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गीता भवन: काशी में संगमरमर की दीवार पर अंकित हैं गीता के 700 श्लोक, 70 साल पहले लिखे गए हैं 18 अध्याय

Wed, 11 Dec 2024 06:10 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Wed, 11 Dec 2024 06:10 PM IST
सार

काशी में 70 साल पहले बेटी जी मंदिर के गीता भवन में गीता के 18 अध्याय के श्लोक लिखे हैं। यहां श्रद्धालुओं को गीता ग्रंथ की जरूरत नहीं पड़ती। वे सस्वर श्लोकों का पाठ करते हैं।

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Gita 700 verses inscribed on marble wall in Gita Bhawan of Beti Ji Mandir varanasi
बेटी जी मंदिर के गीता भवन में दीवार पर अंकित गीता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भगवान श्रीकृष्ण के श्रीमुख से निकली गीता की वाणी काशी की दीवारों पर भी अंकित है। चौखंभा स्थित वल्लभ गीता श्रीकृष्ण भवन (बेटी जी मंदिर) में गीता के 18 अध्याय के 700 श्लोक लिखे गए हैं। सफेद संगमरमर पर इन श्लोकों को 70 साल पहले अंकित किया गया है। यहां श्रद्धालुओं को गीता ग्रंथ की जरूरत नहीं पड़ती। वे सस्वर श्लोकों का पाठ करते हैं। इस गीता भवन में गीता पाठ के साथ ही नामचीन कलाकार संगीत साधना भी कर चुके हैं।

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गीता भवन एकमात्र वह स्थान है जहां दीवार पर लिखे हैं गीता के सभी श्लोक
वैष्णव संप्रदाय के प्रमुख पीठ गोपाल मंदिर के पास स्थित बेटी जी मंदिर का गीता भवन एकमात्र वह स्थान है जहां गीता के सभी श्लोक दीवार पर लिखे हैं। मंदिर के प्रमुख कल्याण राय महाराज यहां सेवा करते हैं। गीता भवन में मंगला आरती और संध्या आरती के बाद गीता का सामूहिक पाठ होता है। मंदिर के सत्संग संचालक अशोक बल्लभ दास ने बताया कि गोपाल मंदिर के पूर्व पीठाधीश्वर मुरलीधर महाराज की बेटी शरद वल्लभा ने एक नंवबर 1955 में वैष्णव संप्रदाय और गीता के संदेशों के प्रचार-प्रसार के लिए वल्लभ गीता श्रीकृष्ण भवन की स्थापना करवाई।
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इसी दौरान मंदिर के एक भवन के दीवारों पर गीता के 18 अध्याय के कुल 700 श्लोकों को अंकित करवाया। इसके बाद इसका नाम गीता भवन कर दिया गया। इस मंदिर में मदन मोहनलाल के रूप में भगवान श्रीकृष्ण के राधा के साथ बंशी बजाते हुए तथा श्रीकृष्ण जी के बालरूप में बाल कृष्णलाल विराजमान हैं, जिनकी वैष्णव पद्धति में सेवा होती है। गीता भवन में विभिन्न उत्सव पर भी कार्यक्रम होते हैं।

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राजस्थान के कारीगरों ने किया था अंकित

गीता भवन की दीवारों पर श्लोकों को अंकित करवाने के लिए राजस्थान से कारीगर बुलाए गए थे। अशोक बल्लभ दास ने बताया कि श्लोकों को संगमरमर पर अंकित करने के लिए राजस्थान के कारीगरों को बुलाया गया था। वहीं से संगमरमर भी लाया गया था।
 
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां व पंडित जसराज भी लगा चुके हैं हाजिरी
गीता भवन में देश के नामचीज कलाकारों, साहित्यकारों और विद्वानों ने भी हाजिरी लगा चुके हैं। अशोक बल्लभ दास ने बताया कि पर हर साल शास्त्रीय गायक पं. जसराज संकटमोचन संगीत समारोह के बाद यहां आते थे और संगीत की प्रस्तुति करते थे। इसके अलावा उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहनाई, भीमसेन जोशी भी गायन पेश कर चुके हैं। पं. किशन महाराज, पं. राजन-साजन मिश्र आदि कलाकार भी प्रस्तुति दे चुके हैं। यहां पर आयोजित विद्वत सभाओं में डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी, शिव प्रकाश सिंह, कमलापति त्रिपाठी आदि ने भी हाजिरी लगा चुके हैं। वहीं, इस मंदिर से संचालित श्रीबल्लभ बालिका इंटर कॉलेज में गीता की भी पढ़ाई होती है।

मानस मंदिर में मानस के सात कांड के 1020 हैं दोहे

दुर्गाकंड स्थित मानस मंदिर में श्रीरामचरितमानस के सातों कांड के 1020 दोहे अंकित हैं। मंदिर के त्रिलोचन ने बताया कि बालकांड में 361 दोहे, अयोध्या कांड में 325, अरण्य कांड में 46, किस्किंधा कांड 30, सुंदरकांड में सात, लंका कांड में 121 एवं उत्तरकांड में 130 दोहे हैं। हर दोहे के 10 से 12 चौपाइयां हैं। उन्होंने बताया कि इसे मानस के काशीराज संस्कार से लिया गया है। इसके संपादन आचार्य विश्वनाथ प्रता मिश्र ने किया। मंदिर में श्रीरामदरबार, अन्नपूर्णा माता, सत्यनारायण भगवान एवं तुलसी माता की प्रतिमा है।
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