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Gyanvapi Case: हिंदू पक्ष की दलील- अवैध निर्माण को मस्जिद नहीं कहते, जबरन हिंदू-मुस्लिम विवाद से जोड़ रहे

Mon, 18 Jul 2022 06:31 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 18 Jul 2022 06:31 PM IST
सार

वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर स्थित मां श्रृंगार गौरी प्रकरण की सुनवाई आज जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की कोर्ट में हुई। वादी राखी सिंह की तरफ से अधिवक्ता मानबहादुर सिंह और शिवम गौड़ ने कोर्ट में दलील पेश की। 

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Gyanvapi masjid Shringar Gauri Case Hearing today in varanasi District Judge court Hindu side will continue argue
अदालत के बाहर हिंदू पक्ष के अधिवक्ता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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ज्ञानवापी परिसर स्थित शृंगार गौरी के नियमित दर्शन को लेकर दाखिल वाद सुनवाई योग्य है या नहीं पर सोमवार को जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में वादिनी राखी सिंह के अधिवक्ताओं ने दलीलें रखीं। अधिवक्ताओं ने कहा कि अंजुमन इंतजामिया ने हमारी प्रॉपर्टी पर अवैध निर्माण कर गुंबद बना लिया।

हर अवैध निर्माण को मस्जिद नहीं कहा जा सकता। यह पवित्र नाम होता है। न्यायालय ने बहस जारी रखने की अनुमति देते हुए सुनवाई की अगली तिथि 19 जुलाई नियत कर दी। अधिवक्ता मानबहादुर सिंह ने कहा कि हम राज्य सरकार के आदेश से पीड़ित हैं। पहले से चली आ रही पूजा-पाठ को वर्ष 1993 में तत्कालीन राज्य सरकार ने रोक दिया था।
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उन्होंने अदालत से कहा कि पूजा-पाठ में व्यवधान न किया जाय। हमारी याचना है कि देव विग्रहों, शृंगार गौरी के पूजा पाठ से न रोका जाए। यह वाद अगस्त 2021 में दाखिल है और 90 दिन के अंदर विपक्षियों को जवाबदेही दाखिल करनी चाहिए। मगर उनकी ओर से न यह दाखिल हुआ और न ही कोर्ट से समय मांगा गया।
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ऐसे में कोर्ट से निर्णय देने की गुजारिश की। उन्होंने कहा कि दर्शन की मांग को हिंदू-मुस्लिम विवाद कहकर इस मुद्दे का गला घोंटा जा रहा है। धार्मिक आस्था का यह मामला सिविल अधिकार है। मुगल बादशाह औरंगजेब ने मंदिर तोड़ा, यह ऐतिहासिक तथ्य है और इतिहास ही साक्ष्य है।

Gyanvapi masjid Shringar Gauri Case Hearing today in varanasi District Judge court Hindu side will continue argue
वाराणसी कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

सुप्रीमकोर्ट के अधिवक्ता शिवम गौड़ ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के 100 जजमेंट के साथ 361 पन्ने की लिखित बहस दाखिल की। इसमें वक्फ बोर्ड, विश्वनाथ मंदिर एक्ट और विशेष धर्म उपासना स्थल एक्ट को लेकर सुप्रीमकोर्ट की नजीर को भी न्यायालय के समक्ष रखा।

एडवोकेट अनुपम द्विवेदी ने दलील दी कि वक्फ बोर्ड की संपत्ति वाला एक आवेदन सिविल जज की अदालत पहले खारिज कर चुकी है और वक्फ बोर्ड में दोनों पक्ष मुस्लिम ही जा सकते हैं। विशेष उपासना स्थल एक्ट समेत अन्य बिंदुओं पर वे अपनी दलील जारी रखेंगे। वादिनी गण की तरफ से दलीलें समाप्त होने के बाद डीजीसी सिविल महेंद्र प्रसाद पांडेय शासन, पुलिस व प्रशासन का पक्ष रखेंगे।

अविमुक्तेश्वर विराजमान पर आज भी सुनवाई करेगी अदालत

भगवान अविमुक्तेश्वर विराजमान की तरफ से सिविल जज सीनियर डिवीजन कुमुदलता त्रिपाठी की अदालत में सोमवार को नई दिल्ली निवासी हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्त की तरफ से वाद दाखिल किया गया। यह वाद वरिष्ठ अधिवक्ता मंगला प्रसाद पाठक व अभिषेक पाठक ने दाखिल किया है।

वाद में मुख्य रूप से तीन मांगें रखी गई हैं। इसमें दर्शन-पूजन राग भोग, परिसर में जबरिया निर्माण को गिराने, मुस्लिमों के प्रवेश और उनके धार्मिक आयोजन पर रोक की मांग की गई है। वाद में याची विष्णु गुप्त के साथ खजूरी निवासी अजीत सिंह भी है।

वाद में अंजुमन इंतजामिया मसाजिद, काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट, डीएम, पुलिस आयुक्त को पक्षकार बनाया गया है। अदालत में वादी के अधिवक्ता ने नोटिस जारी न करने के लिए सीपीसी 80सी का लाभ देते हुए छूट की मांग की है। इस मामले में अदालत ने सुनवाई के लिए 19 जुलाई की तारीख नियत की है।

न्यायालय में हाजिर नहीं होने पर की नोटिस जारी

ज्ञानवापी शृंगार गौरी मामले में सिविल जज सीनियर डिविजन कुमुदलता त्रिपाठी की अदालत ने विश्व हिंदू महासमिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिषेक शर्मा की तरफ से दाखिल वाद में विपक्षियों काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट, जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त को हाजिर न होने पर नोटिस जारी किया। इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख 30 जुलाई नियत की गई।

वादी के अधिवक्ता सत्य प्रकाश शर्मा के मुताबिक इस वाद में ज्ञानवापी परिसर स्थित आदि विश्वेश्वर महादेव, श्रृंगार गौरी की पूजा, आठों मंडपों, सभी धार्मिक प्रतीक चिन्हों व अन्य देवी देवताओं को संरक्षित करने की याचना है। हिंदू धर्म में आस्था न रखने वालों के प्रवेश पर अविलंब रोक की मांग भी की गई है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान अंजुमन इंतजामिया और वादी पक्ष मौजूद रहे।

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