बनारसः पहले मनमाने ढंग से की सड़कों की खुदाई, अब सर्वे की याद आई
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स्थिति यह है कि एक फाल्ट होने पर उसे सुधारने में दूसरे फाल्ट होने लगे हैं। भविष्य में ऐसी परेशानियों से बचने के लिए 10 करोड़ रुपये खर्च कर भूमिगत सीवेज-पेयजल पाइप लाइन, ओएफसी वायर, बिजली केबल की जानकारी के लिए जीआई सर्वे कराया जाएगा।
जीआई सर्वे के जरिए भूमिगत पाइप लाइन और वायर-केबल मैप तैयार किया जाएगा। उनकी टर्निंग, ज्वाइंट और उन्हें कितनी गहराई पर बिछाया गया है, यह सब जानकारियां नक्शे में होंगी।
मिट्टी कैसी है और वहां कितनी गहराई तक खुदाई सुरक्षित होगी, इसका भी पता चल जाएगा। जीआई सर्वे के लिए 10 करोड़ रुपये का टेंडर चेन्नई की कंपनी को दिया गया है।
ये होंगे फायदे
भूमिगत पाइप लाइन का कोई मैप न होने से सिर्फ आईपीडीएस के कार्यों के दौरान ही दो सौ से अधिक जगहों पर पेयजल और सीवर लाइन क्षतिग्रस्त हुईं। इनकी मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च किए गए हैं।
वहीं विकास कार्यों के लिए जिन सड़कों की खुदाई करनी होगी, पहले जीआई सर्वे से तैयार वहां के नक्शे को देखा जाएगा। कार्यदायी संस्था को भी यह मैप दिया जाएगा।
इसी आधार पर उसे खुदाई करानी होगी ताकि उसके कार्य के दौरान कोई दूसरी लाइन क्षतिग्रस्त न होने पाए। अगर बिजली की केबल है तो उसके अनुरूप खुदाई में सावधानी बरती जा सकेगी।