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गंगा में डाल्फिन के कुनबे से संकट के बादल छंटे
ब्यूरो, अमर उजाला वाराणसी
Updated Sun, 05 Jun 2016 02:21 AM IST
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DALPHINE
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शिकार और दुर्घटनाओं से विलुप्त होने के कगार पर पहुंचे राष्ट्रीय जलीय जीव डाल्फिन को लेकर खुशखबरी है। यूपी में गंगा और इसकी सहायक नदियों में डाल्फिन की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। इससे गंगा के जलीय पर्यावरण में सुधार आने के संकेत मिले हैं। वाराणसी के कैथी स्थित मारकंडेय महादेव के पास सर्वाधिक डाल्फिन देखी गई हैं। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की ओर से डाल्फिन संरक्षण एवं शिक्षण कार्यक्रम के तहत कराए गए सर्वेक्षण में इन तथ्यों का पता चला है।
जल एवं पर्यावरण संरक्षण पर काम करने वाले विशेषज्ञों और शोधार्थियों को यह जानकर सुकून मिलेगा कि गंगा में डाल्फिन का कुनबा विस्तार ले रहा है। हालांकि शिकार और स्टीमर-नावों के संचालन के चलते होने वाली दुर्घटनाओं के कारण इनकी मौतें भी हो रही हैं लेकिन इनकी ब्रीडिंग में सुधार आया है। वर्ष 2012 में डाल्फिन की गणना जब गंगा में कराई गई थी, तब यूपी में इनकी संख्या 671 पाई गई थी। अक्तूबर 2015 में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की ओर से गंग और इसकी सहायक नदियों यमुना, चंबल, केन, बेतवा, सोन, शारदा, गेरुआ, घाघरा, गंडक नदियों में डाल्फिन का सर्वेक्षण कराया गया तो उत्साहजनक आंकड़े सामने आए।
रामगंगा, सोन और केन में तो एक भी डाल्फिन नहीं पाई गई लेकिन गंगा और अन्य नदियों में 1263 डाल्फिन देखी र्गइं। इलाहाबाद से वाराणसी के बीच गंगा के 225 किमी दायरे में 116 डाल्फिन पाई गईं। इस सर्वेक्षण में मिशन की ओर से दो सौ प्रशिक्षित लोगों की कुल 21 टीमें लगाई गई थीं। डाल्फिन संरक्षण एवं शिक्षण कार्यक्रम के परियोजना निदेशक राजेश कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक वाराणसी के कैथी में मारकंडेय महादेव के पास सर्वाधिक डाल्फिन देखी गई हैं। इससे गंगा के जलीय पर्यावरण में सुधार के संकेत मिले हैं।
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जल एवं पर्यावरण संरक्षण पर काम करने वाले विशेषज्ञों और शोधार्थियों को यह जानकर सुकून मिलेगा कि गंगा में डाल्फिन का कुनबा विस्तार ले रहा है। हालांकि शिकार और स्टीमर-नावों के संचालन के चलते होने वाली दुर्घटनाओं के कारण इनकी मौतें भी हो रही हैं लेकिन इनकी ब्रीडिंग में सुधार आया है। वर्ष 2012 में डाल्फिन की गणना जब गंगा में कराई गई थी, तब यूपी में इनकी संख्या 671 पाई गई थी। अक्तूबर 2015 में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की ओर से गंग और इसकी सहायक नदियों यमुना, चंबल, केन, बेतवा, सोन, शारदा, गेरुआ, घाघरा, गंडक नदियों में डाल्फिन का सर्वेक्षण कराया गया तो उत्साहजनक आंकड़े सामने आए।
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रामगंगा, सोन और केन में तो एक भी डाल्फिन नहीं पाई गई लेकिन गंगा और अन्य नदियों में 1263 डाल्फिन देखी र्गइं। इलाहाबाद से वाराणसी के बीच गंगा के 225 किमी दायरे में 116 डाल्फिन पाई गईं। इस सर्वेक्षण में मिशन की ओर से दो सौ प्रशिक्षित लोगों की कुल 21 टीमें लगाई गई थीं। डाल्फिन संरक्षण एवं शिक्षण कार्यक्रम के परियोजना निदेशक राजेश कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक वाराणसी के कैथी में मारकंडेय महादेव के पास सर्वाधिक डाल्फिन देखी गई हैं। इससे गंगा के जलीय पर्यावरण में सुधार के संकेत मिले हैं।
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