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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Gyanvapi Masjid Case Varanasi Court Verdict Hindu side seeks ASI survey if ruling comes in their favour

Gyanvapi Mosque Case: हिंदू पक्ष के हक में आया फैसला, वकील बोले- अब करेंगे ज्ञानावापी के ASI सर्वे की मांग

Mon, 12 Sep 2022 03:11 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 12 Sep 2022 03:11 PM IST
सार

ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी प्रकरण में हिंदू पक्ष के हक में फैसला आया है। महिला याचिकर्ताओं के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि अब हम एएसआई सर्वे और शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की मांग करेंगे। 

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Gyanvapi Masjid Case Varanasi Court Verdict  Hindu side seeks ASI survey  if ruling comes in their favour
ज्ञानवापी परिसर से निकलते अधिवक्ता हरिशंकर जैन और विष्णु जैन (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बहुचर्चित ज्ञानवापी मस्जिद और श्रृंगार गौरी प्रकरण में पांच हिंदू महिलाओं की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर मुकदमा अदालत द्वारा सुनने योग्य है या नहीं इस पर फैसला आज आ गया। महिला याचिकर्ताओं के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि उम्मीद के मुताबिक फैसला हमारे पक्ष में आया है। उन्होंने कहा कि अब हम एएसआई सर्वे और शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की मांग करेंगे।

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सुप्रीम कोर्ट के विष्णु शंकर जैन ने कहा कि आज का दिन काफी महत्वपूर्ण है। कोर्ट में मस्जिद कमेटी की तरफ से 1991 के प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट का हवाला दिया गया था। हम लोगों ने बहुत वैज्ञानिक तौर पर अपने तर्क कोर्ट में रखे थे। हमारा पक्ष बहुत मजबूत था। अब हमलोग ज्ञानवापी के एएसआई सर्वे और शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराने की मांग करेंगे।  
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18 अगस्त 2021 को श्रृंगार गौरी नियमित दर्शन पूजन का मामला राखी सिंह और अन्य चार महिलाओं द्वारा वाराणसी के अदालत में दायर किया गया था। इसके खिलाफ मुस्लिम पक्ष के अंजुमन इंतजाम या कमेटी के वकील सुप्रीम कोर्ट तक गए थे। तत्कालीन सिविल जज सीनियर डिविजन रवि कुमार दिवाकर ने कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर ज्ञानवापी का सर्वे कराने का आदेश दिया था।  

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Gyanvapi Masjid Case Varanasi Court Verdict  Hindu side seeks ASI survey  if ruling comes in their favour
अदालत के बाहर हिंदू पक्ष के अधिवक्ता और पैरोकार - फोटो : अमर उजाला

कमीशन की कार्यवाही के खिलाफ अंजुमन इंतेजामिया कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी और मामले की पोषणीयता पर सवाल उठाए थे।  16 मई 2022 को सर्वे की कार्यवाही के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 23 मई 2022 से इस मामले में जिला कोर्ट में सुनवाई चल रही है। जून के आखिरी हफ्ते से लगातार इस मामले पर हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष के वकीलों द्वारा दलीलें पेश की जा रही थी। सोमवार को अदालत ने हिंदू पक्ष के हक में फैसला सुनाया। 

हिंदू पक्ष की दलीलें

Gyanvapi Masjid Case Varanasi Court Verdict  Hindu side seeks ASI survey  if ruling comes in their favour
अदालत के बाहर हिंदू पक्ष के अधिवक्ता और पैरोकार - फोटो : अमर उजाला

जिला जज की अदालत में चार महिला वादियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अधिवक्ता हरिशंकर जैन और विष्णु जैन पक्ष रखा। इसमें उन्होंने 26 फरवरी 1944 के गजट को फर्जी करार दिया और दलील दी थी कि यह धौरहरा बिंदु माधव मंदिर के लिए था। बादशाह आलमगीर ने हिंदू मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई।
वादिनी राखी सिंह के अधिवक्ता मानबहादुर सिंह की दलील थी कि मंदिर के स्ट्रक्चर पर मस्जिद का ढांचा खड़ा कर दिया गया। यह विशेष उपासना स्थल एक्ट से बाधित नहीं है। औरंगजेब आतताई था और मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाया, लेकिन मस्जिद के पीछे मंदिर का दीवार छोड़ दी। वक्फ मामले में दीन मोहम्मद के केस का भी हवाला दिया गया है।

मुस्लिम पक्ष की दलीलें

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मई-जून में ज्ञानवापी मामला रहा था सुर्खियों में - फोटो : अमर उजाला

अंजुमन इंतजामिया मसाजिद के अधिवक्ता शमीम अहमद ने काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट एक्ट और विशेष उपासना स्थल कानून का हवाला दिया था। इसमें उन्होंने 1944 के गजट और 1936 के दीन मोहम्मद केस के निर्णय का हवाला दिया। इसमें उन्होंने दावा किया कि यह मस्जिद औरंगजेब के जमाने के पहले से है। विशेष उपासना स्थल कानून 1991 का जिक्र कर कहा गया है कि अदालत में आजादी के बाद जो भी धर्म स्थल जिस रूप में होगा, उसी रूप में रहेगा। इसमें मुस्लिम पक्ष ने मामले को सुनवाई योग्य नहीं मानने के लिए दलील दी है।

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