदेश के क्षेत्राधिकार को लेकर दाखिल निगरानी याचिका पर सुनवाई टल गई। जिला जज के अवकाश पर रहने के कारण इस मामले में अब सुनवाई तीन नवंबर को होगी। इस मामले में पिछली तिथि पर अदालत में अंजुमन इंतजामिया की ओर से वाद मित्र की अर्जी पर आपत्ति दाखिल की जा चुकी है।
पिछली तारीख पर अदालत में वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी की ओर से वाराणसी कोर्ट में पिछले दिनों श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन व अन्य विग्रहों के संरक्षण प्रकरण में दिए गए आदेश की प्रमाणित प्रति कोर्ट में दाखिल की थी।
इसमें अंजुमन इंतजामिया की ओर से मस्जिद को सुन्नी वक्फ बोर्ड की संपत्ति मानते हुए कहा गया था कि वक्फ बोर्ड की संपत्ति होने के चलते स्थानीय सिविल कोर्ट को मामले को सुनने का क्षेत्राधिकार नहीं है, जिसे जिला जज ने खारिज कर दिया था और श्रृंगार गौरी मामला सुनवाई योग्य माना था। इसी के तहत यह भी निगरानी याचिका साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने की गुहार लगाई गई है।
इस पर निगरानीकर्ता अंजुमन इंतजामिया की ओर से आपत्ति प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा गया था, जिस पर पिछली तिथि को अदालत में अंजुमन की ओर से आपत्ति दाखिल की गई थी। आपत्ति में कहा गया है कि यह मुकदमा दूसरा है। ऐसे में श्रृंगार गौरी मामले के आदेश को साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
प्रकरण के अनुसार अंजुमन की ओर से जुलाई 2021 में निगरानी याचिका दाखिल की गई थी। कहा गया था कि ज्ञानवापी मस्जिद वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। उसकी सुनवाई का अधिकार लखनऊ वक्फ बोर्ड को है, सिविल न्यायालय को नहीं। इसके बावजूद अवर न्यायालय ने उनकी याचिका खारिज करते हुए पुरातात्विक सर्वेक्षण के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई जारी रखी और क्षेत्राधिकार के चुनौती संबंधी प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया था। जिसके बाद अंजुमन इंतजामिया ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ सत्र न्यायालय में निगरानी याचिका दाखिल की थी।