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नैट टेस्टिंग से खून में संक्रमण की मिल रही सही जानकारी
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नैट यानि न्यूक्लिक एसिड टेस्ट की टेस्टिंग से खून में संक्रमण के बारे में सही और जल्दी जानकारी मिल जाती है। इसका सबसे बड़ा लाभ उन मरीजों को होता है, जिनको खून की जरूरत होती है, इस टेस्टिंग से मरीज को सुरक्षित खून भी मिलता है और मरीजों को ब्लड लेने में देरी नहीं होती है। अब आईएमएस बीएचयू के ब्लड बैंक में प्रयागराज के मोती लाल नेहरू मेडिकल कालेज के ब्लड सैंपल की भी जांच हो रही है।
बीएचयू के ब्लड बैंक को रीजनल ट्रेनिंग सेंटर का भी दर्जा मिला है और समय-समय पर इसके माध्यम से प्रदेश भर के ब्लड बैंकों से जुड़े कर्मचारियों को ट्रेनिंग भी दी जाती है। ब्लड बैंक में कोरोना काल में वर्ष 2020 में ही नैट टेस्टिंग की शुरुआत की गई थी। खास बात यह है कि अब यहां प्रयागराज से भी सैंपल आ रहा है। बीएचयू ब्लड बैंक सीएमओ डॉ. एसके सिंह के अनुसार जब भी कहीं रक्तदान होता है तो रक्तदान से लेकर खून की जांच होने तक पूरी सावधानी बरती जाती है। ब्लड बैंक में ब्लड के आने के बाद एलाइजा, केमिलिसेंस और नैट टेस्टिंग कराई जाती है। इसमें नैट जांच की खासियत यह है कि अगर कोई संक्रमण रहेगा तो जल्द ही इसकी जानकारी मिल जाएगी। देश भर में करीब 2500 ब्लड बैंक हैं, जिसमें 60 ऐसे हैं, जिसमें नैट टैस्टिंग होती है। इसमें पूर्वांचल में केवल बीएचयू में ही इसकी सुविधा है।
हेपेटाइटिस बी-सी और एचआईवी की होती है जांच
बीएचयू ब्लड बैंक के सीएमओ डॉ. एसके सिंह का कहना है कि हेपेटाइटिस बी-सी, एचआईवी और वायरस जनित रोगों की जांच रैपिड टेस्ट, एलाईजा और नैट के माध्यम से की जा सकती है। इसमें नैट सबसे एडवांस विधि है। इससे वायरस के बारे में पुख्ता और जल्दी जानकारी मिल सकती है। सामान्य विधि एचआईवी जांच में तीन से चार हफ्ते और हेपेटाइटिस सी में 60 दिन और बी में 30 से 50 दिन का समय लगता है। लेकिन नैट टेस्टिंग में एचआईवी सात दिन, हेपेटाइटिस सी 12 दिन और बी के बारे 15 से 20 दिन में पता चल पाएगा।
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बीएचयू के ब्लड बैंक को रीजनल ट्रेनिंग सेंटर का भी दर्जा मिला है और समय-समय पर इसके माध्यम से प्रदेश भर के ब्लड बैंकों से जुड़े कर्मचारियों को ट्रेनिंग भी दी जाती है। ब्लड बैंक में कोरोना काल में वर्ष 2020 में ही नैट टेस्टिंग की शुरुआत की गई थी। खास बात यह है कि अब यहां प्रयागराज से भी सैंपल आ रहा है। बीएचयू ब्लड बैंक सीएमओ डॉ. एसके सिंह के अनुसार जब भी कहीं रक्तदान होता है तो रक्तदान से लेकर खून की जांच होने तक पूरी सावधानी बरती जाती है। ब्लड बैंक में ब्लड के आने के बाद एलाइजा, केमिलिसेंस और नैट टेस्टिंग कराई जाती है। इसमें नैट जांच की खासियत यह है कि अगर कोई संक्रमण रहेगा तो जल्द ही इसकी जानकारी मिल जाएगी। देश भर में करीब 2500 ब्लड बैंक हैं, जिसमें 60 ऐसे हैं, जिसमें नैट टैस्टिंग होती है। इसमें पूर्वांचल में केवल बीएचयू में ही इसकी सुविधा है।
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हेपेटाइटिस बी-सी और एचआईवी की होती है जांच
बीएचयू ब्लड बैंक के सीएमओ डॉ. एसके सिंह का कहना है कि हेपेटाइटिस बी-सी, एचआईवी और वायरस जनित रोगों की जांच रैपिड टेस्ट, एलाईजा और नैट के माध्यम से की जा सकती है। इसमें नैट सबसे एडवांस विधि है। इससे वायरस के बारे में पुख्ता और जल्दी जानकारी मिल सकती है। सामान्य विधि एचआईवी जांच में तीन से चार हफ्ते और हेपेटाइटिस सी में 60 दिन और बी में 30 से 50 दिन का समय लगता है। लेकिन नैट टेस्टिंग में एचआईवी सात दिन, हेपेटाइटिस सी 12 दिन और बी के बारे 15 से 20 दिन में पता चल पाएगा।
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