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Gyanvapi Case: शिवलिंग की पूजा-पाठ की मांग पर सुनवाई अब 6 अक्तूबर को, आपत्ति के लिए अंजुमन ने मांगा समय

Thu, 15 Sep 2022 04:50 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Thu, 15 Sep 2022 04:50 PM IST
सार

ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की आकृति की पूजा- राग, भोग आरती करने को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की तरफ से दाखिल वाद पर गुरुवार को सुनवाई हुई। 

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Gyanvapi Case Hearing on worship of Shivling found in Gyanvapi masjid campus today
वाराणसी कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सिविल जज सीनियर डिविजन कुमुद लता त्रिपाठी की अदालत में ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की आकृति की पूजा, पाठ, राग भोग, आरती करने को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से दाखिल अर्जी पर गुरुवार को सुनवाई हुई। अदालत ने इस मामले में विपक्षी डीएम और पुलिस कमिश्नर को भेजी गई रजिस्ट्री को पर्याप्त तामिला माना। 

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वहीं दूसरी तरफ एक अन्य पक्षकार अंजुमन इंतजामिया मसाजिद ने प्रार्थना पत्र दिया और कहा कि ज्ञानवापी मामले से संबंधित कई मुकदमे चल रहे हैं। ऐसे में आपत्ति दाखिल करने के लिए समय दिए जाने का अनुरोध किया। अदालत ने इन परिस्थितियों में सुनवाई की अगली तारीख 6 अक्तूबर नियत कर दी। 
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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य रहे और अब शंकराचार्य का पद संभाल रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद व रामसजीवन ने वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार त्रिपाठी, रमेश उपाध्याय, चंद्रशेखर सेठ के माध्यम से अदालत में वाद दाखिल किया है।
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पढ़ेंः  ज्ञानवापी में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक की मांग संबंधी वाद पर प्रतिदिन होगी सुनवाई

Gyanvapi Case Hearing on worship of Shivling found in Gyanvapi masjid campus today
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद - फोटो : अमर उजाला

इसमें कहा गया है कि श्रृंगार गौरी प्रकरण में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के आदेश पर हुई कोर्ट कमीशन की कार्यवाही में मिले शिवलिंग की आकृति का विधिवत राग भोग, पूजन व आरती जिला प्रशासन की ओर से करना चाहिए। इसके लिए किसी सनातनी धर्म से जुड़े व्यक्ति को नियुक्त किया जाए।

उनका कहना है कि कानूनन देवता की परिस्थिति एक जीवित बच्चे के समान होती है, जिसे अन्न-जल आदि नहीं देना संविधान की धारा अनुच्छेद-21 के तहत दैहिक स्वतंत्रता के मूल अधिकार का उल्लंघन है। ऐसे में पूजा-पाठ की अनुमति दी जाए।

अदालत से निगरानी याचिका खारिज करने का अनुरोध

जिला जज की अदालत में ज्ञानवापी स्थित श्रृंगा गौरी मामले को सुनवाई योग्य करार दिए जाने के बाद बृहस्पतिवार को स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वर के मूल वाद में पुरातात्विक सर्वेक्षण के खिलाफ दाखिल निगरानी याचिका को खारिज करने की मांग की गई। जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की कोर्ट में विश्वनाथ मंदिर के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने अंजुमन की ओर से पुरातात्विक सर्वेक्षण के आदेश के खिलाफ दाखिल निगरानी याचिका को रद्द करने का आवेदन दिया है। इस मामले में 10 अक्तूबर की तारीख नियत की गई है।

 

वाद मित्र ने ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी मामले में 12 सितंबर को जिला अदालत के आदेश की प्रमाण प्रति दाखिल करते हुए कहा कि वक्फ संपत्ति के मामले को न्यायालय ने खारिज कर दिया था। इसी के तहत यह निगरानी याचिका भी खारिज किये जाने योग्य है। इस पर निगरानीकर्ता अंजुमन इंतजामिया की ओर से आपत्ति प्रस्तुत करने के लिए समय की मांग की गई। जिस पर अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 10 अक्तूबर की तिथि नियत कर दी।

बता दें की निगरानी कर्ता अंजुमन इंतजामिया मसाजिद की ओर से जुलाई 2021 में निगरानी याचिका दाखिल की गई थी। कहा गया था कि ज्ञानवापी मस्जिद वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। उसकी सुनवाई का अधिकार लखनऊ वक्फ बोर्ड को है, सिविल न्यायालय को नहीं। संवाद

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