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UP का पहला ऐसा श्मशान घाट, जहां अब चिमनी में होगा शवदाह

Sat, 31 Mar 2018 02:26 PM IST
आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी Updated Sat, 31 Mar 2018 02:26 PM IST
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Funeral will done in chimney at manikarnika ghat
मणिकार्निका घाट पर बन रही चिमनी - फोटो : अमर उजाला
काशी के महाश्मसान मणिकर्णिका पर अब जल्द ही चिमनी में शवदाह होगा। यह प्रदेश का पहला श्मशान घाट होगा, जहां शवदाह के लिए चिमनी का निर्माण कराया जा रहा है। 
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इसके लिए दस प्लेटफार्म बनाए जा रहे हैं। इन पर पांच चिमनियां लगाई जाएंगी। एक चिमनी लगाई जा चुकी है। इन सुविधाओं पर दस करोड़ रुपये खर्च होंगे।

इन कार्यों के पूरा होने के बाद अंतिम संस्कार की सभी रस्में पहले की तरह होंगी और लकड़ी से ही शव दाह होगा लेकिन तब न राख उड़ेगी न धुआं होगा। शवदाह के लिए आने वाले लोगों के बैठने और पेयजल आदि के लिए बिड़ला धर्मशाला में सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं।
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पेयजल के आरओ प्लांट लगने के साथ ही घाट पर प्रवेश द्वार भी बनाया जा चुका है। दिसंबर 2018 तक ये सभी कार्य पूरे हो जाएंगे। अब तक एक चिमनी बन चुकी है, बाकी चार चिमनियों के भी दो महीने में तैयार हो जाने की संभावना है।
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उच्चतम बाढ़ बिंदु को ध्यान में रखते हुए चिमनियां बनाई जा रही हैं ताकि बारिश में गंगा के जलस्तर में बढ़ाव के दौरान शवदाह में किसी तरह की दिक्कत न आने पाए। इसके लिए बिड़ला धर्मशाला से मणिकर्णिका घाट की छतों तक रैंप भी बनाए जाएंगे।

ऐसे होगा शवदाह

Funeral will done in chimney at manikarnika ghat
मणिकर्णिका घाट पर जलते शव - फोटो : File Photo
जमीन से कुछ फिट ऊपर बने प्लेटफार्म पर चिता लगाई जाएगी। यहां पारंपरिक तरीके से शव दाह की रस्में होंगी। चिता में आग लगने के बाद चिमनी पर बने एक ढक्कन को नीचे गिरा दिया जाएगा। उससे पूरी चिता ढक जाएगी और धुआं चिमनी से बाहर निकलने लगेगी।

इससे राख भी नहीं उड़ेगी और बारिश होने पर भी किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका पर शव दाह से मृतक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। मोक्ष प्रदान करने के लिए महादेव खुद यहां विराजमान रहते हैं।

प्लानर इंडिया के सीईओ श्याम लाल सिंह का कहना है कि दिसंबर 2018 तक मणिकर्णिका घाट पर सुविधाओं के विस्तार से जुड़े सभी कार्य पूरे हो जाएंगे। शवदाह पारंपरिक तरीके से ही होगा।
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