काशी के हस्तशिल्पियों को सौगात, 2.8 करोड़ की नई परियोजना से होंगे और हुनरमंद
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कोरोना काल में मुश्किल झेल रहे काशी के हस्तशिल्पियों को केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय ने सोमवार को बड़ी सौगात दी है। मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल की पहल पर तैयार इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट एंड प्रमोशन आफ हैंडीक्राफ्ट ऑफ वाराणसी के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
दो करोड़ 80 लाख रुपये की इस परियोजना से बनारस एवं आसपास के क्षेत्र के लकड़ी खिलौना, पत्थर, धातु पर चित्रकारी, गुलाबी मीनाकारी, ब्लैक क्रोकरी, जुट वॉल हैंगिंग, पंजा दरी एवं ग्लास बीड्स से संबंधित शिल्पी एवं कारीगर लाभांवित होंगे। इस परियोजना की मानिटरिंग कमिश्नर दीपक अग्रवाल करेंगे।
दरअसल, कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने लॉकडाउन के दौरान बनारस के हस्तशिल्पियों की बेहतरी और विकास के लिए इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट एंड प्रमोशन आफ हैंडीक्राफ्ट ऑफ वाराणसी नाम से एक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। सोमवार को वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त व हस्तशिल्प के चेयरमैन रवि कपूर की अध्यक्षता में हुई वर्चुअल बैठक में इस परियोजना को हरी झंडी दी गई।
बैठक के दौरान चेयरमैन रवि कपूर ने दशहरा के तत्काल बाद इस कार्यक्रम को शुरू किए जाने का निर्देश दिया। कार्यक्रम की गुणवत्ता एवं समयपूर्ण तरीके से संपादित करने के लिए संयुक्त आयुक्त उद्योग उमेश कुमार सिंह को नोडल अधिकारी नामित किया है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के दौरान लॉकडाउन के कारण हस्तशिल्प उद्योग में आये मंदी से उबरने में यह परियोजना बहुत कारगर होगा।
दो हजार से ज्यादा हस्तशिल्पि होंगे प्रशिक्षित
कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने बताया कि परियोजना में दो हजार हस्तशिल्पियों को आधुनिक टूलकिट्स उपलब्ध कराया जाएगा। 1200 शिल्पियों को विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा। दो-दो माह का डिजाइन एंड टेक्निकल अपग्रेडेशन, ट्रेनिंग इन क्राफ्ट स्किल अपग्रेडेशन, पांच दिवसीय सॉफ्ट स्किल अपग्रेडेशन वर्कशॉप आयोजित किया जाएगा।
इसके अलावा हस्तशिल्पियों के प्रोडक्ट के फोटोग्राफ के द्वारा कैटलॉग तैयार कर उसका प्रचार प्रसार भी कराया जाएगा। कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने बताया कि परियोजना की संपूर्ण अवधि 6 माह है।