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UP: भगोड़े राशिद नसीम पर सात साल में 127 प्राथमिकी, सस्ते प्लॉट और आकर्षक स्कीम का लालच दे करता था ठगी

Sat, 28 Feb 2026 06:27 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sat, 28 Feb 2026 06:27 AM IST
सार

Varanasi News: शाइन सिटी ग्रुप के प्रमोटर राशिद नसीम को दुबई में गिरफ्तार किया गया। इसके बाद ठगी के शिकार लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। पुलिस ने वाराणसी के साथ ही पूर्वांचल के कई जिलों जैसे बिहार, झारखंड में ठगी का जाल बिछाया था

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Fugitive Rashid Naseem faces 127 FIRs in seven years cheat people luring cheap plots attractive schemes
शाइन सिटी ग्रुप के प्रमोटर राशिद नसीम। - फोटो : amar ujala

विस्तार

UP Crime: जमीन और आकर्षक स्कीम का ऑफर देकर हजारों निवेशकों से अरबों रुपये की ठगी करने वाले भगोड़े शाइन सिटी ग्रुप के प्रमोटर राशिद नसीम पर वाराणसी कमिश्नरेट में ही सात साल में 127 प्राथमिकी दर्ज की गई। पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों में भी राशिद और उसके सहयोगियों पर प्राथमिकी दर्ज है। सबसे ज्यादा 110 प्राथमिकी कैंट थाने में दर्ज हैं। आरोपी की 45 करोड़ की संपत्ति बनारस में है। कई मामलों की जांच ईओडब्ल्यू कर रही है।

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धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी राशिद नसीम को प्रवर्तन निदेशालय के अनुरोध पर शुक्रवार को यूएई में गिरफ्तार किया गया। इससे ठगी के शिकार हुए लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। उम्मीद है कि पूंजी मिल जाएगी या फिर जमीन मिलेगी। राशिद ने कैंट, रोहनिया, शिवपुर, रामनगर, मिर्जामुराद, राजातालाब, बड़ागांव, फूलपुर, लक्सा थाना क्षेत्र में सस्ते प्लॉट और आकर्षक स्कीम का झांसा देकर हजारों लोगों से ठगी की थी। मामले में पूर्वांचल के साथ ही बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, एमपी और छत्तीसगढ़ के पीड़ितों ने भी प्राथमिकी दर्ज कराई है।

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प्रयागराज का रहने वाला, यूपी के कई जिलों में फैलाया ठगी का जाल
प्रयागराज के करेली थाना क्षेत्र के जीटीवी नगर करेली कॉलोनी निवासी राशिद नसीम ने 2013 में वाराणसी में शाइन सिटी का ऑफिस खोला था। कैंट थाना क्षेत्र के जेपी मेहता रोड पर शाइन सिटी कार्यालय में स्थानीय प्रभावशाली कुछ लोगों को कंपनी में निदेशक और अन्य कई पदों की जिम्मेदारियां सौंप दी। 

राशिद नसीम एमडी और उसके भाई आसिफ ने धीरे-धीरे हाईवे और शहर के अन्य इलाकों में किसानों से जमीन का अनुबंध कराया। एक ही जमीन को चार-पांच लोगों को बेचते रहे। गोल्ड, टूर पैकेज और धन दोगुना करने का झांसा देकर भी लोगों की गाढ़ी कमाई ठगते रहे। 

2019 में रुपये हड़पने के बाद राशिद लापता हो गया। बाद में मालूम चला कि वह दुबई में सोने का कारोबार कर रहा है। होटल संचालित कर रहा है। 2019 से राशिद नसीम उसके सहयोगियों पर वाराणसी में प्राथमिकी दर्ज होनी शुरू हुई। 2021 के बाद से प्राथमिकी की झड़ी लग गई।

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वाराणसी, लखनऊ, प्रयागराज में गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई, 18 करोड़ की संपत्ति जब्त हुई थी
कमिश्नरेट के पूर्व पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने 2021 में शाइन सिटी के आरोपियों पर शिकंजा कसा था। राशिद की 18 करोड़ से अधिक की संपत्ति वाराणसी, लखनऊ, प्रयागराज में गैंगस्टर एक्ट के तहत जब्त की थी। इंटर स्टेट ऑपरेशन के तहत राशिद नसीम के भाई आसिफ नसीम, इनर सर्किल में शामिल शाइन सिटी इंफ्रा के निदेशक और मंडुवाडीह के सिंधुरिया कॉलोनी निवासी डॉ. अमिताभ श्रीवास्तव, उसकी पत्नी मीरा श्रीवास्तव, जैतपुरा के काजी सहदुल्लपुर निवासी मोहम्मद तारीक, महाराजगंज के देवरिया निवासी मुश्ताक आलम, बरेली के हरिद्वारी निवासी आर्यन भार्गव, चितईपुर के सुसुवाही निवासी राजीव सिंह की गिरफ्तारी की गई थी। 

राजीव सिंह और मुश्ताक आलम जिला चौकाघाट जेल में है तो आसिफ नसीम समेत अन्य आरोपियों का लखनऊ जेल में ट्रांसफर हो चुका है। 2021 के बाद शाइन सिटी के आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। न ही संपत्ति जब्त की गई।

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ईओडब्ल्यू के पास 100 से अधिक प्राथमिकी की जांच
राशिद देश छोड़ने से पहले 30 करोड़ की धनराशि विदेश भेज चुका था। ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया था कि गुजरात की एक कंपनी के जरिये रुपये किस्तों में भेजा गया था। आसिफ नसीम ने जिला जेल चौकाघाट में बंद रहने के दौरान भी कई चौंकाने वाली जानकारियां ईओडब्ल्यू को दी थीं। आसिफ ने पूछताछ में बताया कि धोखाधड़ी की प्राथमिकी सिलसिलेवार दर्ज होने लगी तो राशिद ने 2019 में देश छोड़ कर भाग गया। 

वह भारत से नेपाल गया था फिर नेपाल से ही यूएई गया था और दुबई में कारोबार करने लगा था। राशिद जानता था कि उसके फर्जीवाड़े का खुलास जरूर होगा इसलिए देश छोड़ने से पहले उसने विदेशी लेनदेन के लिए अधिकृत गुजरात की एक कंपनी से 30 करोड़ करीबियों के बैंक अकाउंट में विदेश भेज दिए थे। जांच एजेंसियों से जुड़े अफसरों ने बताया कि देश छोड़ने से पहले राशिद नसीम ने हवाला के जरिये भी तगड़ी रकम करीबियों के पास विदेश भेजी थी।

40 फीसदी लोगों पर और 60 फीसदी खुद पर करता था खर्च
ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने बताया कि राशिद नसीम पहले से ही निर्धारित कर रखा था कि फर्जीवाड़े से मिले रुपये में से कितना और कहां खर्च करना है। किसी कस्टमर से 100 रुपये मिलते थे तो उसमें 40 फीसदी तक ऑफिस स्टाफ, ऑफिस मेंटेनेंस, एजेंट, क्लाइंट मीटिंग, साइट विजिट और पार्टी पर खर्च किए जाते थे। 60 फीसदी राशिद खुद के लिए बचत करने के साथ ही जमीन में भी निवेश करता था।

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