ज्ञानवापी प्रकरण: अधिवक्ताओं के प्रदर्शन के चलते नहीं हुई इस मामले में सुनवाई, मिली दूसरी तारीख
अधिवक्ताओं के हड़ताल पर रहने के कारण ज्ञानवापी मामले में जिला जज ओमप्रकाश त्रिपाठी की अदालत में उतर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड व अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से दाखिल निगरानी याचिका पर शनिवार को सुनवाई टल गई।
अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) के निर्णय के खिलाफ जिला जज की अदालत में निगरानी याचिका दायर किया है। जिला जज ने निगरानी याचिका पर सुनवाई के लिए आठ मार्च की तिथि नियत की है।
गौरतलब है कि वर्ष 1991 में प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वरनाथ तथा अन्य के पक्षकारों ने ज्ञानवापी में नए मंदिर के निर्माण तथा हिंदुओं को पूजापाठ करने के अधिकार देने को लेकर मुकदमा दायर किया था।
इस मामले में वादमित्र पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने ज्ञानवापी परिसर तथा कथित विवादित स्थल का भौतिक एवं पुरातात्विक दृष्टि से भारतीय सर्वेक्षण विभाग से रडार तकनीक से सर्वेक्षण कराने की अदालत से अपील की है।
अधिवक्ताओं की आत्महत्या के विरोध में सेंट्रल व बनारस बार एसोसिएशन का प्रदर्शन
यूपी बार काउंसिलके आह्वान पर प्रदेश में दो अधिवक्ताओं द्वारा आत्महत्या के विरोध में सेंट्रल और बनारस बार एसोसिएशन ने शनिवार को न्यायिक कार्य से विरत रहकर डीएम पोर्टिको में प्रदर्शन के साथ सभा की। महोबा में अधिबक्ता मुकेश पाठक और मेरठ में अधिबक्ता ओंकार तोमर द्वारा माफियाओं और विधायक के उत्पीड़न से आजिज आकर आत्महत्या कर ली थी।
इसी घटना के विरोध में यूपी बार काउंसिल ने पूरे प्रदेश में शनिवार को न्यायिक कार्य से विरत रहकर विरोध दिवस मनाने का आह्वान किया। अधिवक्ताओं की मांग थी कि मृतक परिवार को एक करोड़ का मुआवजा और आश्रित को नौकरी दी जाए। साथ ही घटना में जिम्मेदार लोगों को सख्त सजा मिले।