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नक्सल प्रभावित गांवों में जागरूकता की अलख जगा रहा ग्रीन ग्रुप
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 23 Oct 2018 05:27 PM IST
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ग्रीन ग्रुप की महिलाएं
- फोटो : amar ujala
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यूपी के मिर्जापुर जिले के नक्सल प्रभावित गांवों में होप वेलफेयर संस्था के गठित ग्रीन ग्रुप की महिलाएं जागरूकता की अलख को जगाने में जुटी हैं। नक्सल प्रभावित गांवों में जहां शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक की सुविधाएं दम तोड़ती नजर आती हैं।
ग्रीन ग्रुप की महिलाएं जिले के नक्सल प्रभावित गांवों में महिला सशक्तीकरण के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य सहित नशा, जुआ एवं महिला प्रताड़ना जैसी कुरीतियों के साथ महिलाओं-बच्चों के साथ होने वाले अपराधों के विरुद्घ जागरूकता फैलाने का काम कर रही हैं।
सामाजिक संगठन होप वेलफेयर की ओर से जनपद के नक्सल प्रभावित क्षेत्र के राजगढ़, भवानीपुर, पुरैनियां, कूड़ी, भीटी, धंसेरिया, रामपुर-38, हिनौता, सरसो, सेमरी के युवाओं को नशा, जुआ और महिला प्रताड़ना जैसी कुरीतियों के साथ-साथ महिलाओं व बच्चों के साथ होने वाले अपराधों के विरुद्ध जागरूक करने का काम तेजी से किया जा रहा है। वहीं, नक्सल प्रभावित गांवों के संपूर्ण विकास के उद्देश्य से गठित ग्रीन ग्रुप की महिलाएं क्षेत्र की महिलाओं व बच्चों को जागरूक करने में जुटीं हैं।
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ग्रीन ग्रुप की महिलाएं जिले के नक्सल प्रभावित गांवों में महिला सशक्तीकरण के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य सहित नशा, जुआ एवं महिला प्रताड़ना जैसी कुरीतियों के साथ महिलाओं-बच्चों के साथ होने वाले अपराधों के विरुद्घ जागरूकता फैलाने का काम कर रही हैं।
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सामाजिक संगठन होप वेलफेयर की ओर से जनपद के नक्सल प्रभावित क्षेत्र के राजगढ़, भवानीपुर, पुरैनियां, कूड़ी, भीटी, धंसेरिया, रामपुर-38, हिनौता, सरसो, सेमरी के युवाओं को नशा, जुआ और महिला प्रताड़ना जैसी कुरीतियों के साथ-साथ महिलाओं व बच्चों के साथ होने वाले अपराधों के विरुद्ध जागरूक करने का काम तेजी से किया जा रहा है। वहीं, नक्सल प्रभावित गांवों के संपूर्ण विकास के उद्देश्य से गठित ग्रीन ग्रुप की महिलाएं क्षेत्र की महिलाओं व बच्चों को जागरूक करने में जुटीं हैं।
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18 साल से कम उम्र के बच्चों को नशीले पदार्थ न बेचने की अपील
ग्रीन ग्रुप
- फोटो : amar ujala
होप वेलफेयर संस्था के ग्रीन ग्रुप द्वारा गांव में स्थित दुकानदारों को समय-समय पर चेतावनी दी जाती है ताकि वह 18 साल से कम उम्र के बच्चों को नशीले पदार्थ को ना बेचें तथा सरकारी स्कूलों में बच्चों की नामांकन संख्या बढ़ाने के लिए ग्रीन ग्रुप महिलाओं द्वारा समय-समय पर रैली के जरिये जागरूक किया जाता है कि वह अपने बच्चों को स्कूल भेजें।
साथ ही गांव में हर रविवार को दौरा कर जुआ और महिला शोषण करने वालों को चेतावनी दी जा रही है। नतीजतन, इस गांव में बिल्कुल जुआ, महिला प्रताड़ना आदि के मामले आने बंद हो गए हैं। ग्रीन ग्रुप की महिलाओं को समय-समय पर सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दी जाती है। इससे क्षेत्र में छेड़छाड़ की घटनाओं में भी कमी आई है।
वहीं, पुलिस और डॉक्टर के साथ चौपाल लगाकर इनको स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधित जानकारी समय-समय पर दी जाती है। पुरैनिया, धंसेरिया में ग्रीन ग्रुप की महिलाओं द्वारा उन घरों को चिह्नित कर खुशहाली का चिह्न लगाया गया है।
