फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Four people died three burnt due to electrocution most incidents happen in northeastern states

हाहाकार: बिजली की चपेट में आने से 4 की मौत, तीन झुलसे; जानें- पूर्वोत्तर में ही क्यों होती हैं सर्वाधिक घटनाएं

Fri, 12 Jul 2024 12:28 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 12 Jul 2024 12:28 PM IST
सार

Varanasi News: वाराणसी सहित पूर्वांचल के अन्य जिलों में बिजली गिरने से चार लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें एक मासूम भी शामिल है। पुलिस ने सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। बलिया, सोनभद्र, आजमगढ़ और भदोही में बिजली से तीन लोगों के झुलसने की भी सूचना मिली है। सभी घायलों का इलाज चल रहा है।

विज्ञापन
Four people died three burnt due to electrocution most incidents happen in northeastern states
आसमान में कड़कती बिजली। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बलिया में सुखपुरा थाना के देल्हुआ वन गांव में बगीचे में खेल रहे दो बच्चे बिजली की चपेट में आ गए। इसमें 5 वर्ष के मासूम किशन कुमार की मौत हो गई जबकि सगा बड़ा भाई (7) शिवम झुलस गया। बलिया की में ही गांधीनगर निवासी चन्द्रमा यादव (50) खेत से घर आते समय बिजली की चपेट में आने से झुलस गए। 

विज्ञापन


सोनभद्र में करारी गांव निवासी आशा कार्यकर्ता कौशल्या देवी (47) की बिजली गिरने से मौत हो गई। भदोही के औराई क्षेत्र में पूरे रिशाल भक्तापुर निवासी कुंता देवी (35) धान की रोपाई करते समय बिजली की चपेट में आ गईं। उनकी मौत हो गई।
विज्ञापन


इसी तरह आजमगढ़ के बिलरियागंज थाना क्षेत्र के बैजुआपुर गांव में धान की रोपाई कर रहीं महिलाएं बिजली की चपेट में आ गईं। इसमें गीता (45) की मौत हो गई जबकि उर्मिला (38) झुलस गईं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

क्यूम्यलोनिंबस बादलों की टकराहट से चमकती है बिजली
बिजली गिरने की घटनाओं का असर आम जन जीवन पर भी पड़ने लगा है। बिजली चमकने के कारणों पर आधारित बीएचयू के पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान में एक शोध चल रहा है। 

एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुनीता वर्मा के निर्देशन में चल रहे शोध में प्रथम दृष्टया जो तथ्य सामने आया है, उसके अनुसार पूर्वोत्तर राज्यों में इस तरह की घटनाएं अधिक होती हैं। यहां प्री मानसून यानी बरसात का मौसम शुरू होने से पहले ही बिजली चमकती है।

डॉ. सुनीता वर्मा के निर्देशन में शोध छात्र प्रमोद यादव शोध कर रहे हैं। डॉ. सुनीता का शोध पत्र नेचुरल हाजरड्स जर्नल में प्रकाशित हो चुका है। उनका कहना है कि बिजली गिरना एक प्राकृतिक घटना है जो गरज वाले बादल के भीतर विपरीत चार्ज पृथक्करण और संचय के कारण घटित होती है। 

इस तरह की घटनाओं में क्लाउड-टू-क्लाउड चार्ज का आदान-प्रदान हो सकता है, यानी इंट्रा-क्लाउड लाइटनिंग (जो बादल बना उसी के भीतर बिजली चमकती है) लाइटनिंग, या क्लाउड टू-ग्राउंड चार्ज का एक्सचेंज, यानी क्लाउड टू-ग्राउंड लाइटनिंग हो सकता है।

यूपी समेत देश के चार राज्यों में होती है सर्वाधिक मौत
डॉ. सुनीता का कहना है कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा संसद में साझा किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि बादल से जमीन पर गिरने वाली बिजली की घटनाओं से हर साल हजारों लोगों की जान जाती है। इससे होने वाली मौतों के मामले में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा और उत्तर प्रदेश देश के शीर्ष चार सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल हैं। प्री मानसून (मार्च, अप्रैल और मई) में उत्तर पूर्व क्षेत्र में सबसे अधिक बिजली गिरती है। जो नार्वेस्टर के कारण होता है।

मानसून सीजन में नार्दर्न क्षेत्र में भी प्रभाव
मानसून सीजन (जून जुलाई और अगस्त) में नार्दर्न पार्ट ऑफ इंडिया (जम्मू और कश्मीर) में भी घटनाएं देखने को मिलती हैं। इसका कारण जियोलाजिकल उत्पत्ति और पहाड़ी क्षेत्र है। इन नुकसानों को केवल सक्रिय मौसमों और बिजली गिरने के क्षेत्रों की पहचान करके ही कम किया जा सकता है। 

वर्तमान में जो अध्ययन चल रहा है, वह राज्य/केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर भारत में रिपोर्ट की गई हताहतों की संख्या के साथ बिजली गिरने वाले क्षेत्रों की पहचान और सहसंबंध स्थापित करता है।

16 वर्षों के इमेजिंग सेंसर का विश्लेषण में भी शामिल
बीएचयू में चल रहे शोध कार्य में 16 वर्षों (1998-2013) की अवधि के लिए लाइटनिंग इमेजिंग सेंसर के मौसमी और मासिक समग्र उपग्रह डेटा का विश्लेषण किया गया है। डॉ. सुनीता के अनुसार इस अध्ययन में भारत के प्रमुख बिजली-प्रवण मौसमों और क्षेत्रों की पहचान का प्रयास भी किया जा रहा है।

मध्यप्रदेश में सबसे अधिक मौतें
भारत के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, आकाशीय बिजली गिरने से मौतों का अनुमान भारत में आकस्मिक मौतों और आत्महत्याओं के आंकड़ों का उपयोग करके भी लगाया गया है। राज्यवार हताहतों की संख्या के अध्ययन से पता चलता है कि हर वर्ष औसतन सबसे अधिक मौतें मध्य प्रदेश (313 मौतें), महाराष्ट्र (281 मौतें) और उड़ीसा (255 मौतें) में होती हैं। 

अनुकूल जलवायु परिस्थितियां, जैसे नमी सामग्री की उपलब्धता, अस्थिर वातावरण और मजबूत संवहन, उड़ीसा और महाराष्ट्र के क्षेत्रों में बिजली गिरने के गंभीर मामलों का कारण बनती है।

एलर्ट के लिए डाउनलोड करें दामिनी और सचेत एप
आकाशीय बिजली को ध्यान में रखकर जिला प्रशासन ने एडवाइजरी जारी की। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की प्रभारी एडीएम वित्त एवं राजस्व वंदिता श्रीवास्तव ने बताया कि आकाशीय बिजली से दामिनी, सचेत एप बचाएगा। इसे गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें। 

दामिनी एप लगभग 20 से 40 किमी के क्षेत्र में संभावित लाइटनिंग अलर्ट का नोटिफिकेशन देगा। यह मौसम, आंधी तूफान की सटीक जानकारी देगी। बताया कि यह एप मौसम विज्ञान विभाग ने विकसित किया है। वज्रपात से बचने के लिए पेड़ों के नीचे, मोबाइल टावर व ऊंचे मकान के नीचे शरण न लें। बच्चों को बाहर न खेलने दें, लोहे की खिड़की, दरवाजे व हैंडपम्प आदि को न छुएं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed