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Gyanvapi: गुंबदों पर हाथ मारने से आती है धप-धप की आवाज, हिंदू पक्ष का दावा- निचले हिस्से में है अहम साक्ष्य

Sun, 06 Aug 2023 09:01 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sun, 06 Aug 2023 09:01 AM IST
सार

एएसआई की टीम ने शनिवार को ज्ञानवापी की मौजूदा इमारत की चहारदीवारी के चारों कोनों की नींव देखी। हिंदू पक्ष का दावा है कि गुंबदों पर हाथ मारने से धप-धप की आवाज आती है। ऐसा लगता है कि इसे पुरानी इमारत पर बनाया गया है। इसके निचले हिस्से में अहम साक्ष्य मिलेंगे।

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Gyanavapi ASI Survey sound of dhap dhap comes from hitting domes Hindu side claims
ज्ञानवापी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एएसआई की टीम ने शनिवार को ज्ञानवापी की मौजूदा इमारत की चहारदीवारी के चारों कोनों की नींव देखी। इसके बाद मुख्य गुंबद के भीतरी भाग को देखकर उसकी मैपिंग की। दो अन्य गुंबदों के भीतरी भाग को देखकर उसकी मैपिंग की गई। फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के साथ ही उनकी स्कैनिंग कराई। हिंदू पक्ष का दावा है कि गुंबदों पर हाथ मारने से धप-धप की आवाज आती है। ऐसा लगता है कि इसे पुरानी इमारत पर बनाया गया है। इसके निचले हिस्से में अहम साक्ष्य मिलेंगे।

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एएसआई की टीम ने इमारत के भीतर की दीवारों और खंभों पर दिखे चिह्नों, लिखावट की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई। डायल टेस्ट इंडिकेटर और डेप्थ माइक्रोमीटर से सतह के साथ ही इमारत के अंदर के अलग-अलग हिस्सों की माप हुई। कांबिनेशन सेंट वर्नियर बैवल प्रोट्रेक्टर की मदद से इमारत के आंतरिक हिस्से की दीवारों, खंभों और छत की माप ली गई।
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इसमें बांस से बनीं सीढि़यों का सहारा लिया है, जिसे एएसआई की टीम अपने साथ लेकर ज्ञानवापी परिसर में गई थी। सतह, निर्माण और बनावट की जांच के बाद उपकरणों से जो आंकड़े मिले हैं, उन्हें टोपोग्राफी शीट पर दर्ज की गई है।

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अधिवक्ता आयुक्त के कमीशन से अलग है यह सर्वे

अधिवक्ता अनुपम द्विवेदी ने कहा कि पिछले साल अधिवक्ता आयुक्त ने कमीशन की जो कार्रवाई की थी, उससे यह सर्वे पूरी तरह से अलग है। पिछले साल किसी वस्तु को छूने का अधिकार नहीं था। आंखों के सामने जो दिख रहा था, रिपोर्ट में सिर्फ उसका ही उल्लेख किया गया था। एएसआई की टीम देखने के साथ उसे छूकर जांच कर रही है। जरूरत के अनुसार बिना खोदाई या तोड़फोड़ किए हुए नमूने भी एकत्र कर रही है।

चार हिस्से में बंटकर किया सर्वे

एएसआई की टीम चार हिस्से में बंटकर ज्ञानवापी की मौजूदा इमारत के चार अलग-अलग दिशाओं में सर्वे कर रही है। इसके लिए मौजूदा इमारत को चार सेक्टर में बांटा गया है। बाहरी हिस्से की मैपिंग, इमेजिंग और स्कैनिंग के बाद अब मुख्य रूप से फोकस आंतरिक हिस्से के सर्वे पर है।

पता लगेगा इमारत औरंगजेब ने बनवाई या पहले से बनी थी

हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि एएसआई की टीम वैज्ञानिक पद्धति से ज्ञानवापी का सर्वे कर रही है। अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से साक्ष्य जुटा जा रहे हैं। सर्वे से मौजूदा इमारत को किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि सर्वे से पता लगाने की कोशिश की जा रही कि मौजूदा इमारत की पश्चिमी दीवार की उम्र क्या है? मौजूद इमारत को वर्ष 1669 में औरंगजेब ने बनवाया था या फिर यह उससे पहले से ही बनी हुई है। मौजूदा इमारत के नीचे क्या है, इसका पता लगाने के लिए जीपीआर तकनीक की मदद ली जाएगी। अधिवक्ता ने कहा कि सर्वे में कितना समय लगेगा, यह बता पाना मुश्किल है। यह जरूर तय है कि सर्वे का काम अब निर्विघ्न रूप से संपन्न होगा। सर्वे के दौरान परिसर में मौजूद था। सर्वे टीम मेहनत से काम कर रही है।

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