Gyanvapi: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मुकदमे में आदेश सुरक्षित, शिवलिंग की पूजा की मांगी है अनुमति
ज्ञानवापी प्रकरण को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की तरफ से दाखिल वाद में सोमवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने वादी पक्ष की दलीलें सुनने के बाद आदेश के लिए पत्रावली को सुरक्षित रख लिया है।
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सिविल जज सीनियर डिवीजन अश्वनी कुमार की अदालत में ज्ञानवापी प्रकरण को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की तरफ से दाखिल वाद में सोमवार को सुनवाई हुई। अदालत ने वादी पक्ष की दलीलें सुनने के बाद आदेश के लिए पत्रावली को सुरक्षित रख लिया है।
दाखिल वाद के वादी संख्या दो राम सजीवन शुक्ला की तरफ से आवेदन देकर कहा गया है कि ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग की पूजा, श्रृंगार और राग-भोग से संबंधित वाद इस कोर्ट में दाखिल है। कोर्ट ने उसे स्वीकार कर लिया है। कोर्ट भी भगवान को नाबालिग ही मानती है। उसकी देखरेख करने वाले अन्य लोग होते हैं। देवता नाबालिग हैं तो उनको एक दिन भी भूखा रखना सनातन धर्म और विधि के अनुकूूल नहीं है। जिसके चलते यह वाद तत्काल सुनवाई योग्य है।
शिवलिंग की पूजा करने की अनुमति दिए जाने का अनुरोध
कोर्ट में हाजिर विपक्षी अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी दूसरा पक्ष है, जो हम सनातनियों के देवता को स्वीकार नहीं करते हैं। जिसके चलते वह लंबी तारीख लेना चाहते है और अदालत में बिना नोटिस के हाजिर हुए हैं। ऐसे में हमारा पक्ष सुनने के बाद ही अन्य प्रार्थना पत्र की सुनवाई किया जाना उचित होगा। ताकि, प्रकट शिवलिंग का यथोचित सनातनी हिंदू परंपरा के मुताबिक पूजा-पाठ और राग-भोग से भगवान वंचित न हो सके।
अदालत से विपक्षी के आपत्ति दाखिल करने तक मौजूदा शिवलिंग की पूजा करने की अनुमति दिए जाने का अनुरोध किया गया है। ताकि भगवान को एक दिन भी भूखा न रखा जा सके। अदालत में यह आवेदन बीते वर्ष पांच अगस्त को दिया गया था। वादी के अधिवक्ता रमेश उपाध्याय की ओर से कहा गया कि पांच माह से अधिक अवधि आपत्ति दाखिल करने के लिए बीत गई है।
फिर भी विपक्षी ने आवेदन देकर आपत्ति हेतु समय दिए जाने की कोर्ट से मांग की है, जो विधि के खिलाफ है। ऐसे इस आवेदन का निस्तारण किया जाना आवश्यक है। अदालत ने वादी पक्ष की दलीलें सुनने के बाद पत्रावली आदेश के लिए सुरक्षित कर ली है।