यूपी के इस शहर में नगर निगम की अच्छी पहल, जल्द दिखाई देंगे चलते-फिरते अस्थायी रैन बसेरे
शहर में जल्द ही चलते-फिरते अस्थायी रैन बसेरे आपको दिखाई देंगे। इसके लिए नगर निगम ने तैयारी शुरू कर दी है। रोडवेज की परिचालन से रिटायर्ड हो चुकी बसों को अस्थाई रैन बसेरा के रूप में बनाने की तैयारी नगर निगम ने शुरू कर दी है। इसके लिए नगर आयुक्त गौरांग राठी ने रोडवेज प्रशासन को पत्र भेजा है।
नगर निगम की ओर से तैयारी है कि इन पुरानी बसों को अस्थाई रैन बसेरे का रूप दिया जाएगा। बसों में ड्राइवर की सीट को छोड़कर बाकी सभी सीटों को निकाल दिया जाएगा। बसों के फर्श पर गद्दे और चादरें डालकर ठंड से परेशान लोगों को रहने के लिए व्यवस्था मुहैया कराई जाएगी।
इस तरह के रैन बसेरे जब जहां जरूरत होगी, भेजे जाएंगे। नगर निगम की इस पहल से आवास विहीन लोगों को काफी सुविधा मिलेगी। वहीं नगर निगम की ओर से शहर में स्थायी 11 रैन बसेरे भी संचालित किए जा रहे हैं। इनके अलावा और भी अस्थायी रैन बसेरे जरूरत के अनुसार खोले जाएंगे।
नगर आयुक्त ने बताया कि जल्द ही अस्थाई रैन बसेरों को मूर्त रूप दिया जाएगा। इसका इस्तेमाल स्नान पर्व पर अधिक होगा, जहां भीड़ आएगी वहां इन्हें लगा दिया जाएगा। पुरानी हो चुकी रोडवेज की बसों को रैन बसेरे में बदलने से आम जनता को काफी सहूलियत होगी। भीड़ भाड़ वाले इलाकों में शौचालय और शौचालय वाली गाड़ियां खड़ी की जाती हैं। इसी प्रकार रैन बसेरा वाली गाड़ियां भी शहर के कई इलाकों में खड़ी की जाएंगी।
87 बसों में 40 बस कैंट डिपो में हुई खड़ी
यात्री सुविधाओं की बढ़ोत्तरी का दावा करने वाले रोडवेज वाराणसी परिक्षेत्र के कैंट डिपो की 40 बस चालकों के अभाव में खड़ी है। इसमें आधा दर्जन बस खराब भी है। चालकों की भर्ती को लेकर क्षेत्रीय प्रबंधक केके शर्मा ने कैंट के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक को निर्देशित किया है।
वर्तमान में कैंट डिपो की 87 बसों का संचालन होता है। यहां कुल 119 चालक (संविदा और नियमित) संबद्ध हैं। बसों की कमी के चलते लगातार कैंट डिपो का लोड फैक्टर घटता जा रहा है। जिस पर नोडल अधिकारी ए रहमान ने नाराजगी जाहिर की है।