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Gyanvapi Case: ज्ञानवापी में शिवलिंग की पूजा की मांग के आवेदन पर सुनवाई टली, अगली तारीख 14 नवंबर

Tue, 08 Nov 2022 12:19 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Tue, 08 Nov 2022 12:19 PM IST
सार

ज्ञानवापी परिसर में मुस्लिमों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने, पूरा परिसर हिंदुओं को सौंपने और वहां मिले कथित शिवलिंग की पूजा-अर्चना की मांग को लेकर दाखिल प्रार्थना पत्र पर आज कोर्ट में सुनवाई टल गई। 

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Gyanvapi Case Demand for ban muslims entry and worship of Shivling order of varanasi court may come today
वाराणसी कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ज्ञानवापी मस्जिद और श्रृंगार गौरी मामले से संबंधित एक प्रकरण में आज सुनवाई नहीं हो सकी। सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट महेंद्र कुमार पांडेय के अवकाश पर रहने के कारण किरन सिंह की तरफ से दाखिल वाद में मंगलवार को भी आदेश नहीं हो सका। अब आदेश के लिए 14 नवंबर की तिथि नियत की गई है।

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यह मामला सुनवाई योग्य है या नहीं, इस मुद्दे पर आदेश आना है। बीते 15 अक्तूबर को अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हो गई थी। आदेश के लिए 27 अक्तूबर की तिथि नियत की गई थी और 18 अक्तूबर तक दोनों पक्षों को लिखित बहस दाखिल करने को कहा गया था। प्रकरण में वादिनी किरन सिंह की तरफ से ज्ञानवापी में मुस्लिमों का प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने, परिसर हिंदुओं को सौंपने और शिवलिंग की पूजा पाठ रागभोग की अनुमति मांगी गई है। 
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मामले में ऑर्डर 7 रूल 11 पर पोषणीयता के बिंदु पर आदेश होना है। कोर्ट के आदेश से यह साफ होगा कि यह कि यह वाद सुनवाई योग्य है या नहीं। 

कोर्ट में दिए गए तर्क
विश्व वैदिक सनातन संघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह विसेन की पत्नी किरन सिंह ने यह वाद दाखिल किया है। जिसमें ज्ञानवापी परिसर में मुस्लिमों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने, पूरा ज्ञानवापी परिसर हिंदुओं को सौंपने और वहां मिले आदि विश्वेश्वर महादेव के कथित शिवलिंग की पूजा-अर्चना की मांग को लेकर दाखिल प्रार्थना पत्र सुनवाई पूरी हो चुकी है। 

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'जब ट्रायल होगा तभी पता चलेगा कि मस्जिद है या मंदिर'

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ज्ञानवापी - फोटो : अमर उजाला

वादिनी के अधिवक्ता मानबहादुर सिंह, शिवम गौड़ और अनुपम द्विवेदी ने दलील में कहा था कि वाद सुनवाई योग्य है या नहीं, इस मुद्दे पर अंजुमन इंतजामिया की तरफ से जो आपत्ति उठाई गई है वह साक्ष्य व ट्रायल का विषय है। ज्ञानवापी का गुंबद छोड़कर सब कुछ मंदिर का है। जब ट्रायल होगा तभी पता चलेगा कि  मस्जिद है या मंदिर।

दीन मोहम्मद के फैसले के जिक्र पर कहा था कि कोई हिंदू पक्षकार उस मुकदमे में नहीं था। यह भी दलील दी थी कि विशेष धर्म स्थल स्थल विधेयक 1991 इस वाद में प्रभावी नहीं है। स्ट्रक्चर का पता नहीं कि मंदिर है या मस्जिद। जब ट्रायल होगा तभी पता चलेगा कि मस्जिद है या मंदिर, जिसके ट्रायल का अधिकार सिविल कोर्ट को है।
 

कहा था कि यह ऐतिहासिक तथ्य है कि औरंगजेब ने मंदिर तोड़ने और मस्जिद बनवाने का आदेश दिया था। वक्फ एक्ट हिंदू पक्ष पर लागू नहीं होता है। ऐसे में यह वाद सुनवाई योग्य है और अंजुमन की तरफ से पोषणीयता के बिंदु पर दिया गया आवेदन खारिज होने योग्य है। साथ ही राइट टू प्रॉपर्टी के तहत देवता को अपनी प्रॉपर्टी पाने का मौलिक अधिकार है। ऐसे में नाबालिग होने के कारण वाद मित्र के जरिए यह वाद दाखिल किया गया है। अदालत में वाद के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट की 6 रूलिंग और संविधान का हवाला भी दिया गया है। 

मुस्लिम पक्ष की दलील

वहीं मुस्लिम पक्ष यानि अंजुमन इंतजामिया मसाजिद की तरफ से मुमताज अहमद, तौहीद खान, रईस अहमद, मिराजुद्दीन खान और एखलाक खान ने कोर्ट में प्रतिउत्तर में सवाल उठाते हुए कहा था कि एक तरफ कहा जा रहा है कि वाद देवता की तरफ से दाखिल है। वहीं दूसरी तरफ पब्लिक से जुड़े लोग भी इस वाद में शामिल हैं।

यह वाद किस बात पर आधारित है, इसका कोई पेपर दाखिल नहीं किया गया है और कोई सबूत नहीं है। कहानी से कोर्ट नहीं चलती, कहानी और इतिहास में फर्क है। जो इतिहास है वही लिखा जाएगा। साथ ही कानूनी नजीरे दाखिल कर कहा था कि वाद सुनवाई योग्य नहीं है और इसे खारिज कर दिया जाए।

अखिलेश-ओवैसी मामले में भी आज आ सकता है आदेश 

ज्ञानवापी प्रकरण में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी सहित कई अन्य पर भड़काऊ बयान देने का आरोप लगा है। धार्मिक भावनाएं आहत करने के इस मामले में सभी लोगों पर मुकदमा दर्ज करने के लिए दाखिल प्रार्थना पत्र पर आज कोर्ट का आदेश आ सकता है। 

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