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गंगा में उफान, घाटों का संपर्क टूटा
ब्यूरो, अमर उजाला वाराणसी
Updated Sun, 10 Jul 2016 02:18 AM IST
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ganga in kashi
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पहाड़ों पर हुई जोरदार बारिश के चलते गंगा के जलस्तर में तेज बढ़ाव होने लगा है। 24 घंटे के भीतर जल स्तर में चार मीटर से अधिक वृद्धि से शनिवार को अस्सी से राजघाट के बीच सभी 84 घाटों का आपस में संपर्क टूट गया। घाटों पर स्थित मढ़ियों के दो सौ से अधिक छोटे मंदिर डूब गए और कुछ भवनों में भी पानी घुसने लगा। इससे हड़कंप मच गया है। पहले ही बढ़ाव में इतना प्रवाह आ गया कि शाम को घाटों के पथ डूब गए। दैनिक गंगा आरती छतों पर करानी पड़ी। मणिकर्णिका महाश्मशान और हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार के स्थल बदल गए।
केंद्रीय जल आयोग ने वाराणसी में शुक्रवार की सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 60.19 मीटर रिकार्ड किया था, वहीं शनिवार की सुबह इसी समय 63.57 मीटर पर जल स्तर पहुंच गया। रात आठ बजे तक काशी में गंगा का जलस्तर 64 मीटर से ऊपर पहुंचने से तटीय इलाके में हड़कंप की स्थिति रही। पंडों की चौकियां घाट की निचली फर्श से हटाकर ऊपर ले जाने का सिलसिला शुरू हो गया। माला-फूल, पूजा सामग्री और प्रसाद की दूकानों को भी हटाना पड़ा। गंगा सेवा निधि के कार्यालय में गंगा प्रवेश कर गईं। दशाश्वमेध के ब्रह्मेश्वर महादेव, नागेश्वर महादेव मंदिरों में भी लहरें हिलोरें मारने लगीं।
ललिता घाट पर शेषशाई विष्णु के भी गंगा ने पांव पखारे। गंगा के पाट पकड़ कर बहने से सभी घाटों का आपस में संपर्क टूट गया। गंगा सेवा निधि की ओर से कराई जाने वाली प्रसिद्ध गंगा आरती पुरोहितों ने छत पर की। शीतला घाट गंगोत्री सेवा समिति की भी गंगा आरती का स्थल बदल गया और सड़क से लगी सीढ़ी पर आरती कराई गई। इस दौरान दूरदराज से गंगा आरती देखने के लिए आए भक्तों को असुविधा का सामना करना पड़ा।
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केंद्रीय जल आयोग ने वाराणसी में शुक्रवार की सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 60.19 मीटर रिकार्ड किया था, वहीं शनिवार की सुबह इसी समय 63.57 मीटर पर जल स्तर पहुंच गया। रात आठ बजे तक काशी में गंगा का जलस्तर 64 मीटर से ऊपर पहुंचने से तटीय इलाके में हड़कंप की स्थिति रही। पंडों की चौकियां घाट की निचली फर्श से हटाकर ऊपर ले जाने का सिलसिला शुरू हो गया। माला-फूल, पूजा सामग्री और प्रसाद की दूकानों को भी हटाना पड़ा। गंगा सेवा निधि के कार्यालय में गंगा प्रवेश कर गईं। दशाश्वमेध के ब्रह्मेश्वर महादेव, नागेश्वर महादेव मंदिरों में भी लहरें हिलोरें मारने लगीं।
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ललिता घाट पर शेषशाई विष्णु के भी गंगा ने पांव पखारे। गंगा के पाट पकड़ कर बहने से सभी घाटों का आपस में संपर्क टूट गया। गंगा सेवा निधि की ओर से कराई जाने वाली प्रसिद्ध गंगा आरती पुरोहितों ने छत पर की। शीतला घाट गंगोत्री सेवा समिति की भी गंगा आरती का स्थल बदल गया और सड़क से लगी सीढ़ी पर आरती कराई गई। इस दौरान दूरदराज से गंगा आरती देखने के लिए आए भक्तों को असुविधा का सामना करना पड़ा।
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