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बेटे की अनुकंपा नियुक्ति के लिए बरेका का चक्कर काट रहीं पूर्व ओलंपियन की पत्नी

Wed, 21 Jul 2021 01:30 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 21 Jul 2021 01:30 AM IST
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Former Olympian's wife circling Bereka for compassionate appointment of son
पांच साल पहले पति के निधन के बाद बेटे को अनुकंपा के आधार पर बरेका में नौकरी तो मिली, लेकिन 2020 में उसे हटा दिया गया। जिसे फिर से बहाल कराने के लिए बरेका के चक्कर काटने को मजबूर हूं। साल भर से निशानेबाज बेटे की शैक्षिक योग्यता के मुताबिक नौकरी के लिए अधिकारियों से गुहार लगा रही हूं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं है। सरकारों ने भी कई वादे किए थे, लेकिन पूरा किसी ने नहीं किया।
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मंगलवार को पूर्व ओलंपियन पद्मश्री मोहम्मद शाहिद की पत्नी परवीन ने मंगलवार को पति की पांचवीं बरसी पर उनको याद करते हुए अपना दर्द बयां किया। परवीन बताती हैं कि पद्मश्री और अर्जुन अवार्ड से सम्मानित एशियाई और ओलंपिक खेलों में देश को पदक दिलाने वाले भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान को याद करना तक भूल गए। तीन साल पहले कचहरी चौराहे से एलटी कालेज तक की सड़क मोहम्मद शाहिद के नाम पर रखी गई थी। जिसकी पहचान के लिए कचहरी चौराहे पर एक शिलापट्ट लगी है। जिसे पिछले साल ही उखाड़कर वहां आटो रिक्सा स्टैंड बना दिया गया है। ऐसा अपमान देश के एक ओलंपियन खिलाड़ी के साथ शर्मनाक है। इधर, बरेका में 30 साल तक क्रीड़ा अधिकारी रहे शाहिद के निधन के बाद बरेका खेल मैदान को मोहम्मद शाहिद का नाम देने का एक बोर्ड तो लगा, लेकिन बाद उसे हटा दिया। इसके लिए रेलवे बोर्ड ने बकायदा मंजूरी भी दी थी।
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ये हैं उपलब्धियां
शाहिद 1980 में मास्को में हुए ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक विजेता भारतीय हॉकी टीम के सदस्य थे। इसके अलावा वह 1982 के एशियन गेम्स में रजत पदक और 1986 के एशियाड खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के भी सदस्य थे। उन्हें 1980-81 में अर्जुन पुरस्कार और 1986 में पद्मश्री से सम्मानित किया था। हॉकी को एक नया ड्रिबलिंग शॉट देने वाले शाहिद को उनकी खेल कला की बदौलत उन्हें द मैन ऑफ स्किल मोहम्मद शाहिद का भी खिताब मिला था।
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पदक वापस करने के फैसले बाद शुरू हो पाई भी राष्ट्रीय प्रतियोगिता
20 जुलाई 2016 में ओलंपियन शाहिद के निधन के बाद से परिवार उपेक्षा का शिकार रहा है। 2018 में उनके नाम से प्रतियोगिता की मांग उठी। मांग पूरी न होने पर पत्नी ने शाहिद के सभी पदक लौटाने का ऐलान कर दिया था। हालंकि बाद में खेल विभाग और ओलंपिक संघ के आश्वासन के बाद परिवार मान गया। जिसके बाद मोहम्मद शाहिद के नाम से दो साल राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं हुईं जो फिलहाल साल भर से कोरोना के कारण स्थगित है।

वर्जन
इस बारे में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं। यदि परवीन और उनके बेटे को कोई दिक्कत परेशनी है तो वो बरेका के जनसंपर्क कार्यालय में आकर अपनी समस्या रख सकते है।- राजेश कुमार जनसंपर्क अधिकारी, बरेका
शिलापट्ट हटाने की जानकारी अभी नगर निगम को नहीं थी। आपके माध्यम से जानकारी मिली है, जल्द ही इसे दुरुस्त कराया जाएगा।- देवी दयाल वर्मा, अपर नगर आयुक्त
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