गंगा दशहरा : वाराणसी में घाटों पर होंगे प्रतीकात्मक आयोजन, धर्माचार्यों ने कहा- घर से करें पूजन
गंगा दशहरा पर वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर स्नान की मान्यता है। इस दिन हजारों की संख्या में लोग मां गंगा में डुबकी लगाकर अपने पापों के शमन की कामना करते हैं। मगर इस बार साप्ताहिक बंदी होने के कारण गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
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गंगा दशहरा (20 जून) पर वाराणसी प्रशासन की ओर से गंगा घाट जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है। साप्ताहिक बंदी और कोरोना महामारी को देखते हुए धर्माचार्यों और विद्वतजनों ने भी लोगों से घर पर रहकर ही मां गंगा का पूजन करने की अपील की है। गंगा दशहरा को काशी में दशाश्वमेध घाट पर स्नान की मान्यता है। इस दिन हजारों की संख्या में लोग मां गंगा में डुबकी लगाकर अपने पापों के शमन की कामना करते हैं। साप्ताहिक बंदी होने के कारण गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने कहा कि कोरोना संक्रमण काल में गंगा घाट पर भीड़ न लगाएं। वीकेंड लॉकडाउन का पालन करते हुए घर पर रहकर ही प्रतीकात्मक स्वरूप में गंगा दशहरा मनाएं।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने काशी की जनता से अपील की है कि वह प्रशासन का साथ दें। लॉकडाउन का पालन करें और गंगा स्नान के लिए घाटों पर ना जाएं। अन्नपूर्णा मंदिर के उपमहंत शंकर पुरी ने भी आम श्रद्धालुओं से अपील करते हुए कहा है कि वह कोरोना संक्रमण काल के प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन करें। प्रशासन की ओर से गंगा घाट पर गंगा दशहरा के दिन प्रतिबंध होने के कारण घरों से ही मां गंगा का ध्यान व पूजन करें।
गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्र ने बताया कि लॉकडाउन के कारण गंगा दशहरा पर होने वाला सांस्कृतिक आयोजन स्थगित रहेगा। मां गंगा की प्रतीकात्मक आरती व पूजन ही किया जाएगा। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने कहा कि गंगा दशहरा पर श्रद्धालु घरों पर ही प्रतीकात्मक स्नान करें। वीकेंड लॉकडाउन के कारण गंगा घाट पर प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। बरसात के कारण गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी शुरू हो गई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिहाज से भी इस दौरान गंगा घाट पर स्नान करना उचित नहीं होगा।