वाराणसी में मच्छरों का आतंक: जब तक दोबारा कराई जाती है फॉगिंग, दोगुने हो जाते हैं मच्छर
वाराणसी जिले में मच्छरों का आतंक जारी है। जिले में रोस्टरवार फॉगिंग का रूट प्लान ही दोगुने मच्छर पैदा कर रहा है। रोस्टरवार प्लान के तहत छह से आठ दिन बाद एक रूट का नंबर आता है। तब तक मच्छर दोगुने हो जाते हैं।
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विस्तार
वाराणसी शहर के 100 वार्डों के लिए नगर निगम के पास 108 फॉगिंग मशीनें हैं। इसके अलावा बजट भी 2 से बढ़ाकर 8 लाख किया गया है। बावजूद मच्छरों का आतंक है। रोस्टरवार फॉगिंग का रूट प्लान बनाया गया है। छह से आठ दिन बाद एक रूट का नंबर आता है। इसके चलते जितने मच्छर पहली बार की फॉगिंग से मरते नहीं हैं उससे दोगुना दूसरी फॉगिंग के समय हो जाते हैं।
नगर निगम की ओर से हर वार्ड के लिए एक फॉगिंग मशीन की व्यवस्था के बाद भी मच्छरों का प्रकोप कम नहीं हो रहा है। बारिश के बाद इधर-उधर पानी भरा हुआ है। इससे मच्छरों के बढ़ने के साथ ही डेंगू मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा सता रहा है। कुछ साल पहले नगर निगम ने साइकिल खरीदी थी।
जिन पर फॉगिंग मशीनें लगाकर गलियों में भेजा जाता था, लेकिन कई साइकिलें लापता गायब हो गईं। बड़ी गाड़ियों पर जाने वाली मशीनें फिर वीआईपी इलाकों तक ही घूम कर वापस स्टोर रूम में पहुंच जा रही हैं। पिछले दिनों नगर निगम से 70 हॉटस्पॉट चिह्नित किए थे। जहां पार्षदों की मदद से फॉगिंग कराई जा रही है। हर वार्ड के लिए 2 लीटर डीजल और 2 लीटर पेट्रोल की व्यवस्था की गई है।
टोल फ्री नंबर जारी, जोनल अधिकारियों को जिम्मेदारी
नगर निगम की ओर से टोल फ्री नंबर जारी किया गया है। इसका नंबर 1533 है। इस पर शिकायतें दर्ज की जाती हैं। इसके बाद क्षेत्र में मशीन भेजकर फॉगिंग कराई जा रही है। नई व्यवस्था के तहत नगर आयुक्त अक्षत वर्मा ने जोनल अधिकारियों को फॉगिंग की जिम्मेदारी दी है ताकि हर वार्ड की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सके। बावजूद मातहत ध्यान नहीं दे रहे हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
मच्छरों के प्रकोप से बचाने के लिए मोहल्ले वार रोस्टर बनाया गया है। हर मोहल्ले में बारी बारी से फॉगिंग कराई जा रही है। इसके अलावा जो भी शिकायतें आ रही हैं, उनका समाधान कराया जा रहा है। -संदीप श्रीवास्तव, पीआरओ नगर निगम