होप संस्था द्वारा शुरू एक बहुउद्देश्यीय योजना है जिसका मकसद नक्सल और सुदूरवर्ती गांव में बेटी जन्म देने वाली मां के लिए समय-समय पर फल, पौष्टिक पदार्थ की व्यवस्था करना, बेटी जन्म देने वाली मां के घर जाकर जन्म का उत्सव ढोल, सोहर गीत गाकर प्रदर्शित करना है।
साथ ही गांव में हर रविवार को दौरा कर जुआ और महिला शोषण करने वालों को चेतावनी दी जा रही है। नतीजतन, इस गांव में बिल्कुल जुआ, महिला प्रताड़ना आदि के मामले आने बंद हो गए हैं। ग्रीन ग्रुप की महिलाओं को समय-समय पर सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दी जाती है। इससे क्षेत्र में छेड़छाड़ की घटनाओं में भी कमी आई है।
वहीं, पुलिस और डॉक्टर के साथ चौपाल लगाकर इनको स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधित जानकारी समय-समय पर दी जाती है। पुरैनिया, धंसेरिया में ग्रीन ग्रुप की महिलाओं द्वारा उन घरों को चिह्नित कर खुशहाली का चिह्न लगाया गया है।
होप संस्था द्वारा शुरू एक बहुउद्देश्यीय योजना है जिसका मकसद नक्सल और सुदूरवर्ती गांव में बेटी जन्म देने वाली मां के लिए समय-समय पर फल, पौष्टिक पदार्थ की व्यवस्था करना, बेटी जन्म देने वाली मां के घर जाकर जन्म का उत्सव ढोल, सोहर गीत गाकर प्रदर्शित करना है।
नक्सल प्रभावित 10 गांवों में बंद हो चुकी है घरेलू हिंसा
ग्रीन गैंग
- फोटो : amar ujala
नक्सल प्रभावित 10 गांवों में गठित ग्रीन ग्रुप की महिलाओं को सेल्फ हेल्प समूह में शामिल किया जा रहा है। इसके माध्यम से महिलाएं पूर्ण रूप से रोजगार से जुड़ जाएंगी। कुड़ी व राजगढ़ गांव की महिलाओं को पायलट के रूप में शुरू किया किया गया है।
यहां पर कबाड़ से जुगाड़ के बारे में ट्रेनिंग दिया जा रहा है ताकि यहां की महिलाएं घर के कबाड़ से पैसा कमाने का तरीका सीख सकें। इसका शुभारंभ हाल ही में मिर्जापुर एस.पी शालिनी ने किया। तीन जनवरी 2018 को तत्कालीन एसपी आशीष तिवारी के निर्देशन में नक्सल प्रभावित 10 गांव में ग्रीन रूप का गठन किया गया था जिसका शुभारंभ मड़िहान विधायक रमाशंकर पटेल ने किया था।
ग्रीन ग्रुप की प्रमुख उपलब्धियों में 10 गांव में सरकारी स्कूलों में बच्चों के नामांकन संख्या में बढ़ोतरी आई है। खुद गांव की महिलाएं गांव के विकास का बागडोर संभाली हुई है। संस्था के अध्यक्ष रवि मिश्रा एवं सचिव दिव्यांशु उपाध्याय का कहना है कि अधिकारियों के साथ चौपाल लगाकर गांव की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया जाता है।
गांव में जुआ पूरी तरीके से बंद हो चुका अब यहां के लोग रोजगार की तरफ अपना ध्यान लगा रहे हैं। इन 10 नक्सल प्रभावित गांवों में ग्रीन ग्रुप महिलाओं के कारण घरेलू हिंसा लगभग बंद हो चुका है या ना के बराबर है।
यहां पर कबाड़ से जुगाड़ के बारे में ट्रेनिंग दिया जा रहा है ताकि यहां की महिलाएं घर के कबाड़ से पैसा कमाने का तरीका सीख सकें। इसका शुभारंभ हाल ही में मिर्जापुर एस.पी शालिनी ने किया। तीन जनवरी 2018 को तत्कालीन एसपी आशीष तिवारी के निर्देशन में नक्सल प्रभावित 10 गांव में ग्रीन रूप का गठन किया गया था जिसका शुभारंभ मड़िहान विधायक रमाशंकर पटेल ने किया था।
ग्रीन ग्रुप की प्रमुख उपलब्धियों में 10 गांव में सरकारी स्कूलों में बच्चों के नामांकन संख्या में बढ़ोतरी आई है। खुद गांव की महिलाएं गांव के विकास का बागडोर संभाली हुई है। संस्था के अध्यक्ष रवि मिश्रा एवं सचिव दिव्यांशु उपाध्याय का कहना है कि अधिकारियों के साथ चौपाल लगाकर गांव की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया जाता है।
गांव में जुआ पूरी तरीके से बंद हो चुका अब यहां के लोग रोजगार की तरफ अपना ध्यान लगा रहे हैं। इन 10 नक्सल प्रभावित गांवों में ग्रीन ग्रुप महिलाओं के कारण घरेलू हिंसा लगभग बंद हो चुका है या ना के बराबर है।