प्रख्यात गजलकार छाया शुक्ला की गजलों के संग्रह इक परिंदे सी उड़ने लगी जिंदगी का रविवार को राजकीय जिला पुस्तकालय में लोकार्पण हुआ। इनमें जीवन जगत की अनेकानेक छवियां हैं। जीवन के आकर्षक, उज्ज्वल और सम्मोहक के रूप चटक होकर उभरे हैं। बीएचयू के प्रो. वशिष्ठ अनूप, साहित्यकार डॉ. दयानिधि मिश्र, प्रो. दयानंद आदि साहित्यकारों ने इस गजल संग्रह का विधिवत लोकार्पण किया।
डॉ. दयानिधि मिश्र ने कहा कि ये गजलें स्तरीय हैं और किसी वाद से प्रभावित नहीं हैं। उनकी दृष्टि अपने कालखंड के समूचे परिदृश्य पर है। उनकी गजलों का फलक अत्यंत विस्तृत है। गजलकार शिवकुमार पराग ने कहा कि गजलों की भाषा हिंदी-उर्दू मिश्रित और शैली सहज भावबोध कराती चली है। प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि इनकी गजलों में जीवन सौंदर्य की विविध छटा की सार्थक अभिव्यक्ति है। छाया शुक्ला ने अपनी चुनिंदा गजलों का पाठ किया। संचालन प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने किया। स्वागत कंचन सिंह परिहार, संचालन हिमांशु उपाध्याय और धन्यवाद ज्ञापन नरेंद्रनाथ मिश्र ने किया। इस मौके पर आनंद कृष्ण मासूम, योगेश चतुर्वेदी, डॉ. नसीमा निशा, गिरिजेश तिवारी, डॉ. राजेश राय, डॉ. कवींद्र नारायण, बुद्धदेव तिवारी, देवेंद्र पांडेय, सूर्यकांत त्रिपाठी, पंकज श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।