वाराणसी: डी-11 गैंग के शॉर्प शूटर गिरधारी को जरायम जगत में इस वजह से कहा जाता था 'डॉक्टर'
लखनऊ में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया डी-11 गैंग का शॉर्प शूटर गिरधारी विश्वकर्मा उर्फ कन्हैया जरायम जगत में डॉक्टर के नाम से कुख्यात था। पुलिस और गिरधारी को जानने वालों के अनुसार, उसे यह अच्छे से पता रहता था कि कितनी दूरी से सिर और सीने में गोली मारने से किसी की भी जान तुरंत जा सकती है। इसके साथ ही वह हमेशा अंधाधुंध फायरिंग कर जान लेने के लिए कुख्यात था। इसीलिए राजनीति, कारोबार और जरायम जगत से जुड़े चर्चित लोगों की हत्या की सुपारी गिरधारी को दी जाती थी।
वर्ष 2000 तक चोलापुर क्षेत्र के एक सफेदपोश के शागिर्द के तौर पर रहने वाले गिरधारी का नाम शुरुआत में उसके गांव लखनपुर और आसपास के गांवों में सामान्य झगड़ों में ही सामने आता रहता था। वर्ष 2001 में पहली बार उसके खिलाफ जैतपुरा थाने में लूट का मुकदमा दर्ज हुआ तो वह फिर इस दलदल से कभी उबर न पाया।
जानकार बताते हैं कि गिरधारी जरायम जगत का कुख्यात नाम होने के साथ ही अपने शातिर दिमाग का बहुत अच्छा इस्तेमाल खुद को सुरक्षित बचाए रखने के लिए करता था। इसके साथ ही प्रदेश में जिस भी पार्टी की सरकार रहती थी, उसके कुछेक प्रभावशाली नेताओं के संपर्क में भी वह हमेशा रहता था।
इसका उदाहरण पूर्वांचल के पूर्व बाहुबली सांसद और आजमगढ़ के एक सफेदपोश के साथ ही एक विधायक के साथ गिरधारी की करीबी के तौर पर कई बार देखने को मिल चुकी है। पुलिस मुठभेड़ में गिरधारी के मारे जाने के साथ ही 2005 में जौनपुर में चेयरमैन के भाई की हत्या, 2008 में मऊ के घोसी में नंदू सिंह की हत्या, 2010 में मऊ शहर में सुनील सिंह की हत्या, 2011 में आजमगढ़ के डमरू सिंह की हत्या, 2013 में आजमगढ़ के जीयनपुर में पूर्व विधायक सर्वेश सिंह उर्फ सीपू की हत्या, 2019 में वाराणसी में नीतेश सिंह बबलू की हत्या और 2020 में लखनऊ में मऊ के पूर्व ज्येष्ठ उप प्रमुख अजीत सिंह की हत्या से जुड़े कुछ अहम राज शायद अब कभी सामने ना आ पाएं।