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सेहत: पांच साल तक के 20 बच्चों को नेत्र कैंसर, बिल्ली जैसी चमकती हैं जानलेवा बीमारी से ग्रस्त रोगियों की आंख

Thu, 09 Apr 2026 06:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा अभिषेक सेठ
अभिषेक सेठ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 09 Apr 2026 06:24 AM IST
सार

बच्चों का इलाज बीएचयू के क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में चल रहा है। 40 फीसदी बच्चों की कैंसर संक्रमित आंख निकालनी पड़ी है। 60 फीसदी की कीमोथेरेपी कराई जा रही है। जिन बच्चों को कैंसर हुआ है उनकी आंखें बिल्ली की तरह चमकती हैं।

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Health: 20 Children Under the Age of Five Diagnosed with Eye Cancer
demo - फोटो : Freepik.com

विस्तार

case-1

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भभुआ (बिहार) के 8 माह के बच्चे की दाहिनी आंख की पुतली हल्की रोशनी में बिल्ली की तरह चमकती थी। फोटो खींचते समय फ्लैश गन की वजह से आंख में लाल घेरे के बजाय सफेद धब्बा दिखाई देने लगा। बीएचयू में जांच के दौरान पता चला कि बच्चे की आंख में कैंसर है। ट्यूमर शुरुआती चरण (स्टेज-बी) में था। कीमो-रिडक्शन तकनीक का इस्तेमाल किया गया।

case- 2
गाजीपुर की 3 वर्षीय बच्ची तिरछा देख रही थी। माता-पिता ने इसे साधारण समझकर नजरअंदाज किया। धीरे-धीरे आंख में सूजन और लालपन बढ़ने लगा और उस आंख से कम दिखाई देने लगा। बीएचयू में जांच में सामने आया कि ट्यूमर बड़ा हो चुका था और ऑप्टिक नर्व (दृष्टि तंत्रिका) तक पहुंचने वाला था। संक्रमण को मस्तिष्क तक फैलने से रोकने के लिए डॉक्टरों को सर्जरी करनी पड़ी।
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case-3
वाराणसी के पिंडरा निवासी 14 माह के बच्चे की दोनों आंखों में असामान्य चमक और पुतलियों का फैलाव देखा गया। बच्चा खिलौनों पर फोकस नहीं कर पा रहा था। जांच में पता चला कि यह बाइलेटरल रेटिनोब्लास्टोमा है। दोनों आंखों में कैंसर। यह जेनेटिक म्यूटेशन के कारण हुआ था। बीएचयू के विशेषज्ञों ने सर्जरी और विशेष कीमोथेरेपी से एक आंख की रोशनी को बचा लिया। 
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एक महीने से पांच साल तक के 20 बच्चों की आंख में कैंसर हो गया। बच्चों का इलाज बीएचयू के क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में चल रहा है। 40 फीसदी बच्चों की कैंसर संक्रमित आंख निकालनी पड़ी है। 60 फीसदी की कीमोथेरेपी कराई जा रही है। जिन बच्चों को कैंसर हुआ है उनकी आंखें बिल्ली की तरह चमकती हैं।

ज्यादातर बच्चे पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों और बिहार से आए हैं। इन सबको रेटिनोब्लास्टोमा नामक जानलेवा आंख का कैंसर हुआ है। मार्च में ही तीन बच्चे इलाज कराने पहुंचे हैं। बीएचयू के क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के विभागाध्यक्ष डॉ. आरपी मौर्य ने बताया कि इन बच्चों में कैंसर की गांठें आंखों के भीतर तेजी से फैली हैं।

कुछ मामलों में तो कैंसर ऑप्टिक नर्व के जरिये मस्तिष्क तक पहुंचने वाला था। बच्चों के आंखों की कीमोथेरेपी कराई गई। साथ ही माइक्रो सर्जरी के जरिये ट्यूमर निकाला गया। सर्जरी के दौरान सबसे बड़ी चुनौती छोटे बच्चों को एनेस्थीसिया देने और नाजुक नसों को बचाने में आई। जिन बच्चों की आंख निकाली गई है उन्हें पत्थर की आंख लगाई गई है।

क्या है रेटिनोब्लास्टोमा
चिकित्सकों के मुताबिक, रेटिनोब्लास्टोमा मुख्य रूप से छोटे बच्चों में होने वाला एक दुर्लभ प्रकार का नेत्र कैंसर है। जब आंख के पिछले हिस्से, यानी रेटिना की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, तब इस प्रकार की बीमारी विकसित होती है। इसमें 40 प्रतिशत मामलों में यह बीमारी परिवार के जीन्स के कारण होती है। यदि माता-पिता में से किसी को भी कभी कैंसर हुआ हो, तो यह बच्चे को भी प्रभावित कर सकता है।


जानलेवा है यह बीमारी
डॉ. आरपी मौर्य ने बताया कि जब रेटिना की कोशिकाएं परिपक्व होने के बजाय असामान्य रूप से विभाजित होने लगती हैं, तो वे एक ट्यूमर (गांठ) का रूप ले लेती हैं। ट्यूमर आंख के भीतर ही बढ़ता रहता है। यदि इलाज न मिले, तो यह ऑप्टिक नर्व (दृष्टि तंत्रिका) के रास्ते मस्तिष्क तक पहुंच सकता है। यह शरीर के अन्य हिस्सों, जैसे हड्डियों या लिम्फ नोड्स, तक भी फैल सकता है, जो जानलेवा साबित होता है। इसका शुरुआती दौर में इलाज हो जाए, तो इसे सर्जरी के साथ खत्म किया जा सकता है।

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