Gyanvapi Case: ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले में हिंदू पक्ष की बहस पूरी, मुस्लिम पक्ष की जवाबी बहस 25 को
वाराणसी के ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी प्रकरण की सुनवाई जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की कोर्ट में हो रही है। पांचों वादिनीगण और डीएम, पुलिस आयुक्त व मुख्य सचिव प्रदेश शाशन की तरफ से बहस गुरुवार को पूरी कर ली गई।
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ज्ञानवापी स्थित श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन के लिए दाखिल वाद सुनवाई योग्य है या नहीं इसरपर जिला जज डॉ अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में गुरुवार को सुनवाई पूरी कर ली गई। इस मामले में न्यायालय ने अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी को जवाबी बहस के लिए 25 जुलाई की तारीख नियत की है। इस दौरान डीजीसी सिविल महेंद्र प्रसाद पांडेय ने दलील दी कि अदालत की ओर से पहले जारी सभी आदेश का पालन कराया गया है। आगे भी न्यायालय की ओर से जो आदेश होगा उसके अनुपालन के लिए शासन व प्रशासन प्रतिबद्ध है।
गुरुवार को सुनवाई शुरू होते ही वादिनी राखी सिंह की तरफ से अधिवक्ता मानबहादुर सिंह ने जारी रखी और कहा कि यह वाद सिर्फ दर्शन पूजन राग भोग के लिए दाखिल किया गया है। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी का ऑर्डर 7 रूल 11 का आवेदन सुनवाई योग्य है ही नहीं।
दर्शन पूजन पूजा पाठ हमारा सिविल अधिकार
विशेष धर्म उपासना स्थल 1991 में यह कहा गया है कि आजादी के समय जो धर्म स्थलों की स्थिति रही वही रहेगी। यह वाद इससे इतर है इसमें सिर्फ दर्शन पूजन की बात कही गई है, स्वरूप बदलने की बात नही की गई है। इसके बावजूद पहले हिंदू मुस्लिम, फिर मंदिर मस्जिद का विवाद बताकर तूल दिया गया।
पढ़ेंः हिंदू पक्ष की दलील- अवैध निर्माण को मस्जिद नहीं कहते, जबरन हिंदू-मुस्लिम विवाद से जोड़ रहे
दर्शन पूजन पूजा पाठ हमारा सिविल अधिकार है, इसे रोका नहीं जाना चाहिए। अदालत में बहस के दौरान श्रृंगार गौरी कहां स्थित है इसे कोर्ट में स्पष्ट कर बताया गया कि विवादित मस्जिद के पीछे है जहां अवैध निर्माण कर मस्जिद बनाई गई है। दलील में कहा कि पूजा पाठ पर लगी रोक को हटाई जाय और सिविल अधिकार के तहत पूजा पाठ करने दिए जाने की याचना की गई।
वादिनी पक्ष की दलील समाप्त होने पर काशी विश्वनाथ मंदिर के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी और गिरीश उपाध्याय ने इस वाद में पक्षकार बनाये जाने के आवेदन पर अपना पक्ष रखना चाहा। हालांकि जिला जज ने यह कहते हुए इजाजत नहीं दी कि सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर ऑर्डर 7 रूल 11 के आवेदन पर निर्णय देना है, पक्षकार बनने के मुद्दे पर बाद में सुनवाई होगी। इसके बाद डीएम, पुलिस आयुक्त और प्रदेश शासन के मुख्य सचिव की तरफ से डीजीसी सिविल महेंद्र प्रसाद पाण्डेय ने दलील रखी।
ज्ञानवापी में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक की मांग पर सुनवाई 16 अगस्त को
सिविल जज फास्ट ट्रैक कोर्ट महेंद्र कुमार पांडेय की अदालत में आदि विश्वेश्वर आदि की तरफ दाखिल वाद में अन्जुमन इन्तजामिया मसाजिद कमेटी को आपत्ति दर्ज कराने के लिए समय मांगे जाने पर अदालत ने 16 अगस्त की तिथि नियत कर दी। इस अदालत में विश्व वैदिक सनातन संघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह विसेन की पत्नी किरन सिंह के अधिवक्ता मानबहादुर सिंह ने वाद दाखिल कर परिसर में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक, सर्वे में मिले कथित शिवलिंग के पूजा पाठ के साथ परिसर हिंदुओ को सौंपे जाने की मांग की है।