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Varanasi News: खालसा पंथ के साथ रखी गई एक भारत श्रेष्ठ भारत की नींव
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खालसा पंथ के साथ रखी गई एक भारत श्रेष्ठ भारत की नींव
खालसा पंथ स्थापना दिवस और बैसाखी पर वेबिनार में बोले वक्ता
गुरु गोविंद सिंह और सद्गुरु रामसिंह के आदर्शों पर चलकर देश और समाज बढ़ेगा आगे
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। कूका यादगारी ट्रस्ट लुधियाना के उपाध्यक्ष अजीत सिंह नामधारी ने कहा कि भारत बहुभाषी विविध संस्कृतियों तथा अनेक प्रकार की ऋतुओं से संपन्न कृषि प्रधान देश है। यहां के विभिन्न अंचलों में प्रकृति परिवर्तन के साथ त्योहार मनाने की परंपरा रही है। वैशाखी ऐसा पर्व है जिसे पंजाब तथा हरियाणा में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। वह संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के श्री सद्गुरु रामसिंह महाराज पीठ तुलनात्मक धर्म दर्शन विभाग की ओर से नामधारी संत खालसा पंथ स्थापना दिवस एवं बैसाखी पर्व पर वेबिनार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में इस पर्व को बिहू के रूप में मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे मेष संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। सिख संप्रदाय में इस पर्व का विशेष महत्व इसलिए भी ज्यादा है कि यहां से उनके सामाजिक एवं आध्यात्मिक विकास का एक नवीन अध्याय प्रारंभ हुआ। आज ही के दिन सन 1699 में गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की सृजना के साथ एक भारत श्रेष्ठ भारत की नींव रखी थी। बाद में सन 1857 में आज ही के दिन सद्गुरु रामसिंह ने श्वेत ध्वज फहराकर नामधारी संत खालसा पंथ की नींव रखी।
कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि सिख धर्म की मूल बातों के अनुसार, एक सच्चा खालसा भेदभाव नहीं करता है। वह उत्पीड़ितों की रक्षा में खड़ा होता है। गुरु गोविंद सिंह और सद्गुरु रामसिंह के आदर्शों पर चलकर देश और समाज को आगे बढ़ाना है।
डॉ. विनोद बब्बर ने कहा कि खालसा के यदि शाब्दिक अर्थ की बात करें तो होता है ‘शुद्ध’। यह अरबी शब्द ‘खालिस’ से लिया गया है। खालसा शब्द श्री गुरु ग्रंथ साहिब में संत कबीर की वाणी में केवल एक बार आता है। नई दिल्ली से प्रो. रवींद्र सिंह ने कहा कि खालसा की स्थापना के साथ ही सिख परंपरा में एक नए चरण की शुरुआत हुई। केंद्रीय विश्वविद्यालय, भटिंडा के प्रो. कुलदीप सिंह भट्टी ने कहा कि खालसा ने सिख समुदाय के लिए एक राजनीतिक और धार्मिक दृष्टि भी प्रदान की। विभागाध्यक्ष प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी, प्रो. विजय तिवारी, प्रो. सुधाकर मिश्र ने विचार रखे। संगोष्ठी का संचालन, स्वागत एवं संयोजन डॉ. रेणु द्विवेदी ने किया।
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खालसा पंथ स्थापना दिवस और बैसाखी पर वेबिनार में बोले वक्ता
गुरु गोविंद सिंह और सद्गुरु रामसिंह के आदर्शों पर चलकर देश और समाज बढ़ेगा आगे
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। कूका यादगारी ट्रस्ट लुधियाना के उपाध्यक्ष अजीत सिंह नामधारी ने कहा कि भारत बहुभाषी विविध संस्कृतियों तथा अनेक प्रकार की ऋतुओं से संपन्न कृषि प्रधान देश है। यहां के विभिन्न अंचलों में प्रकृति परिवर्तन के साथ त्योहार मनाने की परंपरा रही है। वैशाखी ऐसा पर्व है जिसे पंजाब तथा हरियाणा में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। वह संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के श्री सद्गुरु रामसिंह महाराज पीठ तुलनात्मक धर्म दर्शन विभाग की ओर से नामधारी संत खालसा पंथ स्थापना दिवस एवं बैसाखी पर्व पर वेबिनार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में इस पर्व को बिहू के रूप में मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे मेष संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। सिख संप्रदाय में इस पर्व का विशेष महत्व इसलिए भी ज्यादा है कि यहां से उनके सामाजिक एवं आध्यात्मिक विकास का एक नवीन अध्याय प्रारंभ हुआ। आज ही के दिन सन 1699 में गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की सृजना के साथ एक भारत श्रेष्ठ भारत की नींव रखी थी। बाद में सन 1857 में आज ही के दिन सद्गुरु रामसिंह ने श्वेत ध्वज फहराकर नामधारी संत खालसा पंथ की नींव रखी।
कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि सिख धर्म की मूल बातों के अनुसार, एक सच्चा खालसा भेदभाव नहीं करता है। वह उत्पीड़ितों की रक्षा में खड़ा होता है। गुरु गोविंद सिंह और सद्गुरु रामसिंह के आदर्शों पर चलकर देश और समाज को आगे बढ़ाना है।
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डॉ. विनोद बब्बर ने कहा कि खालसा के यदि शाब्दिक अर्थ की बात करें तो होता है ‘शुद्ध’। यह अरबी शब्द ‘खालिस’ से लिया गया है। खालसा शब्द श्री गुरु ग्रंथ साहिब में संत कबीर की वाणी में केवल एक बार आता है। नई दिल्ली से प्रो. रवींद्र सिंह ने कहा कि खालसा की स्थापना के साथ ही सिख परंपरा में एक नए चरण की शुरुआत हुई। केंद्रीय विश्वविद्यालय, भटिंडा के प्रो. कुलदीप सिंह भट्टी ने कहा कि खालसा ने सिख समुदाय के लिए एक राजनीतिक और धार्मिक दृष्टि भी प्रदान की। विभागाध्यक्ष प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी, प्रो. विजय तिवारी, प्रो. सुधाकर मिश्र ने विचार रखे। संगोष्ठी का संचालन, स्वागत एवं संयोजन डॉ. रेणु द्विवेदी ने किया।
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