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वाराणसी का हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज: एलएलबी में दाखिले के लिए होती है मारामारी, पूर्व प्रधानमंत्री भी थे पुरातन छात्र

Mon, 28 Jun 2021 11:45 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 28 Jun 2021 11:45 AM IST
सार

हरिश्चंद्र महाविद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर में अभी लगभग ढाई हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं। हर साल एलएलबी और बीकॉम में दाखिले के लिए छात्रों का दबाव ज्यादा रहता है। हालत यह है कि एलएलबी की एक सीट के लिए आठ से नौ आवेदक होते हैं। 

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Harishchandra PG College of Varanasi There is  fight for admission in LLB former PM lal bahadur shastri was also an old student
हरिश्चंद्र महाविद्यालय - फोटो : फाइल

विस्तार

वाराणसी के  हरिश्चंद्र महाविद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर में दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। महाविद्यालय ने सात जून से प्रवेश के लिए आवेदन ऑनलाइन कर दिए हैं। हालांकि कोरोना संक्रमण के कारण आवेदन की रफ्तार अभी थोड़ी सुस्त है। संभावना है कि बोर्ड परीक्षा परिणाम आने के बाद आवेदकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। महाविद्यालय में एलएलबी और बीकॉम में दाखिले के लिए सबसे अधिक मारामारी होती है।

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हरिश्चंद्र महाविद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर में अभी लगभग ढाई हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं। हर साल एलएलबी और बीकॉम में दाखिले के लिए छात्रों का दबाव ज्यादा रहता है। हालत यह है कि एलएलबी की एक सीट के लिए आठ से नौ आवेदक होते हैं। वहीं बीकॉम में एक सीट पर पांच से छह आवेदकों का दावा होता है।
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एलएलबी की 320 सीटों के लिए पिछले साल तीन हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। वहीं बीकॉम की 480 सीटों के लिए आवेदकों की संख्या दो हजार से ज्यादा थी। कोरोना संक्रमण के कारण महाविद्यालय ने अभी तक आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि की घोषणा नहीं की है। छात्र महाविद्यालय की वेबसाइट www.hcpg.com पर आवेदन कर सकते हैं।
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किसी तरह की सहायता के लिए हेल्प डेस्क 7268079785 पर संपर्क किया जा सकता है।  हरिश्चंद्र महाविद्यालय के पुरातन छात्रों में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री, बिग्रेडियर उस्मान, राज्यपाल त्रिभुवन नारायण सिंह, नेपाल नरेश गिरिराज कोईराला, आईएएस गोविंद जायसवाल, मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी, नागपुर विश्वविद्यालय में निदेशक डॉ. राजेश सिंह रहे हैं। 

भारतेंदु हरिश्चंद्र ने की थी स्थापना

भारतेंदु हरिश्चंद्र ने मैदागिन में 1866 में पांच विद्यार्थियों से इस संस्था की शुरुआत की थी। 1910 में इस संस्था में हाईस्कूल की पढ़ाई शुरू हुई और इंटरमीडिएट की कक्षाओं का संचालन 1939 से आरंभ हुआ। चार अक्तूबर 1951 में कला और वाणिज्य के स्नातक पाठ्यक्रम यहां शुरू हुए। इस दौरान यह कॉलेज काशी हिंदू विश्वविद्यालय से संबद्ध था, इसके बाद गोरखपुर विश्वविद्यालय, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय और वर्तमान में यह 2009 से महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से संबद्ध है। 1958 में इसका नाम हरिश्चंद्र महाविद्यालय रखा गया और यहां पर लॉ की पढ़ाई भी शुरू हुई। इसके बाद इसको काशी विद्यापीठ से संबद्ध कर दिया गया। 

जल्द घोषित होगी प्रवेश परीक्षा की तारीखें

महाविद्यालय में दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। विश्वविद्यालय से सत्र के संदर्भ में निर्देश प्राप्त होते ही अंतिम तिथि की घोषणा की जाएगी। इसके साथ ही प्रवेश परीक्षाओं की तारीख भी घोषित होगी। कोरोना संक्रमण को देखते हुए सभी सुरक्षा मानकों के साथ प्रवेश परीक्षा का आयोजन कराया जाएगा। - डॉ. ज्योेत्सना चतुर्वेदी, प्राचार्य

कोर्स और सीटों की संख्या

बीए    700
बीएससी गणित    267
बीएससी बायो    200
बीकॉम    480
एलएलबी    320
 
  • स्नातकोत्तर
  1. एमए हिंदी    80
  2. एमए भूगोल    30
  3. एमए राजनीति विज्ञान    60
  4. एमए अंग्रेजी    60
  5. एमए मनोविज्ञान    40
  6. एमएससी बॉटनी    30
  7. जूलॉजी    30
  8. गणित    30
  9. भौतिक विज्ञान    30
  10. रसायन विज्ञान    30
  11. एमकॉम    80
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