बीएचयू में बोलीं राज्यपाल आनंदी बेन पटेल- बाल विवाह, दहेज प्रथा खत्म करने के लिए कार्य करें
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प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि किसी सामाजिक कुरीति को हटाने पर पहले विरोध होता है, फिर पूरा समाज उसे ठीक मानकर अच्छा कहने लगता है। बाल विवाह, दहेज प्रथा बड़ी सामाजिक कुरीति है। इसका सरकार ने पूरा निषेध किया है। शिक्षित महिलाएं इसमें संकल्प के साथ आगे बढ़ कर जागरूकता के साथ इसे हटाने के लिए कार्य करें। बीएचयू में आयोजित आंगनबाड़ी प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन मंगलवार को मातृ शिक्षा एवं शिशु की देखभाल विषय पर एक प्रशिक्षिका की भूमिका में संबोधित किया।
राज्यपाल ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सौभाग्यशाली हैं कि वह माता और टीचर भी हैं। बच्चों को जन्म देती हैं और फिर राह दिखाती हैं। शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की अधिक जरूरत है। शिक्षा में लगभग 60 फ़ीसदी व आंगनबाड़ी में 100 फ़ीसदी महिलाएं काम कर रही हैं। बाल विकास महिला कल्याण विभाग में गांव से लेकर ऊपर तक महिलाओं की चेन है। घर पर 3 वर्ष तक माताएं बच्चों को संस्कार देती हैं। 9 माह गर्भ में रखती हैं। उसके पूर्व किशोरी होती है।
किशोरावस्था से ही महिलाओं को जानकार व कुशल बनाना है। समस्त किशोरी का हीमोग्लोबिन चेक हो और उसे ठीक रखा जाए। गर्भ के दौरान महिलाओं को कैसे रहना है, क्या खाना है, इसका ध्यान रखें। उन्हें अच्छे वातावरण में घर में रखें। गर्भ संस्कार क्या है इसका कोर्स कराएं। कहा कि गर्भस्थ शिशु पर माता की मन: स्थिति, वातावरण, खानपान का प्रभाव पड़ता है। राज्यपाल ने कई उदाहरण भी बताएं। जन्म के बाद बच्चों की ठीक से देखभाल और खान-पान के बारे में भी बताया।
कहा कि छोटे बच्चे घर में माता-पिता की बातचीत, व्यवहार तथा अपने साथ हो रहे व्यवहार को नोटिस करता है। कहा कि बच्चों को आदर्श कहानी, उत्तम चरित्र की कथाएं बताएं। ऐसी पुस्तकें घर में रखें। कहा कि यह प्रशिक्षण उपयोगी होगा। इसमें काशी के आंगनबाड़ी केंद्रों में बाल विकास व महिला कल्याण के चमत्कारी परिणाम दिखेंगे। इस अवसर पर मंत्री स्वाति सिंह, विद्या भारती के पदाधिकारी व विभागीय अधिकारी एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मौजूद रहे।
बच्चों में न डालें मोबाइल की आदत : राज्यपाल
राज्यपाल ने कहा कि 21वीं सदी के बच्चे बहुत पावरफुल व संवेदनशील हैं। बच्चों में मोबाइल की आदत न डालें। माताएं अपने काम की व्यस्तता में भी बच्चों को मोबाइल देकर न उलझाएं। इसका गलत असर पड़ता है। बच्चों के खानपान में तला-भुना से परहेज करें। पौष्टिक व सुपाच्य भोजन की आदत डालें।
माताओं-बच्चों की तबीयत खराब होने पर डाक्टर को दिखाएं: राज्यपाल
राज्यपाल ने कहा कि माताओं-बच्चों की तबीयत खराब होने पर अस्पताल, डॉक्टर को दिखाएं। किसी जादू टोना झाड़-फूंक, गंडा-ताबीज जैसे अंधविश्वास में न आएं। राज्यपाल ने बाल विवाह का विरोध करने का दृष्टांत भी सुनाया।
शिक्षित नारी पूरे घर परिवार को अच्छे से गढ़ सकती है: राज्यपाल
राज्यपाल ने बताया कि वह कानपुर व लखनऊ यूनिवर्सिटी में गर्भ संस्कार का आयोजन करा रही है। स्वस्थ माता, स्वस्थ बच्चे, संस्कारित शिक्षा, शिक्षित नारी घर परिवार को अच्छे से गढ़ सकती है। इसके लिए स्वयं प्रशिक्षित हो और दूसरों को जागरूक करें। सभी विभाग मिलकर बाल विकास एवं महिला कल्याण के कार्यों के लिए समन्वित रूप से कार्य करें। इससे आदर्श समाज का निर्माण होगा।