वाराणसी का हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज: एलएलबी में दाखिले के लिए होती है मारामारी, पूर्व प्रधानमंत्री भी थे पुरातन छात्र
हरिश्चंद्र महाविद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर में अभी लगभग ढाई हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं। हर साल एलएलबी और बीकॉम में दाखिले के लिए छात्रों का दबाव ज्यादा रहता है। हालत यह है कि एलएलबी की एक सीट के लिए आठ से नौ आवेदक होते हैं।
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वाराणसी के हरिश्चंद्र महाविद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर में दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। महाविद्यालय ने सात जून से प्रवेश के लिए आवेदन ऑनलाइन कर दिए हैं। हालांकि कोरोना संक्रमण के कारण आवेदन की रफ्तार अभी थोड़ी सुस्त है। संभावना है कि बोर्ड परीक्षा परिणाम आने के बाद आवेदकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। महाविद्यालय में एलएलबी और बीकॉम में दाखिले के लिए सबसे अधिक मारामारी होती है।
हरिश्चंद्र महाविद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर में अभी लगभग ढाई हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं। हर साल एलएलबी और बीकॉम में दाखिले के लिए छात्रों का दबाव ज्यादा रहता है। हालत यह है कि एलएलबी की एक सीट के लिए आठ से नौ आवेदक होते हैं। वहीं बीकॉम में एक सीट पर पांच से छह आवेदकों का दावा होता है।
एलएलबी की 320 सीटों के लिए पिछले साल तीन हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। वहीं बीकॉम की 480 सीटों के लिए आवेदकों की संख्या दो हजार से ज्यादा थी। कोरोना संक्रमण के कारण महाविद्यालय ने अभी तक आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि की घोषणा नहीं की है। छात्र महाविद्यालय की वेबसाइट www.hcpg.com पर आवेदन कर सकते हैं।
किसी तरह की सहायता के लिए हेल्प डेस्क 7268079785 पर संपर्क किया जा सकता है। हरिश्चंद्र महाविद्यालय के पुरातन छात्रों में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री, बिग्रेडियर उस्मान, राज्यपाल त्रिभुवन नारायण सिंह, नेपाल नरेश गिरिराज कोईराला, आईएएस गोविंद जायसवाल, मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी, नागपुर विश्वविद्यालय में निदेशक डॉ. राजेश सिंह रहे हैं।
भारतेंदु हरिश्चंद्र ने की थी स्थापना
भारतेंदु हरिश्चंद्र ने मैदागिन में 1866 में पांच विद्यार्थियों से इस संस्था की शुरुआत की थी। 1910 में इस संस्था में हाईस्कूल की पढ़ाई शुरू हुई और इंटरमीडिएट की कक्षाओं का संचालन 1939 से आरंभ हुआ। चार अक्तूबर 1951 में कला और वाणिज्य के स्नातक पाठ्यक्रम यहां शुरू हुए। इस दौरान यह कॉलेज काशी हिंदू विश्वविद्यालय से संबद्ध था, इसके बाद गोरखपुर विश्वविद्यालय, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय और वर्तमान में यह 2009 से महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से संबद्ध है। 1958 में इसका नाम हरिश्चंद्र महाविद्यालय रखा गया और यहां पर लॉ की पढ़ाई भी शुरू हुई। इसके बाद इसको काशी विद्यापीठ से संबद्ध कर दिया गया।
जल्द घोषित होगी प्रवेश परीक्षा की तारीखें
कोर्स और सीटों की संख्या
बीएससी गणित 267
बीएससी बायो 200
बीकॉम 480
एलएलबी 320
- स्नातकोत्तर
- एमए हिंदी 80
- एमए भूगोल 30
- एमए राजनीति विज्ञान 60
- एमए अंग्रेजी 60
- एमए मनोविज्ञान 40
- एमएससी बॉटनी 30
- जूलॉजी 30
- गणित 30
- भौतिक विज्ञान 30
- रसायन विज्ञान 30
- एमकॉम 80